11वीं के छात्र ने किया ऐसा आविष्कार, बड़े-बड़ों को दे दी मात
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इससे पहले कि आपको आगे की कहानी बताई जाए बेंजामिन फ्रेंकलिन की कही एक लाइन याद आती है, 'परिश्रम ही सौभाग्य की जननी है।'
'अनंग तादर' देश के उत्तर-पूर्वी छोर के राज्य अरुणाचल प्रदेश का रहने वाला एक लड़का है, जो 11वीं क्लास का छात्र है। कुछ ऐसा ढूंढने की इच्छाशक्ति जिससे कि किसी दिव्यांग या जरूरतमंद की जिंदगी आसान की जा सके और दिमाग में कुछ नया करते रहने की जिद्द ने अनंग को आज देश ही दुनियाभर की नजरों के सामने रख दिया।
अनंग ने आंखों से दिव्यांग लोगों के लिए एक ऐसी मशीन तैयार की है जिससे कि उन्हें घर या बाहर कहीं भी चलने में कोई दिक्कत न हो। इस मशीन को नाम दिया गया है 'गॉगल फोर ब्लाइंड'(G4B) और लोग इस इन्वेंशन को देख कर आश्चर्यचकित हैं।
'G4B' की खास बात ये है कि ये चमगादरों की तरह आस-पास के ऑब्जेक्ट से इको के आधार पर काम करेगा, जिससे उससे थोड़ी दूरी से ही ये पता चल जाए कि सामने कोई ऑब्जेक्ट है या कोई बाधा है।
इस टेक्नोलॉजी का नाम है 'इकोलोकेशन'। इस टेक्नोलॉजी में होता ये है कि साउंड वेव के इस्तेमाल से ये पता लगाया जाता है कि क्या जो सामान हैं वो सब स्पेस में हैं या आगे जाने की जगह है या नहीं।
अनंग के इन्वेंशन को गुवाहाटी के रीजनल साइंस सेंटर में आयोजित हुए रीजनल लेवल साइंस फेस्टिवल में मोस्ट इनोवेटिव केटेगरी में रखा गया और दीनानाथ पाण्डेय स्मार्ट आइडिया इनोवेशन अवॉर्ड से नवाजा गया।
इसके बाद 6 मार्च को अनंग ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित नेशनल लेवल साइंस एग्जीबीशन में हिस्सा लिया जहां हनी बी नेटवर्क, नेशनल इग्निशन फैसिलिटी, सोसाइटी फोर रिसर्च एंड इनिशिएटिव फोर सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज एंड इन्स्टिट्यूशन्स, ग्लोबल यूथ एक्शन नेटवर्क और यूनिसेफ(UNICEF) इस इन्वेंशन से काफी प्रभावित हुए थे।
NIF और UNICEF 'G4B' को मार्केट में भी लॉन्च करना चाहते हैं, इसीलिए अनंग को इस इन्वेंशन के कुछ और सैंपल भेई तैयार करने को कहा गया है जिसे आंखों से दिव्यांग लोगों पर टेस्ट किया जा सके। साथ ही ये भी प्लान किया गया है कि अगर टेस्टिंग में ये प्रोडक्ट सक्सेसफुल होता है तो इसे दूसरे अन्य डेवलपर्स के साथ मिलकर और भी हल्का करने की भी कोशिश की जाएगी।
अनंग को टेक्नोलॉजी और रोबोट्स बनाने में नए रिसर्च करने का बहुत ही शौक रहा है, इससे पहले भी कई बार अनंग अलग-अलग जगहों पर अवार्ड जीत चुके हैं।
भविष्य में अनंग एक एग्जोस्केलेटन बनाना चाहते हैं जो कि लोगों को भारी सामान उठाने में मदद करेगा।
लेकिन अनंग के गॉगल फोर ब्लाइंड प्रोजेक्ट की सफलता के पीछे की कहानी इतनी आसान नहीं थी। ये एक गरीब परिवार से आते हैं लेकिन जो दिमाग में लगन और पैशन नाम का कीड़ा घुसता है न तो फिर कोई भी मजबूरी इतनी ऊंची नहीं रहती जिसे कूद के पार ना किया जा सके। अनंग अपने इस प्रोजेक्ट के लिए और अपने दूसरे प्रोजेक्ट के लिए भी अपनी पॉकेट मनी के पैसे बचा-बचा कर काम करते हैं और नए इन्वेंशन में लगे रहते हैं।
अब अनंग को G4B के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है। जिसे बनाने में प्रति पीस 15000 रुपए का खर्च आना है। खबर आई कि अरुणाचल के मुख्यमंत्री फेमा खांडू ने अनंग को आर्थिक मदद की बात की है।
अब इंतजार है उस दिन का जब अनंग के बनाए मशीन को दिव्यांगो पर टेस्ट करने के बाद इसे बाजार में भी उतारा जाए जिससे लाखों लोगों को देखने की शक्ति मिलेगी।
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