ऐसे तो डूब जाएंगे वरुण धवन!
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वरुण धवन ने अपने करिअर की शुरुआत में दर्शकों का प्यार और विश्वास जीता। मगर फ्लॉप दिलवाले की नाकामी से उन्हें थोड़ा झटका लगा। क्या अगली फिल्म में वह इससे उबर सकेंगे? इसका जवाब खुद वरुण के पास नहीं है क्योंकि उनके बारे में फैसले लेने का काम उनकी टीम के मेंबर, मैनेजर, पीआर और चमचे करते हैं।
चमकने के लिए बहुत मेहनत लगती है और डूबने के लिए थोड़ी-सी गलतियां। युवा सितारे वरुण धवन को यह बात समझनी जरूरी है। कामयाब पिता डेविड धवन की वजह से उन्हें फिल्मों में प्रवेश आसानी से मिला और करन जौहर जैसे निर्माता-निर्देशक ने लॉन्च किया। अतः उन्हें मालूम नहीं कि संघर्ष किस चिड़िया का नाम है। यह किसी से छुपा नहीं है कि फिल्मों के निर्माण और प्रचार में आजकल करोड़ों रुपये लगते हैं। पुराने रिकॉर्ड और तथाकथित स्टारडम से फिल्म सफल नहीं होती। फैन बने नहीं रहते। संभवतः यह बात वरुण और उनकी टीम को समझ नहीं आ रही है।
वरुण और उनकी टीम की बड़ी समस्या टाइम मैनेजमेंट की दिख रही है और इसी महीने रिलीज होने वाली ढिशुम के प्रमोशन को वह हल्के ढंग से ले रहे हैं। जबकि यह वरुण के करिअर की संभवतः सबसे महंगी फिल्म है। इसके नतीजे से तय होगा कि सौ करोड़ जैसे बजट की फिल्में बनाने वाले निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्म के लिए वरुण के नाम पर विचार करेंगे या नहीं। बड़े बजट वाली अपनी पिछली नाकाम फिल्म दिलवाले को वरुण और उनकी टीम शायद शाहरुख खान की विफलता समझ रहे हैं। इसीलिए ढिशूम को लेकर आश्वस्त हैं।
वरुण को आस-पास के लोग ही डुबोएंगे!
इतिहास गवाह है कि फिल्मी सितारों को उनके आस-पास के लोग ही डुबाते हैं। जो प्रशंसक और विश्लेषक होने के नाम पर चमचे होते हैं अथवा उनका काम करने का बहाना करते हुए अपने उल्लू सीधे करते हैं।
ढिशुम के प्रमोशन में यह शिकायत आम है कि मीडिया को इंटरव्यू के लिए बुला कर, दिए गए समय पर वरुण अपनी टीम के साथ लंच के लिए चले जाते हैं। जो पौन या एक घंटे से कम नहीं होता। फिर उसी इंटरव्यू के समय में वरुण को उनकी टीम दूसरे काम और अन्य अपॉइंटमेंट याद दिलाती है। तब बताया जाता है कि वरुण के पास बातचीत का समय नहीं है।
जिस फिल्म के लिए खुद को तैयार करने और शूटिंग में महीनों लगा दिए, उसी के प्रमोशन की बात के लिए घंटा भर भी नहीं होता! यह कमाल है। यही नहीं, इंटरव्यू के बीच-बीच में वरुण बार-बार अपनी मैनेजर की तरफ देखते हैं कि वह हस्तक्षेप करें और मीडिया के इंटरव्यू खत्म कराएं। कई बार वह सवालों के जवाब भी मैनेजर की ओर देख कर देते हैं कि क्या कहें? हालांकि उम्र के लिहाज से वरुण पर्याप्त समझदार हैं और जानते हैं कि प्रश्नों के उत्तर क्या होने चाहिए!
वरुण को करिअर की शुरुआत में जरूर सफलताएं मिलीं और 2016 में ढिशूम उनकी अकेली फिल्म है। इसकी सफलता ही दर्शकों से उनकी अगली फिल्म का इंतजार कराएगी। वर्ना तो हर शुक्रवार को फ्लॉप फिल्मों का ढेर लग ही रहा है। अगले साल वरुण की दो फिल्में कतार में हैं। इनमें से बद्रीनाथ की दुल्हनिया में वह नया कुछ करने के बजाय हम्टी शर्मा की दुल्हनिया की बातों को दोहरा रहे हैं। दूसरी तरफ उनकी जुड़वां सलमान खान की लगभग 19 साल पुरानी फिल्म का रीमेक होगी। ऐसे में वरुण के पास दर्शकों के सामने नया पेश करने को क्या है? कड़ी प्रतिस्पर्द्धा के इस दौर में उनके सामने रणबीर कपूर, रणवीर सिंह, सिद्धार्थ मल्होत्रा, आदित्य रॉय कपूर जैसे ऐक्टर हैं।
वास्तव में वरुण को इस समय अपने लिए बेहतर कहानियों के साथ ऐसी टीम की जरूरत है जो समचमुच उनकी हितैषी हो। बीते चार बरसों ने उन्हें अच्छी शुरुआत दी और अगले चार बरस ऊंची उड़ान दे सकते है। बशर्ते पैर जमीन पर और सोच सही जगह पर रहे। बॉलीवुड में पुरानी सफलताओं की बही काम नहीं आती। हर नई फिल्म को अपनी कामयाबी खुद लिखनी पड़ती है। सितारे वही लंबे समय तक चमकते हैं जो संघर्ष और सफलता की लगाम अपने हाथों में रखते हैं। तथाकथित टीम मेंबरों, मैनेजरों, पीआर और चमचों के भरोसे रहने वाले चैंपियनों को बॉक्स ऑफिस की नाकामी का एक ढिशुम चित कर देता है।