ओटीटी के लिए बिक चुकीं फिल्मों को नहीं मिलेगी थिएटरों में जगह, अब सिनेमाघर मालिकों ने दिखाए तेवर
- फिल्मों को सिनेमाघरों की बजाय सीधे ओटीटी पर रिलीज करने की घोषणा की थी।
- सभी जगह सिनेमाघर 15 अक्टूबर से खुलने वाले हैं।
- फिल्मों के प्रसारण के लिए सिनेमाघरों के मालिकों ने फिल्म देखने की प्रक्रिया में भी काफी बदलाव किए हैं।
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केंद्र सरकार की तरफ से देशभर में सिनेमाघरों को खोलने की इजाजत मिलने के बाद सिनेमाघरों के मालिकों ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वह अपने सिनेमाघरों में उन फिल्मों को रिलीज नहीं करेंगे जो लॉकडाउन के दौरान सिनेमाघरों को छोड़कर सीधे ओटीटी पर रिलीज हो चुकी हैं। इस फिल्मों में 'दिल बेचारा', 'सड़क 2', 'शकुंतला देवी', 'खुदा हाफिज', 'गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल', 'गुलाबो सिताबो' जैसी कई फिल्में शामिल हैं।
इन फिल्मों के निर्माताओं ने जब अपनी फिल्मों को सिनेमाघरों की बजाय सीधे ओटीटी पर रिलीज करने की घोषणा की थी तब सिनेमाघरों के मालिकों ने एक प्रेस रिलीज जारी करके फिल्म निर्माताओं के फैसले पर एतराज जताया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि वह फिल्म निर्माताओं के फिल्मों को ओटीटी पर रिलीज करने के फैसले से काफी निराश हैं। उनके इस फैसले से फिल्मों और सिनेमाघरों के बीच मतभेद पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसके जवाब में निर्माताओं ने भी सिनेमाघर मालिकों को यह भरोसा दिलाया था कि देश में जब सिनेमाघरों के ताले फिर से खुलेंगे, तब वह अपनी फिल्में इन सिनेमाघरों में ही रिलीज करेंगे।
अब जब पूरे देश में कुछ एक राज्यों को छोड़कर सभी जगह सिनेमाघर 15 अक्टूबर से खुलने वाले हैं। तो, ऐसे में सिनेमाघरों के मालिकों ने ओटीटी पर रिलीज हो चुकी फिल्मों को अपने यहां फिर से रिलीज करने से साफ मना कर दिया है। ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों में सबसे पहली फिल्म अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की 'गुलाबो सिताबो' रही। इसके बाद तो कई छोटी-बड़ी फिल्मों को सीधे ओटीटी पर बेच दिया गया। सिनेमाघरों के लिए बनी काफी फिल्में अब तक रिलीज हो चुकी हैं और कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के लिए प्रस्तावित हैं।
सिनेमाघरों ने घोषणा की है कि लंबे समय के बाद खुलने जा रहे सिनेमाघरों में शुरू के दिनों में 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान', 'मलंग', 'केदारनाथ', 'थप्पड़', 'तानाजी- द अनसंग वॉरियर' और 'वॉर' जैसी फिल्मों को फिर से सिनेमाघरों में रिलीज करेंगे। जैसे-जैसे नई फिल्में तैयार होकर सिनेमाघरों में आती जाएंगी, वैसे ही इन पुरानी फिल्मों का चलन कम होता जाएगा। अपने यहां फिल्मों के प्रसारण के लिए सिनेमाघरों के मालिकों ने फिल्म देखने की प्रक्रिया में भी काफी बदलाव किए हैं। सरकार ने सिनेमाघरों को एक शो में सिर्फ 50 फीसदी दर्शकों को ही ऑडिटोरियम में दाखिल होने की इजाजत दी है। टिकट की व्यवस्था और खाने की चीजें भी ज्यादातर ऑनलाइन ही ऑर्डर की जा सकेंगी।
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