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Prakash Raj: फवाद खान-वाणी कपूर की 'अबीर गुलाल' के बचाव में उतरे प्रकाश राज, बोले- कुछ लोग डर पैदा कर रहे हैं

Sun, 04 May 2025 06:46 PM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: साक्षी Updated Sun, 04 May 2025 06:46 PM IST
सार

Prakash Raj On Abir Gulal: प्रकाश राज ने फिल्मों पर बैन को अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खतरनाक बताया और कहा कि 'पद्मावत', 'पठान', 'एल2: एम्पुरान' जैसी फिल्मों पर विवाद सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, जिससे डर का माहौल बनाया जा रहा है।

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Prakash Raj defends Fawad Khan vaani kapoor Abir Gulaal ban says Govt Creating Fear after pahalgam attack
प्रकाश राज - फोटो : एक्स

विस्तार

मशहूर अभिनेता प्रकाश राज ने फिल्मों पर बैन लगाने की बात पर कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में उन्होंने कहा कि चाहे फिल्म किसी भी विचारधारा की हो, उसे बैन करना गलत है और यह अभिव्यक्ति की आजादी के लिए बड़ा खतरा है। प्रकाश राज ने साफ कहा, 'आजकल लोगों की भावनाएं जरा-सी बात पर आहत हो रही हैं और यह माहौल खतरनाक है।'

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कौन-कौन सी फिल्में आईं निशाने पर?
प्रकाश ने कई फिल्मों का उदाहरण दिया, जिन्हें विवादों का सामना करना पड़ा। उन्होंने 'पद्मावत', 'पठान', 'एल2: एम्पुरान' और फवाद खान की फिल्म 'अबीर गुलाल' का जिक्र किया। इन फिल्मों को न सिर्फ सेंसर बोर्ड की सख्ती झेलनी पड़ी, बल्कि राजनीतिक दबाव और लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा। प्रकाश ने 'अबीर गुलाल' के विवाद पर कहा, 'मैं किसी भी फिल्म को बैन करने के खिलाफ हूं, चाहे वह प्रोपेगेंडा ही क्यों न हो। जब तक फिल्म बच्चों के शोषण या अश्लीलता को बढ़ावा नहीं दे रही, उसे क्यों रोकना? जनता को खुद फैसला करने दो।'

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पद्मावत और पठान के विवाद का जिक्र
प्रकाश ने 'पद्मावत' और 'पठान' के समय हुए हंगामे के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि कैसे दीपिका पादुकोण को 'पद्मावत' में उनके कॉस्ट्यूम और 'पठान' में एक गाने के रंग को लेकर धमकियां मिलीं। "लोग कह रहे थे कि हम उनकी नाक काट देंगे। यह क्या तमाशा है, सिर्फ एक कपड़े या रंग के लिए?'
प्रकाश का मानना है कि यह सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग डर का माहौल बनाना चाहते हैं। फिल्में बन ही नहीं रही हैं। सेंसरशिप अब सिर्फ राज्य स्तर पर नहीं, बल्कि केंद्र से नियंत्रित हो रही है।' वे चेतावनी देते हैं कि इस तरह धीरे-धीरे अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो रही है। नई पीढ़ी को डराया जा रहा है कि वे कुछ बोलने या बनाने से पहले ही खुद को सेंसर करें।  

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'L2: एम्पुरान' और 'कश्मीर फाइल्स' का उदाहरण
प्रकाश ने हालिया फिल्म 'एल2: एम्पुरान' का उदाहरण दिया, जिसे सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बावजूद 2002 के गोधरा दंगों के चित्रण को लेकर विवाद झेलना पड़ा। फिल्म के लीड एक्टर मोहनलाल को माफी मांगनी पड़ी और कुछ सीन काटे गए। दूसरी ओर उन्होंने 'कश्मीर फाइल्स' का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ फिल्में बिना किसी रुकावट के रिलीज हो जाती हैं, लेकिन बाकियों को इतना आसान मौका नहीं मिलता।  प्रकाश ने साफ कहा कि यह समस्या किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, लेकिन जब केंद्र सरकार इसको बढ़ावा देती है तो यह और खतरनाक हो जाता है।

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