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अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा को हिंदी सिनेमा से किस बात की नाराजगी? बोले- हर कोई एक तरह से एक्टिंग करता है और...

Sun, 09 Aug 2026 04:51 PM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: पूनम कंडारी Updated Sun, 09 Aug 2026 04:51 PM IST
सार

Akhilendra Mishra Talk About Hindi Cinema: अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा को इस वक्त हिंदी सिनेमा से कई शिकायतें हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की। जानिए, हिंदी सिनेमा की मौजूदा स्थिति पर क्या कहते हैं अखिलेंद्र मिश्रा? 

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Akhilendra Mishra Says Characters lost Distinct Identity in Hindi cinema
अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा - फोटो : इंस्टाग्राम@akhilendram

विस्तार

अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा का कहना है कि हिंदी सिनेमा और टेलीविजन में यादगार किरदारों की जो लोकप्रियता लंबे समय तक बनी रहती थी, वह अब कम हो गई है। उनका मानना है कि आजकल की फिल्मों में अलग तरह के किरदार सामने नहीं आ रहे हैं। अपनी बात को उन्होंने विस्तार से एक हालिया इंटरव्यू में साझा किया। 

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क्यों जरूरी हैं अलग तरह के किरदार? 
हाल ही में पीटीआई से बातचीत करते हुए अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा कहते हैं, ‘स्क्रीन टाइम के बजाय मजबूत किरदार ही वे चीजें थीं जिनकी वजह से सपोर्टिंग रोल लोगों की यादों में बसे रहते थे। पहले लोग किरदारों से जुड़ते थे। आज फिल्मों में किरदारों को ठीक से गढ़ा नहीं जाता। हर कोई एक ही तरह से एक्टिंग करता है और एक ही लहजे में बात करता है। इस वजह से किरदारों का रंग और पहचान गायब हो गई है। जब दर्शक किसी किरदार से जुड़ नहीं पाते, तो आखिरकार फिल्मों को ही नुकसान होता है।’ 

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वह आगे कहते हैं, ‘जब आप इंद्रधनुष देखते हैं तो दूसरों को भी उसे देखने के लिए बुलाते हैं क्योंकि उसमें सातों रंग दिखाई देते हैं। इसी तरह, कहानी, एक्टिंग, संगीत, भावनाओं और प्रस्तुति में अलग-अलग रंगों की जरूरत होती है। आज हमें सिर्फ सफेद रोशनी दिखाई दे रही है, इंद्रधनुष गायब है।’ 

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Akhilendra Mishra Says Characters lost Distinct Identity in Hindi cinema
अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा - फोटो : इंस्टाग्राम@akhilendram

दर्शकों को पुरानी फिल्मों के किरदार क्यों याद रहते थे? 
यह पूछे जाने पर कि पुरानी फिल्मों के किरदार आज भी क्यों याद किए जाते हैं जबकि आजकल के कई किरदार जल्दी ही भुला दिए जाते हैं, ताे इस पर अखिलेंद्र मिश्रा कहते हैं, ‘गब्बर सिंह, मोगैम्बो या सखाराम जैसे किरदार कहां हैं? आज क्रूर सिंह, मिर्ची सेठ जैसे किरदार कहाँ लिखे जा रहे हैं? पुलिस पर फिल्में तो अब भी बन रही हैं, लेकिन आपको ऐसे यादगार किरदार नहीं मिलते। दरअसल, निर्माता पहले अच्छी तरह से गढ़े गए किरदारों के लिए थिएटर एक्टर्स को चुनते थे, जैसे अमजद खान और अमरीश पुरी।'
वह आगे कहते हैं, 'कहने का मतलब है कि मेकर्स ने ऐसे एक्टर्स को ढूंढा जो उन किरदारों में ढल सकें। मुझे थिएटर में मेरे काम की वजह से 'क्रूर सिंह' के रोल के लिए चुना गया था। जॉन मैथ्यू मथन ने मेरा एक नाटक देखने के बाद मुझे 'सरफरोश' के लिए चुना था।’

क्या इंडस्ट्री में कुछ नहीं बदला है? 
हालांकि अभिनेता ने माना कि इंडस्ट्री का काम करने का तरीका अब ज्यादा व्यवस्थित हो गया है। वह कहते हैं, ‘फिल्म इंडस्ट्री पूरी तरह बदल गई है। नए लोग आए हैं और काम करने का तरीका ज्यादा मॉडर्न और कॉर्पोरेट हो गया है। एक अच्छी बात यह है कि काम सिस्टमैटिक हो गया है और प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होते हैं, चाहे वो फिल्में हों या वेब सीरीज। पहले ऐसा नहीं था।’ 
बता दें कि अखिलेंद्र मिश्रा सीरियल 'चंद्रकांता' में क्रूर सिंह, 'सरफरोश' फिल्म में मिर्ची सेठ और 'गंगाजल' में डीएसपी भुरेलाल जैसे किरदारों के लिए जाने जाते हैं। 

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