सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Education ›   Success Stories ›   IAS Divya Tanwar: Cracked UPSC Without Coaching and Became an Inspiration for Millions

Divya Tanwar: मां ने मेहनत-मजदूरी करके पढ़ाया, बेटी ने IAS बन दिया संघर्ष का फल; ऐसे मिली अफसर बनने की प्रेरणा

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 08 Oct 2025 08:38 PM IST
विज्ञापन
सार

IAS Divya Tanwar Success Story: दिव्या का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, लेकिन उनकी मां ने कभी हार नहीं मानी। मां ने अकेले ही मेहनत मजदूरी करके तीन बच्चों की परवरिश की।
 

IAS Divya Tanwar: Cracked UPSC Without Coaching and Became an Inspiration for Millions
आईएएस दिव्या तंवर - फोटो : IG (divyatanwar__ips)
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

Divya Tanwar Success Story: देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में गिनी जाने वाली यूपीएससी (UPSC) को पास करना लाखों छात्रों का सपना होता है। कई परीक्षार्थी वर्षों की मेहनत और कई प्रयासों के बाद सफलता हासिल करते हैं, जबकि कुछ प्रतिभाशाली उम्मीदवार अपने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर इतिहास रच देते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है आईएएस दिव्या तंवर की, जिन्होंने कम उम्र और सीमित संसाधनों के बावजूद असंभव को संभव कर दिखाया।

Trending Videos

दिव्या तंवर: मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल

आईएएस दिव्या तंवर ने वर्ष 2021 में यूपीएससी परीक्षा अपने पहले ही प्रयास में पास कर 438वीं रैंक हासिल की थी। उस समय वह मात्र 21 वर्ष की थीं। खास बात यह रही कि उन्होंने यह सफलता बिना किसी कोचिंग सेंटर के हासिल की।

दिव्या ने हार नहीं मानी और अगले ही वर्ष यानी 2022 में दोबारा परीक्षा दी। इस बार उन्होंने और भी शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक (AIR) 105 प्राप्त की और आईएएस बनने का अपना सपना साकार किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

हरियाणा की मेधावी बेटी

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की रहने वाली दिव्या तंवर बचपन से ही एक होनहार छात्रा रही हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा एक सरकारी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उनका चयन नवोदय विद्यालय, महेंद्रगढ़ में हुआ। दिव्या ने विज्ञान (Science) विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसके तुरंत बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।

आर्थिक संघर्ष के बावजूद सफलता

दिव्या का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, लेकिन उनकी मां ने कभी हार नहीं मानी। मां ने अकेले ही मेहनत मजदूरी करके तीन बच्चों की परवरिश की और दिव्या की पढ़ाई में हर संभव सहयोग दिया। दिव्या अक्सर अपनी मां को अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय देती हैं।

दिव्या ने बताया कि उन्हें आईएएस बनने की प्रेरणा बचपन में तब मिली थी जब उनके स्कूल में एक आईएएस अधिकारी आए थे। उन्होंने तभी से सोचा था कि वो भी आगे चलकर आईएएस बनेंगी।

सोशल मीडिया पर प्रेरणा का स्रोत

आज आईएएस दिव्या तंवर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं और अपनी यात्रा से जुड़े अनुभव व मोटिवेशनल विचार साझा करती रहती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 90 हजार फॉलोअर्स हैं, जो उनसे प्रेरणा लेते हैं।

दिव्या तंवर की कहानी यह साबित करती है कि सफलता पाने के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास सभी संसाधन हों, बस दृढ़ निश्चय, अनुशासन और आत्मविश्वास हो तो हर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Education News in Hindi related to careers and job vacancy news, exam results, exams notifications in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Education and more Hindi News.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed