Supreme Court: 9वीं में तीन भाषाएं अनिवार्य करने पर केंद्र, CBSE और NCERT से जवाब तलब; SC ने भेजा नोटिस
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं, जिनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य करने की सीबीएसई नीति को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी से 10 दिन में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य करने वाली सीबीएसई की नई नीति पर केंद्र सरकार, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस मामले में दाखिल दो नई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। अदालत ने सभी पक्षों से 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हम इस मामले पर 29 जुलाई को सुनवाई करेंगे।'
किन लोगों ने दायर की हैं याचिकाएं?
नई याचिकाएं अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई हैं। याचिकाओं में केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को पक्षकार बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत के सामने कई व्यावहारिक और कानूनी समस्याओं का मुद्दा उठाया।
क्या हैं याचिकाकर्ताओं की दलीलें?
वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि यह व्यवस्था शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के खिलाफ है और छात्रों पर बिना विकल्प दिए भाषाएं थोपी जा रही हैं।
उन्होंने अदालत से कहा, "अगर पंजाबी पढ़ाई जाएगी और संस्कृत नहीं पढ़ाई जाएगी, तो फिर शिक्षक कहां से आएंगे?"
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि राज्यों ने एक जुलाई तक सभी किताबें उपलब्ध कराने की बात कही थी, लेकिन अभी तक 22 भाषाओं में से केवल तीन भाषाओं की किताबें ही उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों और संसाधनों की भारी कमी की समस्या पैदा होगी।
शंकरनारायणन ने यह भी कहा कि अब अंग्रेजी को गैर-भारतीय भाषा के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे नई व्यवस्था को लागू करने में और जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
'अचानक नई भाषा सीखने का दबाव'
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि यदि कोई छात्र पहले से अंग्रेजी और फ्रेंच पढ़ रहा है और उसे अचानक कक्षा 9 में तमिल जैसी नई भाषा पढ़ने को कहा जाए, तो इसके लिए शिक्षक, बुनियादी ढांचा और अन्य सुविधाएं कहां से आएंगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था को अचानक लागू करना छात्रों और स्कूलों दोनों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी मांगी थी रिपोर्ट
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सीबीएसई की तैयारियों पर रिपोर्ट देने को कहा था। अदालत जानना चाहती थी कि इस नीति को लागू करने के लिए बोर्ड के पास पर्याप्त संसाधन और व्यवस्था है या नहीं।
क्या है सीबीएसई की नई भाषा नीति?
सीबीएसई ने 15 मई को जारी एक सर्कुलर में कहा था कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य होगी। इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं होना जरूरी होगा।
यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप लिया गया है।
विदेशी भाषा पढ़ने वाले छात्रों के लिए क्या नियम होंगे?
सीबीएसई के अनुसार, यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह इसे केवल तीसरी भाषा के रूप में दो भारतीय भाषाएं पढ़ने के बाद चुन सकता है या फिर चौथी अतिरिक्त भाषा के तौर पर इसे पढ़ सकता है।
किताबें उपलब्ध नहीं होने पर क्या व्यवस्था होगी?
बोर्ड ने कहा है कि जब तक कक्षा 9 के लिए तीसरी भाषा (R3) की अलग किताबें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक छात्र 2026-27 संस्करण की कक्षा 6 की R3 किताबों का उपयोग करेंगे।बोर्ड परीक्षा को लेकर क्या फैसला है?
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि छात्रों पर अतिरिक्त दबाव से बचाने और पढ़ाई पर ध्यान बनाए रखने के लिए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) की परीक्षा नहीं ली जाएगी।
स्थानीय साहित्य को भी मिलेगा स्थान
सीबीएसई ने कहा है कि माध्यमिक स्तर पर छात्रों की भाषा क्षमता को बेहतर बनाने के लिए स्कूल स्थानीय या राज्य स्तरीय साहित्यिक सामग्री जैसे लघु कहानियां, कविताएं और गैर-कथा साहित्य को भी पढ़ाई में शामिल कर सकेंगे।
बोर्ड के अनुसार, इस अतिरिक्त साहित्य के चयन और उसके शैक्षणिक उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।