SC: पश्चिम एशियाई देशों के लिए मूल्यांकन नीति पर अगले हफ्ते सुनवाई, क्या हैं छात्रों की मांगें? जानें मामला
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह अगले सप्ताह उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें खाड़ी देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द होने के बाद सीबीएसई की मूल्यांकन नीति को चुनौती दी गई है। छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को बदलने और विशेष परीक्षा कराने की मांग की है।
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशियाई देशों के छात्रों की याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई की जाएगी। याचिका में पश्चिम एशियाई देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द होने के बाद नियमित छात्रों के लिए बनाई गई सीबीएसई की मूल्यांकन नीति को चुनौती दी गई है। मामला उन छात्रों से जुड़ा है, जिनकी परीक्षाएं ईरान-अमेरिका युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण रद्द कर दी गई थीं।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीबीएसई की ओर से याचिका पर जवाब दाखिल किया जाएगा। इसके बाद अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी।
8 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था जवाब
इससे पहले 8 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने खाड़ी देशों के 30 नियमित छात्रों की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी और केंद्र सरकार तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जवाब मांगा था। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल को भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
इसके अलावा अदालत ने खाड़ी देश के एक निजी परीक्षार्थी की ओर से दायर अलग याचिका पर भी केंद्र और सीबीएसई से जवाब मांगा था। इस याचिका में 21 जून को जारी निजी छात्रों के मूल्यांकन संबंधी अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
छात्र क्यों हैं नाराज?
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि छात्र सीबीएसई की मूल्यांकन नीति से संतुष्ट नहीं हैं। 30 छात्रों की ओर से दायर याचिका में 27 मार्च 2026 को जारी मूल्यांकन योजना को रद्द करने या उसमें बदलाव करने की मांग की गई है। साथ ही अदालत से निष्पक्ष, पारदर्शी और भेदभाव रहित मूल्यांकन प्रणाली लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
छात्रों ने विशेष परीक्षा कराने की मांग की
याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्रभावित छात्रों के लिए सभी विषयों में विशेष परीक्षा और विशेष सुधार परीक्षा आयोजित की जाए।
छात्रों ने यह भी मांग की है कि विषयों की संख्या पर कोई सीमा न लगाई जाए और उन्हें पुराने तथा नए परिणामों में से बेहतर परिणाम रखने की अनुमति दी जाए।
सीबीएसई ने निजी छात्रों के लिए बनाई नई नीति
22 जून को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सीबीएसई ने उन निजी छात्रों के लिए नई मूल्यांकन नीति तैयार की है, जिनकी परीक्षाएं युद्ध के कारण रद्द हुई थीं।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों की समस्याओं को देखते हुए पूरे देश के लिए नई नीति तैयार की गई है। यह नई नीति 21 जून को अधिसूचित की गई थी।
निजी छात्रों के लिए कैसे तय होंगे अंक?
सीबीएसई के अनुसार जिन विषयों की परीक्षा नहीं हो सकी, उनमें निजी छात्रों के अंक 10वीं और आखिरी बार दी गई 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर तय किए जाएंगे।
| मूल्यांकन का आधार | भारांश |
|---|---|
| 10वीं बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंक | 40 प्रतिशत |
| पिछली बार दी गई 12वीं बोर्ड परीक्षा के थ्योरी अंक | 60 प्रतिशत |
दो तरह के छात्र हुए प्रभावित
सीबीएसई ने अदालत को बताया था कि सात खाड़ी देशों में परीक्षा रद्द होने से मुख्य रूप से दो श्रेणियों के छात्र प्रभावित हुए हैं।
| छात्र श्रेणी | विवरण |
| नियमित छात्र | स्कूल में पढ़ने वाले छात्र |
| निजी परीक्षार्थी | बिना स्कूल के बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र |
सीबीएसई के अनुसार निजी छात्रों के मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उनके पास स्कूल आधारित आंतरिक मूल्यांकन के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
दरअसल, मूल मूल्यांकन योजना स्कूलों द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंकों पर आधारित थी।
किस छात्र की याचिका से शुरू हुआ मामला?
सुप्रीम कोर्ट उस समय सऊदी अरब के अल जुबैल शहर के एक निजी परीक्षार्थी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। छात्र ने आरोप लगाया था कि सीबीएसई ने मूल मूल्यांकन योजना के अनुसार उसके 12वीं सुधार परीक्षा के परिणाम घोषित नहीं किए।
किन देशों में रद्द हुई थीं परीक्षाएं?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण सीबीएसई ने सात देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी थीं।
- देश
- बहरीन
- ईरान
- कुवैत
- ओमान
- कतर
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
इन देशों में परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के मूल्यांकन को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जो अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।