‘बिना टैलेंट के भी स्टारकिड्स को मिलते हैं मौके’, नेपोटिज्म पर बोलीं कृति सेनन; रणबीर-आलिया पर कही ये बात
Kriti Sanon: कृति सेनन एक आउटसाइडर होने के बावजूद इंडस्ट्री में खुद को साबित किया है। अब हाल ही में एक्ट्रेस ने नेपोटिज्म को लेकर बात की। जानिए रणबीर-आलिया को लेकर उन्होंने क्या कुछ कहा…
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कृति सेनन इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘कॉकटेल 2’ को लेकर चर्चाओं में हैं। फिल्म को दर्शकों द्वारा पसंद किया जा रहा है और कृति के किरदार व एक्टिंग की भी काफी तारीफ हो रही है। मौजूदा वक्त में कृति इंडस्ट्री की टॉप लीडिंग एक्ट्रेस में से एक हैं। लेकिन एक आउटसाइडर होने के नाते कृति के लिए यहां तक का सफर आसान नहीं रहा।
हाल ही में हुई एक बातचीत में एक्ट्रेस ने बताया कि कैसे वे धीरे-धीरे कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ीं और यह रातों-रात मिली सफलता की कहानी नहीं है। उन्होंने उन पलों को याद किया जब वे अपने पहले फोटोशूट और पहले रैंप शो के बाद रोई थीं, और बताया कि कैसे मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
आसान नहीं था यह सफर
हिंदुस्तान टाइम्स सिटी के साथ बातचती में कृति ने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि यह सफर आसान नहीं था। ऐसे पल भी आए जब मुझे खुद पर शक हुआ और मनचाहे मौके न मिलने पर निराशा हुई। यह सफर सीधे कामयाबी तक पहुंचने वाला नहीं था; यह धीरे-धीरे आगे बढ़ा। मैंने उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन मुझमें हार न मानने और दोबारा कोशिश करने का जज्बा भी रहा है।
मेरा पहला फोटोशूट बहुत बुरा रहा था। मेरा पहला रैंप शो भी अच्छा नहीं हुआ था। दोनों बार मैं रोते हुए घर लौटी थी। लेकिन इसके बावजूद मैंने दूसरे शो, दूसरे फोटोशूट और दूसरे ऑडिशन के लिए कोशिश की और इसी वजह से मैं आज यहां तक पहुंच पाई हूं। सीखने की चाहत और हार न मानने का जज्बा ही मुझे यहां तक ले आया है।
टैलेंटेड हैं रणबीर कपूर और आलिया भट्ट
इस दौरान कृति ने नेपोटिज्म के बारे में भी बात की। उनका मानना है कि भले ही स्टार किड्स को भी रणबीर कपूर और आलिया भट्ट जैसे एक्टर्स की तरह खुद को साबित करना पड़ता है, लेकिन वे इस बात से सहमत हैं कि उन्हें अक्सर बाहरी लोगों की तुलना में बहुत आसानी से मौके मिल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार आपको पता चलता है कि किसी फिल्म के लिए आप पर विचार किया जा रहा है, लेकिन वह रोल किसी और को मिल जाता है। साथ ही सवाल सिर्फ नेपोटिज्म का नहीं है। फिल्मी बैकग्राउंड से आने वाले कई एक्टर्स सच में टैलेंटेड होते हैं। चाहे रणबीर कपूर हों या आलिया भट्ट, उन्होंने खुद को साबित किया है।
हो सकता है कि उन्हें दूसरों के मुकाबले आसानी से मौके मिले हों, लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत की है और वे बहुत टैलेंटेड हैं। असल बात तब होती है, जब कोई बिना एक्टर के तौर पर खुद को साबित किए आठ या नौ साल तक मौके पाता रहता है।
मुझे बस यही बात गलत लगती है। जब आप फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं आते हैं, तो अगर आप शुरुआती कुछ साल में खुद को साबित नहीं कर पाते, तो आप बाहर हो जाते हैं। आपको नजरअंदाज कर दिया जाता है।
अपने 12 साल के करियर में कृति ने बार-बार अपनी काबिलियत साबित की है। उन्होंने 'मिमी' में अपनी परफॉर्मेंस के लिए नेशनल अवॉर्ड जीता है और 'बरेली की बर्फी', 'दिलवाले', 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया', 'क्रू' जैसी सफल फिल्मों में काम किया है। फिलहाल, उन्हें होमी अदजानिया की 'कॉकटेल 2' में अपनी परफॉर्मेंस के लिए तारीफें मिल रही हैं।