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‘मुझे पैनिक अटैक आते थे’, अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमान ने साझा किया डिप्रेशन का दर्द; सपना हो गया चकनाचूर

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: आराध्य त्रिपाठी Updated Wed, 11 Feb 2026 04:15 PM IST
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सार

Aaryamann Sethi On Depression: अर्चना पूरन सिंह के बेटे आर्यमान सेठी ने अपने डिप्रेशन में जाने के सफर के बारे में बात की। जानिए क्या थी डिप्रेशन में जाने की वजह और कौनसा सपना नहीं हो सका पूरा…

Archana Puran Singh Son Aaryamann Opens Up On His Depression Says I Was Going Backwards
आर्यमान सेठी और अर्चना पूरन सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अर्चना पूरन सिंह अपने वीडियो व्लॉग में अक्सर अपने और अपने परिवार के बारे में बात करती रहती हैं। अब उनके हालिया व्लॉग में बेटे आर्यमन सेठी ने अपने जीवन के एक प्रमुख घटनाक्रम के बारे में बात की है। इसमें उन्होंने उस वक्त के बारे में बात की जब वो डिप्रेशन का शिकार हो गए थे और उनका फुटबॉलर बनने का सपना टूट गया था।

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पल में टूटा फुटबॉलर बनने का सपना
वीडियो व्लॉग में अपने साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए आर्यमन ने उस वक्त का जिक्र किया जब वो इंग्लैंड की क्वींस पार्क रेंजर्स टीम के लिए खेल फुटबॉल रहे थे। वो इंग्लिश प्रीमियर लीग में खेलने का सपना देख रहे थे, तभी अचानक उन्हें एक बड़ा झटका लगा। इस निर्णायक मोड़ के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि सबसे मुश्किल बात घर छोड़ना था। मैंने घर छोड़कर इंग्लैंड में फुटबॉल खेलने का फैसला किया था और आप लोगों ने इसे मुमकिन बनाया। मैं 14 साल की उम्र में घर से निकला था। मैं वहां तीन हफ्ते रहा और जैसे ही मैं वहां बसने लगा, मेरा पैर टूट गया। उसके बाद मेरे लिए बहुत मुश्किल हो गई। फिर मैं भारत वापस आया और अस्पताल में भर्ती हुआ। मुझे बैसाखियां दी गईं और मेरी सर्जरी हुई।

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Archana Puran Singh Son Aaryamann Opens Up On His Depression Says I Was Going Backwards
आर्यमान सेठी परिवार के साथ - फोटो : सोशल मीडिया

मुझे एंग्जायटी अटैक आते थे
आर्यमान ने आगे बताया कि चोट के बावजूद मैं अगले साल फिर वहां गया और तब मैं दसवीं कक्षा में था। इसलिए मुझे पढ़ाई भी खूब करनी पड़ी। मैं ठीक से खेल नहीं पा रहा था, क्योंकि मैं अभी भी सर्जरी से उबर रहा था। अपने आस-पास के सभी लोगों को उस उम्र में तेजी से और मजबूत होते देखकर, जब ऐसा होना चाहिए, मैं पीछे जा रहा था। मैं उनसे तालमेल नहीं बिठा पा रहा था। वह सपना टूट जाने के बाद मैं डिप्रेशन में चला गया। मुझे पैनिक अटैक आते थे, एंग्जायटी अटैक आते थे, मेरे हाथ कांपते थे, मुझे इतने गंभीर डिप्रेशन के दौरे पड़ते थे कि मैं अपने कमरे से बाहर तक नहीं निकलता था और सारा दिन वहीं पड़ा रहता था। लंदन मेरे लिए बहुत कठिन था।

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परिवार ने दिया मेरा साथ
हालांकि, ऐसे मुश्किल वक्त में भी आर्यमान का परिवार उनके साथ खड़ा रहा। उन्होंने बताया कि डिप्रेशन में दिलासा देने से मदद नहीं मिलती, केवल उस व्यक्ति के साथ समय बिताने से ही मदद मिलती है। आप सभी ने मेरे साथ समय बिताया है। मां ने सबसे अधिक सहयोग दिया है। मुझे अपने माता-पिता दोनों से ही असफल होने का डर मिला था। हर साल जब मेरा जीवन स्थिर नहीं होता था, तो मेरी हालत और खराब होती जाती थी।
एक समय ऐसा आया जब मैं इतना हताश हो गया कि सोचने लगा कि कुछ भी चलेगा, कुछ भी काम कर लूंगा। तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं संगीत ही करना चाहता हूं और अगर मैं इसे करता रहूं तो खुश रहूंगा। अब मुझे डिप्रेशन नहीं है, जो बहुत अच्छी बात है। अब पैनिक अटैक भी नहीं आते। अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी ने 1992 में शादी की थी। अब कपल दो बेटों आर्यमन सेठी और आयुष्मान सेठी के माता-पिता हैं।

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