Exclusive: क्यों रोते हुए गैंगस्टर ने किया गीतकार समीर अंजान को फोन? एआई और जेन जी को लेकर कही बड़ी बात
Sameer Anjaan Exclusive Interview: बॉलीवुड के मशहूर गीतकार समीर अंजान ने अब तक 500 से अधिक गीते लिखे हैं। उनके लिखे गीत श्रोताओं के दिल में उतर जाते हैं। आज के दौर में भी उनके गीत गुनगुनाए जाते हैं। हाल ही में समीर अंजान ने अपने करियर और जिंदगी से जुड़ी कई अनसुनी बातें अमर उजाला के साझा की हैं।
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बॉलीवुड की चार पीढ़ियों के लिए गीतकार समीर अंजान ने गीत लिखे हैं। अमिताभ बच्चन से होते हुए शाहरुख खान और ऋतिक रोशन तक की फिल्मों में उनके लिखे गीत शामिल हैं। 1980 से बॉलीवुड में करियर शुरू करने वाले समीर अंजान ने वक्त के साथ हमेशा खुद को बदला है। क्या वह जेन जी (Gen Z) जनरेशन के हिसाब से अपने गीतों को बदल रहे हैं? गीतकार के अपने पूरे करियर में किस घटना ने उनको हैरान किया? पढ़िए समीर अंजान से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
जेन जी (Gen Z ) को गीतों में शब्दों से मतलब नहीं है
समीर अनजान ने बॉलीवुड की चार अलग-अलग पीढ़ियों के लिए गीत लिखे। लेकिन जेन जी श्रोता उनके सामने एक चुनौती बनकर खड़े हैं। समीर अंजान कहते हैं, ‘ शोर बहुत बढ़ गया है, इस शोर में शब्द कहीं गुम गए हैं। ये जो पीढ़ी है, उसको सिर्फ साउंड चाहिए। आज की पीढ़ी में एक बैचेनी है। जेन जी जनरेशन को सिर्फ एक म्यूजिक बीट या साउंड दे दो, फिर इसमें कोई भी शब्द डाल दो। यह लोग शब्दों की गहराई को समझना बंद कर चुके हैं। इसका कारण यह है कि ये लोग इमोशन को महत्व नहीं देते हैं। आज की पीढ़ी इमोशन को गलत मानती है, झूठा मानती है। यह लोग प्रैक्टिकल हैं। इस पूरे प्रोसेस में शब्दों की इंपॉर्टेंस खत्म हो रही है। देखिए, जब लोग शब्दों को महत्व देते हैं, उसे सुनते हैं, उसे जीते हैं, समझते हैं, इससे उनके इमोशन पर असर होता है। तभी शब्द उनके लिए मायने रखते हैं। लेकिन जेन जी इमोशन को अहमियत नहीं देती है, तो वह शब्दों को भी इंपॉर्टेंस नहीं देती है। इसलिए हमारे गीतों में शब्द गुमशुदा हो गए हैं।’
समीर अंजान पूरी तरह से जेन जी को दोष नहीं देते हैं, उनके इस व्यवहार के पीछे माता-पिता को भी जिम्मेदार मानते हैं।
एआई को खतरा नहीं मानते समीर अंजान
आज एआई हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है, संगीत जगत में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। कुछ लोग इसे एक खतरे की तरह देख रहे हैं। लेकिन समीर अंजान इसके अलग सोचते रखते हैं। वह एआई को खतरा नहीं मानते हैं। वह कहते हैं, ‘देखिए, जो हमने लिख दिया है, उसमें एआई बदलाव कर सकता है, उसका म्यूजिक और शब्द बदल सकता है। लेकिन जो हमने लिखा ही नहीं है, जो हमें दिया ही नहीं, उसे एआई कहां से लेकर आएगा। किसी ने खूब कहा है कि एआई ने कभी इश्क किया नहीं, उसका कभी दिल टूटा नहीं। आखिर फिर एआई इमोशंस को कहां से लाएगा।’
अपना देखा और जिया ही लिखते हैं
समीर अंजान कहते हैं कि हर राइटर अपने दौर और आसपास की परिस्थितियों, कल्चर के हिसाब से काम करता है। हर राइटर अपना जिया हुआ ही लिखता है। वह कहते हैं, ‘हमारे पिता ने हमारी मां का चेहरा शादी वाले दिन देखा था, वो भी हल्की रोशनी में। लेकिन मेरी पीढ़ी ने ऐसा नहीं किया। मेरा मानना है कि बात लफ्जों की नहीं इमोशंस की है। साथ ही इसके पीछे आपका जीवनदर्शन क्या है, यह मायने रखता है। इसलिए मैं कहता हूं पहले चीजों को जियो, इश्क करो। दुनिया देखो, दर्द महसूस करो। क्रिएटिव लोगों को आम आदमी के आसपास रहना चाहिए, मैं आज भी लोकल ट्रेन, ऑटो में चल जाता हूं। मैं देखना चाहता हूं कि ये लोग कैसे बात कर रहे हैं, क्या महसूस कर रहे हैं। यह सब देखकर ही रूह पर असर पड़ता है। तब आपके अंदर से जो गीत निकलते हैं, उससे आम लोग रिलेट कर पाते हैं। तब लोग कहते हैं कि ये गीतकार तो मेरे दर्द की बात कह रहा है।’
जब गाना सुनकर अंडरवर्ल्ड से आया फोन
समीर अंजान अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताते हैं, ‘एक बार सुबह चार बजे अंडरवर्ल्ड से फोन आया। सामने फोन पर एक आदमी शराब पीकर खूब रो रहा है। वह बोला कि सर आपने दो लाइन में मेरी पूरी जिंदगी लिख दी। वो गाना था, ‘जिंदगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए, जब यह सोचा तो घबरा गए, हम कहां थे, कहां आ गए।’ यह तो किसी अंडरवर्ल्ड की जिंदगी की सच्चाई है। मैंने भी जब जीवन में अभाव देखा, तो मेरी कलम से अपना जिया हुआ ही लिखा गया।’

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