अभिषेक हार रहे लड़ाई, तलाश रहे नया ठिकाना
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क्या अभिषेक बच्चन दर्शकों से कह सकते हैं कि उनकी पिक्चर अभी बाकी है? सोलो हीरो के रूप में उनकी पहचान क्रमशः फीकी पड़ गई है और बहु-सितारा फिल्मों में वह पिछड़ रहे हैं। सोलह साल में करिअर पर जवानी आती है, लेकिन अभिषेक के पास एक भी फिल्म नहीं है! किस दिशा में जा रहे हैं अभिषेक?
साल 2009 में आई दिल्ली-6 वह आखिरी फिल्म थी जिसमें अभिषेक बच्चन हीरो की तरह नजर आए। इसके बाद वह सोलो फिल्मों में भी नायक की तरह नहीं दिखे और क्रमशः कैमियो अपीयरेंस और मल्टीस्टारर फिल्मों में सिमटते गए। स्थिति यह है कि आज सिनेमाघरों में लग रही एक मल्टीस्टारर में अभिषेक हैं और जिस क्रम में नायकों को पर्दे पर दिखाया गया है, उसमें उनका नंबर तीसरा और आखिरी है।
अक्षय कुमार और रितेश देशमुख उनसे आगे हैं। महानायक अमिताभ बच्चन का बेटा होने का अभिषेक को करिअर में लाभ हुआ या नुकसान यह अलग विमर्श का विषय है। परंतु फिलहाल अभिषेक अपने करियर की लड़ाई हारते दिख रहे हैं। तथ्य यह है कि इस सप्ताहांत के बाद में उनके पास कोई फिल्म नहीं है, जिससे वह दर्शकों को भरोसा दिला सकें कि थोड़ा ठहरें। पिक्चर अभी बाकी है!
अभिषेक के 16 बरस के करिअर में यह पहला मौका है जब उनके पास कोई फिल्म नहीं है और निर्माता के रूप में भी वह विशेष सक्रिय नहीं हैं। निश्चित रूप से अभिषेक को बहुत मौके मिले और उन्होंने युवा (2004) अंतरमहल (2005), ब्लफमास्टर (2005), गुरु (2007) और दोस्ताना (2008) जैसी फिल्मों में खुद को साबित भी किया।
परंतु मुश्किल यह रही कि शाहरुख-सलमान-आमिर की तिकड़ी के दौर में वह अपनी कोई भरोसेमंद इमेज नहीं बना सके। पिता के साथ फिल्में करते हुए उन्हें सहारा मिला लेकिन उनके निर्माताओं-निर्देशकों की सूची उठा कर देखें तो पता चलता है कि उन्होंने एक सुरक्षित दायरे से बाहर जाने का जोखिम नहीं लिया। जबकि बीते एक दशक में कई प्रतिभाशाली युवाओं निर्देशकों ने अच्छी फिल्में बनाईं।
पिता की तरह होशियार नहीं निकले अभिषेक
धूम सीरीज की फिल्मों ने अभिषेक के करिअर का अंतराल तो लंबा किया, मगर उसे ताकत नहीं दी। शाहरुख खान जैसे सितारे की फिल्म में उनके पीछे खड़े होकर भी अभिषेक कमजोर ही पड़े। वास्तव में जब अपने से बड़े सितारों की छाया में खड़े होते हैं तो दर्शकों के दिल में छाप नहीं छोड़ सकते। उसके लिए आपको इरफान और नवाजुद्दीन जैसा ऐक्टर होना पड़ता है।
सोलो हीरो के रूप में भी अभिषेक ने फिल्मों के चुनाव में पिता की तरह समझदारी नहीं दिखाई। यह आश्चर्य का विषय है कि जब घर में अद्वितीय प्रकाश स्तंभ हैं तो अभिषेक कैसे राह भटक गए? सच यह है कि कोई भी बढ़िया ऐक्टर एक रोल के साथ अपना अतीत बदल सकता है, परंतु इसके लिए इच्छाशक्ति और ऊर्जा चाहिए। फिलहाल अभिषेक में वह नजर नहीं आती।
चाहे टीवी पर फिल्म के प्रमोशन देखें या फिल्म ही। अभिषेक के बड़े पिता के बेटे होने को लेकर मजाक मिल जाएंगे। यह मजाक अभिषेक की छवि को कमजोर बनाते हैं। नई रिलीज के प्रमोशन के दौरान अभिषेक में ऊर्जा नहीं दिखी। कार्यक्रमों में अक्षय वाहवाही लूटते रहे। रितेश भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे। मगर अभिषेक को क्या हुआ?
अभिषेक कॉमेडी में सहज ही नहीं हो पा रहे
अभिषेक को देख कर लगता रहा कि वह किसी मानसिक दबाव में हैं। वह गंभीर इंसान हैं और कॉमेडी फिल्म के कॉमिक प्रमोशन के साथ ट्यूनिंग नहीं बैठा पा रहे हैं। यह भी खबर आई कि एक एंटरटेनमेंट चैनल के प्रमोशन कार्यक्रम को अभिषेक बीच में छोड़ कर निकल गए। जबकि पूरी स्टारकास्ट और निर्देशक मौजूद थे। टेबल टेनिस खेलते हुए सितारों का हंसी-मजाक भरा इंटरव्यू होना था। अभिषेक को आइडिया जमा नहीं।
उनका कहना था कि अपने काम को लेकर वह ‘सीरियस’ हैं। एंकर दूसरे ऐक्टरों से बात करता रहा। कुछ देर यह देखने के बाद अभिषेक चल दिए! किसी के रोके से नहीं रुके। क्या यह संकेत है कि जूनियर बच्चन ने मैदान छोड़ दिया है? वह फिल्मों में अभिनय से बेहतर कुछ और काम करना चाहते हैं। जैसे फुटबॉल और कबड्डी को देश में बढ़ावा देना!
क्या करन बचा पाएंगे अभिषेक का करिअर
अभिषेक बच्चन फिर वही कर रहे हैं। सुरक्षित खेमे की तलाश। खबर है कि अभिषेक निर्माता-निर्देशक करन जौहर से अपना करिअर बचाने की उम्मीद कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों अभिषेक ने करन से उनके घर पर मुलाकात कर अपने करिअर पर चर्चा की। वह चाहते हैं कि करन उन्हें लेकर फिल्म बनाएं।
अभिषेक शुक्रवार को अपनी फिल्म रिलीज होने के बाद नए सिरे से करिअर को आकार देना चाहते हैं। उन्होंने करन को यह भी बताया कि वह कैसी फिल्में करना चाहते हैं। करन के प्रोडक्शन की दोस्ताना अभिषेक की सफल फिल्मों में है और करन द्वारा निर्देशित कभी अलविदा ना कहना में अभिषेक का काम सराहा गया था। अभिषेक करन के संग ऐक्टर के साथ सह-निर्माता के रूप में भी कुछ फिल्मों की योजनाएं बनाना चाहते हैं।