‘रोने से क्या मिलेगा?’, ‘सतलुज’ फिल्म विवाद पर अन्नू कपूर का बड़ा बयान; मेकर्स पर जमकर बरसे एक्टर; कही ये बात
Annu Kapoor on Satluj Movie: दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चल रही बहस के बीच अब एक्टर अन्नू कपूर ने भी अपनी राय रखी है। इस मामले में उनका नजरिया इंडस्ट्री के कई लोगों से अलग है। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा।
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पिछले कुछ हफ्तों से ‘सतलुज’ काफी विवादों में रही है। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ था। यह फिल्म चार साल तक सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के साथ अटकी रही, जिसके बाद आखिरकार 3 जुलाई को ZEE5 पर रिलीज हुई।
लेकिन यह रिलीज ज्यादा दिन नहीं चल पाई और दो दिन के अंदर ही भारत सरकार के निर्देश के बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फैसले के बाद इंडस्ट्री में सेंसरशिप और क्रिएटिव फ्रीडम को लेकर बहस तेज हो गई।
रोने-धोने से क्या फायदा
हाल ही में ‘कड़क’ को दिए एक इंटरव्यू में अन्नू कपूर ने कहा कि अगर सेंसर बोर्ड को फिल्म पर आपत्ति है, तो मेकर्स को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा है तो सीधे सुप्रीम कोर्ट जाइए। अगर सेंसर बोर्ड ने फिल्म को मंजूरी नहीं दी है, तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाइए। इसके लिए एक सही प्रक्रिया होती है। रोने-धोने से क्या फायदा?’
आप जनता से सहानुभूति मांग रहे हैं
उन्होंने आगे दिलजीत को लेकर कहा, ‘आपने फिल्म में काम किया है और नियम साफ कहते हैं कि अगर सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट नहीं देता, तो आपको सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। सबको पता है कि यह एक विवादित विषय है, और अब आप जनता से सहानुभूति मांग रहे हैं। खुद पर तरस खाने से क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट जाइए, रोने से क्या मिलेगा?’
मेरे लिए समाज में शांति ज्यादा जरूरी
अन्नू कपूर ने यह भी कहा कि जब CBFC राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के आधार पर फिल्म को सर्टिफिकेट नहीं देता, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘क्या फिल्म रिलीज होना ज्यादा जरूरी है या देश में शांति बनाए रखना? क्या उससे ज्यादा जरूरी है कि सड़कों पर आगजनी हो, घर जलें और लोग परेशान हों? मेरे लिए समाज में शांति सबसे ज्यादा जरूरी है।’
‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित तौर पर हुए फर्जी अंतिम संस्कारों की जांच की थी। फिल्म में उनके संघर्ष और 1995 में उनके लापता होने तक की कहानी को दिखाया गया है।
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