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Success: सरकारी स्कूल से पढ़ाई, छोटी उम्र में ही अंतरिक्ष क्षेत्र में बनाई पहचान; युवाओं के लिए क्या सीख?

Mon, 10 Aug 2026 05:40 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 10 Aug 2026 05:40 AM IST
सार

Success Of Kandula from Andhra Pradesh: आंध्र प्रदेश की 14 वर्षीय कंडुला जेसी ने अपनी प्रतिभा और जिज्ञासा से अंतरिक्ष की दुनिया में खास पहचान बनाई है। सरकारी स्कूल की छात्रा जेसी को दुनिया के पहले ऑल-गर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन ‘शक्तिसैट’ के लिए चुना गया है। वह इस मिशन में चुनी गईं 20 भारतीय छात्राओं में शामिल हैं। आइए, कुंडला के इस सफलता के सफर को विस्तार से समझते हैं...

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Success Story 14-year-old Kandula from Andhra Pradesh From a Government School to Space
भारत की बेटी का अंतरिक्ष तक का सफर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बात मई 2025 की है। जेसी गर्ल्स हाईस्कूल, धवलेश्वरम में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे अपने बोर्ड इम्तिहान की तैयारियों में जुटे थे। लेकिन चौदह वर्षीय एक बच्ची ऐसी भी थी, जिसकी निगाहें किताबों से आगे एक बड़े सपने पर टिकी थीं। विज्ञान की दुनिया में कुछ अनोखा करने का जुनून और जिज्ञासा ने उस साधारण सरकारी स्कूल की छात्रा को आज देशभर में चर्चा का विषय बना दिया है। हम बात कर रहे हैं कंडुला जेसी की, जिन्हें दुनिया के पहले अंतरराष्ट्रीय ऑल गर्ल्स लूनर क्यूबसैट मिशन 'शक्तिसैट' के लिए चुना गया है।
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कंडुला जेसी करीब 12,000 आवेदकों और 108 देशों की प्रतिभागियों के बीच चुनी गईं 20 भारतीय छात्राओं में शामिल हैं और आंध्र प्रदेश से इस दल की एकमात्र प्रतिभागी हैं। इस मिशन के तहत छात्राओं की टीम द्वारा तैयार किए गए लूनर क्यूबसैट को 11 अक्तूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए जाने की योजना है। यह दुनिया का पहला ऐसा मिशन है, जिसमें केवल छात्राएं मिलकर चंद्र मिशन के लिए क्यूबसैट तैयार कर रही हैं। मिशन के तहत जेसी को सैटेलाइट सिस्टम, स्पेस टेक्नोलॉजी और अन्य तकनीकी विषयों की ट्रेनिंग दी जा रही है। इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया है, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी एक नई उम्मीद पैदा की है।
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क्या करते हैं कुंडला के पिता?

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के धवलेश्वरम की रहने वाली 14 वर्षीय कंडुला जेसी की कहानी एक छोटे से शहर से निकलकर अंतरिक्ष विज्ञान के बड़े मंच तक पहुंचने की है। साधारण परिवार से आने वाली जेसी के पिता कारपेंटर हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होने के कारण उनके माता-पिता ने उन्हें निजी स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में दाखिला करवा दिया। कक्षा दसवीं की छात्रा जेसी वर्तमान में जिला परिषद गर्ल्स हाईस्कूल, धवलेश्वरम में पढ़ाई कर रही हैं।
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किसने पहचानी कुंडला की प्रतिभा?

जेसी की विज्ञान के प्रति रुचि को सबसे पहले उनकी शिक्षिका ने पहचाना। उन्होंने जेसी की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए उसका पंजीकरण मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में कराया। जेसी का सपना इसरो में काम करना है। अपनी उपलब्धि तक सीमित न रहते हुए जेसी ने स्कूल की अन्य छात्राओं को भी इस अवसर के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में तकनीकी समस्या के कारण वह ऑनलाइन कोर्स पूरा नहीं कर पाई थीं, लेकिन उनकी शिक्षिका के प्रयासों से उन्हें दोबारा मौका मिला। इसके बाद जेसी ने चयन प्रक्रिया के सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा किया और अंतिम चयन में अपनी जगह बनाई।

बोर्ड के साथ कैसे की स्पेस साइंस की पढ़ाई?

कक्षा 10वीं की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ जेसी ने मिशन शक्तिसैट की ऑनलाइन कक्षाओं में भी पूरी लगन के साथ हिस्सा लिया। पढ़ाई के दबाव के बावजूद उन्होंने इस विशेष कार्यक्रम के लिए नियमित समय निकाला और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े नए विषयों को समझने का प्रयास किया। कई तकनीकी अवधारणाओं को समझने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। इसके बावजूद जेसी ने चुनौतियों से घबराने के बजाय अपने शिक्षकों की मदद ली, अध्ययन सामग्री को समझा और धीरे-धीरे इन जटिल विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत की। बोर्ड परीक्षा की तैयारी और मिशन की ट्रेनिंग दोनों को साथ संभालते हुए जेसी ने इस कार्यक्रम के हर चरण को सफलतापूर्वक पूरा किया।

कुंडला के सामने क्या थी सबसे बड़ी चुनौती?

मिशन शक्तिसैट में चयन के लिए जेसी की सबसे बड़ी चुनौती इंटरव्यू था, क्योंकि यह पूरी तरह अंग्रेजी भाषा में  होना था। इसके लिए जेसी नेे शिक्षकों की मदद ली और ऑनलाइन शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से अंग्रेजी बोलनेे का लगातार अभ्यास किया। कई हफ्तों की तैयारी के दम पर जेसी ने इंटरव्यू में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी मेहनत का परिणाम रहा कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए और मिशन शक्तिसैट के लिए चुनी गईं 20 भारतीय छात्राओं में अपनी जगह बनाई।

युवाओं के लिए क्या सीख?

  • नए अवसरों को पहचानना और उन्हें पाने के लिए प्रयास करना जरूरी है।
  • कठिन विषयों या चुनौतियों से डरने के बजाय लगातार सीखते रहना चाहिए।
  • अपनी उपलब्धियों तक सीमित न रहकर दूसरों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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