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National Awards 2026: 'श्रीकांत' और 'आर्टिकल 370' को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, जानें क्या है फिल्मों की कहानी?
Sat, 18 Jul 2026 07:07 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Sat, 18 Jul 2026 07:07 PM IST
सार
National Film Awards: 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के फीचर फिल्म श्रेणी में 'श्रीकांत' और 'आर्टिकल 370' को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला है। आइए जानते हैं दोनों फिल्मों की कहानी क्या है।
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श्रीकांत, आर्टिकल 370
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फिल्म 'श्रीकांत' और 'आर्टिकल 370' अचानक चर्चा में आ गई हैं। दोनों फिल्मों ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है। 'श्रीकांत' को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म और 'आर्टिकल 370' को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म श्रेणी में पुरस्कार दिया गया है। दोनों ही फिल्मों की कहानी शानदार हैं। इसलिए दोनों को पुरस्कार दिया गया है।
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श्रीकांत
- फोटो : एक्स
क्या है 'श्रीकांत' की कहानी?
फिल्म 'श्रीकांत' के निर्देशक तुषार हीरानंदानी हैं। इसमें राजकुमार राव के अलावा ज्योतिका, अलाया एफ, शरद केलकर, और जमील खान ने अभिनय किया है। इस फिल्म की कहानी एक शख्स पर आधारित है जो आंखों से देख नहीं सकता है।
फिल्म में दिखाया गया है कि आंध्र प्रदेश के एक गरीब परिवार में एक बच्चे का जन्म होता है। पिता उसे एक क्रिकेटर बनाना चाहता है। मगर पिता को पता चलता है कि उसका बेटा आंखों से देख नहीं सकता है। वह अपने बच्चे को मारना चाहते है, पर ऐसा नहीं कर पाता। श्रीकांत अपने स्कूल में टॉप करता है। अच्छे नंबर लाने के बावजूद उसे आईआईटी में एडमिशन नहीं मिलता है। मगर अमेरिका का एमआईटी उसका स्वागत करता है।
श्रीकांत की अध्यापिका उसका साथ देती है। अमेरिका से हैदराबाद आकर श्रीकांत अपने देश के दिव्यांगों के लिए रोजगार देने वाली कंपनी की शुरुआत करता है। बिजनेस पार्टनर बनकर रवि (शरद केलकर) श्रीकांत का साथ देता है। स्वाति (अलाया एफ) उसे प्यार करती है।
फिल्म 'श्रीकांत' के निर्देशक तुषार हीरानंदानी हैं। इसमें राजकुमार राव के अलावा ज्योतिका, अलाया एफ, शरद केलकर, और जमील खान ने अभिनय किया है। इस फिल्म की कहानी एक शख्स पर आधारित है जो आंखों से देख नहीं सकता है।
फिल्म में दिखाया गया है कि आंध्र प्रदेश के एक गरीब परिवार में एक बच्चे का जन्म होता है। पिता उसे एक क्रिकेटर बनाना चाहता है। मगर पिता को पता चलता है कि उसका बेटा आंखों से देख नहीं सकता है। वह अपने बच्चे को मारना चाहते है, पर ऐसा नहीं कर पाता। श्रीकांत अपने स्कूल में टॉप करता है। अच्छे नंबर लाने के बावजूद उसे आईआईटी में एडमिशन नहीं मिलता है। मगर अमेरिका का एमआईटी उसका स्वागत करता है।
श्रीकांत की अध्यापिका उसका साथ देती है। अमेरिका से हैदराबाद आकर श्रीकांत अपने देश के दिव्यांगों के लिए रोजगार देने वाली कंपनी की शुरुआत करता है। बिजनेस पार्टनर बनकर रवि (शरद केलकर) श्रीकांत का साथ देता है। स्वाति (अलाया एफ) उसे प्यार करती है।
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आर्टिकल 370
- फोटो : इंस्टाग्राम
'आर्टिकल 370' की स्टारकास्ट
आदित्य सुहास जंभाले के निर्देशन में बनी फिल्म में यामी गौतम धर और प्रियामणि अहम किरदारों में हैं। इस फिल्म की कहानी 2019 में जम्मू और कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने की ऐतिहासिक और राजनीतिक घटना पर आधारित है।
फिल्म की कहानी एक खुफिया अधिकारी जूनी हक्सर से शुरू होती है। जूनी हक्सर को आतंकवादी संगठन के युवा कमांडर बुरहान वानी के ठिकाने के बारे में पता चलता है और वह उसे मुठभेड़ में मार देती है। इस घटना से कश्मीर में पत्थरबाजी शुरू हो जाती है और इस घटना का जिम्मेदार जूनी हक्सर को मानकर दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया जाता है। जैसे ही सरकार अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की दिशा में आगे बढ़ती है। पीएमओ सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन अपनी एक टीम का गठन करती है और कश्मीर में एनआईए ऑपरेशन का नेतृत्व करने के लिए जूनी हक्सर को नियुक्त करती है।
जूनी हक्सर घाटी में शांति और एकता बनाए रखने की यात्रा में भ्रष्ट स्थानीय नेताओं और उग्रवादियों द्वारा उत्पन्न बाधाओं से होकर गुजरती है।
इस फिल्म की कहानी को छह अध्यायों में बांटा गया है, जिनमें से पहला अध्याय एक आतंकवादी संगठन के युवा कमांडर बुरहान वानी की कहानी से शुरू होता है। 2016 में उसकी मौत के बाद घाटी में कई विरोध प्रदर्शन हुए, पत्थर बाजी हुई, जिसके बाद पीएमओ सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन हरकत में आ गई । कहानी फिर उस समय तक पहुंचती है जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाता है। इसके बाद भी स्थिति ज्यादा नहीं बदलती और 2019 में पुलवामा आतंकी हमला हुआ, जिसके बाद केंद्र सरकार हरकत में आई और जम्मू कश्मीर के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने का फैसला लिया।
आदित्य सुहास जंभाले के निर्देशन में बनी फिल्म में यामी गौतम धर और प्रियामणि अहम किरदारों में हैं। इस फिल्म की कहानी 2019 में जम्मू और कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने की ऐतिहासिक और राजनीतिक घटना पर आधारित है।
फिल्म की कहानी एक खुफिया अधिकारी जूनी हक्सर से शुरू होती है। जूनी हक्सर को आतंकवादी संगठन के युवा कमांडर बुरहान वानी के ठिकाने के बारे में पता चलता है और वह उसे मुठभेड़ में मार देती है। इस घटना से कश्मीर में पत्थरबाजी शुरू हो जाती है और इस घटना का जिम्मेदार जूनी हक्सर को मानकर दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया जाता है। जैसे ही सरकार अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की दिशा में आगे बढ़ती है। पीएमओ सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन अपनी एक टीम का गठन करती है और कश्मीर में एनआईए ऑपरेशन का नेतृत्व करने के लिए जूनी हक्सर को नियुक्त करती है।
जूनी हक्सर घाटी में शांति और एकता बनाए रखने की यात्रा में भ्रष्ट स्थानीय नेताओं और उग्रवादियों द्वारा उत्पन्न बाधाओं से होकर गुजरती है।
इस फिल्म की कहानी को छह अध्यायों में बांटा गया है, जिनमें से पहला अध्याय एक आतंकवादी संगठन के युवा कमांडर बुरहान वानी की कहानी से शुरू होता है। 2016 में उसकी मौत के बाद घाटी में कई विरोध प्रदर्शन हुए, पत्थर बाजी हुई, जिसके बाद पीएमओ सचिव राजेश्वरी स्वामीनाथन हरकत में आ गई । कहानी फिर उस समय तक पहुंचती है जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लग जाता है। इसके बाद भी स्थिति ज्यादा नहीं बदलती और 2019 में पुलवामा आतंकी हमला हुआ, जिसके बाद केंद्र सरकार हरकत में आई और जम्मू कश्मीर के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने का फैसला लिया।