कभी अक्षय-शाहरुख और अजय देवगन को देता था टक्कर, इन गलतियों से बदली जिंदगी; जानें अविनाश वाधवन की कहानी
Avinash Wadhawan: एक समय था जब अविनाश वाधवन की तुलना अक्षय कुमार, अजय देवगन और शाहरुख खान से की जाती थी, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि ये नाम अचानक से गायब सा हो गया।
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एक समय ऐसा भी था जब अविनाश वाधवन बॉलीवुड के उभरते सितारों में गिने जाते थे। 90 के दशक की शुरुआत में उनके पास फिल्मों की लाइन लगी रहती थी और वह बड़ी-बड़ी हीरोइनों के साथ काम कर रहे थे। इतना ही नहीं, जिन फिल्मों ने आगे चलकर अजय देवगन, शाहरुख खान और अक्षय कुमार को सुपरस्टार बनाया, उनमें से कुछ के लिए अविनाश का नाम भी सामने आया था। लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और आज वह मुख्यधारा बॉलीवुड से लगभग दूर हो चुके हैं।
पढ़ाई में तेज, लेकिन किस्मत ने बदल दी राह
अविनाश वाधवन शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छे थे। उन्होंने दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आगे एमबीए करने का सपना देखा। उन्हें IIM लखनऊ में एडमिशन भी मिल गया था, लेकिन उन्होंने मुंबई के जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट को चुना। यहीं से उनकी जिंदगी ने अचानक मोड़ लिया।
कॉलेज के दौरान एक फैशन डिजाइनर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें मॉडलिंग का ऑफर मिला। धीरे-धीरे यह काम इतना बढ़ गया कि पढ़ाई छूट गई। सिर्फ एक साल में उन्होंने 60 से ज्यादा विज्ञापनों और फैशन शो में काम कर लिया और फिर फिल्मों की ओर रुख किया।
फिल्मों में मिला जबरदस्त नाम
अविनाश को असली पहचान फिल्म ‘आई मिलन की रात’ से मिली, जो हिट रही। इसके बाद उन्होंने ‘बलमा’, ‘जुनून’, ‘दिल की बाज़ी’, ‘गीत’ और ‘पापी गुड़िया’ जैसी कई फिल्मों में काम किया। उस दौर में वह इंडस्ट्री के व्यस्त और लोकप्रिय हीरो बन चुके थे।
गलत फैसलों और निजी जिंदगी ने बदला करियर
करियर के पीक पर ही अविनाश की शादी हो गई और वह कम उम्र में पिता भी बन गए। लेकिन उनकी निजी जिंदगी में परेशानियां बढ़ने लगीं, जिसका असर उनके काम पर पड़ा। उन्होंने खुद माना कि उन्होंने अपने पर्सनल प्रॉब्लम्स को करियर पर हावी होने दिया।
इसी दौरान वह भारत छोड़कर विदेश चले गए और लंबे समय तक इंडस्ट्री से दूर रहे। जब तक वह वापस लौटे, तब तक बॉलीवुड काफी बदल चुका था।
हाथ से निकल गईं बड़ी फिल्में
अविनाश ने खुद बताया कि कई बड़ी फिल्में उनके हाथ से निकल गईं।
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‘फूल और कांटे’ पहले उन्हें ऑफर हुई थी, जो बाद में अजय देवगन की डेब्यू फिल्म बनी।
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‘दीवाना’ में भी वह काम कर सकते थे, लेकिन डेट्स की वजह से मना कर दिया, और यह फिल्म शाहरुख खान को मिल गई।
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‘ये दिल्लगी’ भी उनसे छूट गई, जो बाद में सैफ अली खान ने की।
ये वही फिल्में थीं जिन्होंने दूसरे एक्टर्स का करियर चमका दिया।
टीवी और ओटीटी पर नई शुरुआत
फिल्मों में वापसी मुश्किल होने पर अविनाश ने धीरे-धीरे टीवी और रीजनल सिनेमा की ओर रुख किया। शुरुआत में यह बदलाव उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने इसे स्वीकार किया।
आज वह कभी-कभार टीवी, रीजनल फिल्मों और ओटीटी प्रोजेक्ट्स में नजर आते हैं। हाल ही में वह कुछ डिजिटल प्रोजेक्ट्स में भी दिखे हैं।
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अविनाश वाधवन की कहानी हमें यह सिखाती है कि बॉलीवुड में सिर्फ टैलेंट ही काफी नहीं होता। सही समय, सही फैसले और लगातार मेहनत भी उतनी ही जरूरी होती है। एक छोटा सा ब्रेक या गलत फैसला भी पूरे करियर को बदल सकता है।