Samwad 2026: एआई के दौर में क्या है शिक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती? एकेटीयू प्रो-वीसी प्रो. राजीव से जानें
Amar Ujala Samwad 2026: अमर उजाला संवाद में एकेटीयू के प्रो-वाइस चांसलर राजीव कुमार ने कहा कि एआई से डरने की नहीं, उसे अपनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय फैकल्टी और छात्रों को एआई दक्ष बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
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Amar Ujala Samwad: लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद 2026 के दौरान एआई के जरिए स्मार्ट शिक्षा और इंटेलिजेंट कैंपस विषय पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में एकेटीयू के प्रो-वाइस चांसलर राजीव कुमार, आईआईएम के निदेशक, जयश्री पेरिवाल ग्रुप ऑफ स्कूल्स की फाउंडर एवं चेयरपर्सन जयश्री पेरिवाल और सुभारती विश्वविद्यालय के डीन शामिल हुए। चर्चा का मुख्य केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का शिक्षा व्यवस्था और भविष्य की नौकरियों पर प्रभाव रहा।
कंप्यूटर आने पर भी ऐसा ही डर था: प्रो. राजीव
पैनल चर्चा के दौरान राजीव कुमार ने एआई को लेकर लोगों के मन में मौजूद डर और भ्रम पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह एआई को लेकर लोगों में आशंका दिखाई दे रही है, वैसा ही माहौल कई साल पहले कंप्यूटर आने के समय भी था।
उन्होंने कहा, 'करीब 30 साल पहले जब भारत में कंप्यूटर आया था, तब भी यही कहा जा रहा था कि मशीनें इंसानों की नौकरियां खत्म कर देंगी। उस समय छात्र भी चिंतित थे। लेकिन बाद में क्या हुआ? भारत ने कंप्यूटर और तकनीक को इतनी तेजी से अपनाया कि आज हम आईटी और सर्विस सेक्टर में दुनिया की बड़ी ताकत बन चुके हैं।'
राजीव कुमार ने कहा कि एआई भी उसी तरह का बदलाव है, जिसे रोकना संभव नहीं है। इसलिए इससे डरने के बजाय इसे समझना और अपनाना जरूरी है।
एआई केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं
उन्होंने माना कि पिछले कुछ वर्षों में एआई को लेकर तेजी से बदलाव हुए हैं और इससे विश्वविद्यालयों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग की पारंपरिक शाखाओं में छात्रों की रुचि कुछ कम हुई है, जबकि ज्यादातर छात्र और अभिभावक अब कंप्यूटर साइंस और एआई से जुड़ी पढ़ाई की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
राजीव कुमार ने कहा, 'आज लगभग हर अभिभावक चाहता है कि उसका बच्चा कंप्यूटर साइंस या उससे जुड़ी फील्ड में जाए। लेकिन एआई केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है। यह मैनेजमेंट, लीगल, फार्मेसी और सामान्य विज्ञान जैसे हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इसलिए यह चुनौती केवल इंजीनियरिंग संस्थानों की नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों की है।'
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय अब केवल कंप्यूटर साइंस के छात्रों को ही नहीं, बल्कि कोर इंजीनियरिंग, फार्मेसी और मैनेजमेंट के छात्रों को भी एआई के बारे में प्रशिक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे भविष्य में प्रतिस्पर्धी बने रह सकें।
सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित फैकल्टी की: प्रो. राजीव कुमार
कैंपस में एआई को लागू करने के सवाल पर राजीव कुमार ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर शिक्षक एआई को सही तरीके से नहीं समझेंगे, तो छात्रों तक इसका सही लाभ नहीं पहुंच पाएगा।
उन्होंने कहा, 'हमारी यूनिवर्सिटी का इस समय सबसे बड़ा फोकस फैकल्टी मेंबर्स को एआई दक्ष बनाना है। जब शिक्षक एआई को अच्छी तरह समझेंगे और उसका उपयोग सीखेंगे, तभी उसका लाभ सीधे छात्रों तक पहुंचेगा।'
उनके मुताबिक, जब फैकल्टी एआई को अपनाएगी तो उसका प्रभाव अपने आप छात्रों तक पहुंचेगा और पूरा शैक्षणिक माहौल तकनीक के अनुरूप बदलने लगेगा।
अब रटने वाली पढ़ाई नहीं चलेगी: जयश्री पेरिवाल
चर्चा के दौरान जयश्री पेरिवाल ने भी एआई के उपयोग और उसके सही इस्तेमाल पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह सच है कि बच्चे अब होमवर्क और असाइनमेंट के लिए चैटजीपीटी जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे शिक्षा खत्म नहीं हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों को अपने पढ़ाने और सवाल पूछने का तरीका बदलना होगा। अगर शिक्षक केवल सामान्य निबंध लिखने जैसे काम देंगे, तो छात्र एआई की मदद ले लेंगे। लेकिन यदि बच्चों को रिसर्च, सर्वे और विश्लेषण आधारित कार्य दिए जाएं, तो उन्हें खुद सोचने और समझने की जरूरत पड़ेगी।
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जयश्री पेरिवाल ने कहा कि अब शिक्षा को रटने वाली व्यवस्था से निकालकर क्रिटिकल थिंकिंग आधारित बनाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एआई का सही उपयोग तभी संभव है, जब शिक्षक खुद तकनीक को समझें और उसका प्रभावी इस्तेमाल करना सीखें।
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