तिवारी जी पर गिर जाता पेड़, सेट पर हुए कई प्रैंक, 'भाबीजी..' की टीम ने सुनाए फिल्म से जुड़े किस्से
Bhabiji Ghar Par Hain-Fun on the Run: टीवी के लोकप्रिय शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ पर एक फिल्म बनी है। 6 फरवरी को यह सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी। अमर उजाला ने फिल्म की स्टार कास्ट से खास बातचीत की।
विस्तार
टीवी का लोकप्रिय शो 'भाभीजी घर पर हैं' अब फिल्म बनकर आने वाला है। यह शो कई वर्षों से ऑडियंस का पसंदीदा रहा है। अमर उजाला से बातचीत में निर्देशक शशांक बाली और पूरी स्टारकास्ट ने बताया कि फिल्म बनाने का फैसला कैसे लिया गया? उन्होंने शूटिंग के अनुभव, चुनौतियों और कुछ खास घटनाओं के बारे में भी बात की। सभी कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं और फिल्म से जुड़ी उम्मीदों को अपनी ही जुबानी साझा किया। पढ़िए उनकी पूरी बातचीत।
बड़े कैनवस पर रखना जरूरी लगा: शशांक बाली, निर्देशक
सबसे पहले यह विचार आया कि यह शो कई वर्षों से चल रहा है और ऑडियंस इसे लगातार प्यार दे रही है। हमें लगा कि इसे बड़े स्तर पर ले जाना चाहिए। इसलिए इसे एक बड़ी ट्रीट बनाने का सोचा गया। बड़े कैनवस पर, बड़े स्केल पर, ताकि ऑडियंस को कुछ नया मजा मिल सके। 'भाभीजी...' को ऑडियंस हमेशा एक खास अंदाज में देखती आई है। यह फिल्म उसी दुनिया का नया रूप है। मजा वही है, तरीका नया है। एक चुनौती यह भी थी कि ऑडियंस इन किरदारों को लंबे समय से एक ही फॉर्मेट में देख रही है। बड़े पर्दे पर लाने के लिए कुछ नया दिखाना जरूरी था। कहानी मजेदार है। इसमें ट्विस्ट और टर्न्स हैं। शो का पूरा चकल्लस भी मौजूद है।
भाभीजी, दोनों भैया, हप्पू सिंह, टीका, मलखान, टिल्लू, सक्सेना सभी इस फिल्म में भी हैं। इसके साथ ही रवि जी, मुकेश जी, दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ और बिजेंद्र काला जैसे कलाकार इसे और समृद्ध बनाते हैं। टीवी पर ऑडियंस जो मजा लेती है, वह मिलेगा ही। लेकिन फिल्म का अनुभव अलग है और इसे थिएटर में ही महसूस किया जा सकता है। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि ऑडियंस का समय अच्छा बीतेगा।
शो इंसानी मनोविज्ञान को पकड़ता है: मुकेश तिवारी, एक्टर
यह शो केवल कॉमेडी नहीं है। यह इंसानों की सोच और उनके व्यवहार को भी दिखाता है। खासकर पुरुषों की मानसिकता और उनकी भावनाओं को। ऑडियंस इसी वजह से आसानी से इससे जुड़ जाती है। कई बार यह शो लोगों की परेशानी भी हल्की कर देता है। इस शो ने मुझे एक कलाकार के रूप में बहुत कुछ सिखाया है और आगे बढ़ाया है। हमारी टीम बहुत सहज तरीके से काम करती है। स्क्रिप्ट भी स्वाभाविक होती है और परफॉर्मेंस भी। शशांक बाली सेट पर ऐसा माहौल रखते हैं कि कलाकार बिना किसी दबाव के काम कर सकें। इसी वजह से शो और फिल्म दोनों में ऊर्जा अलग महसूस होती है।
झिझक थी पर स्क्रिप्ट पर भरोसा था: आसिफ शेख, अभिनेता
सिनेमा और टीवी दोनों अलग माध्यम हैं। इसलिए जब भाभीजी पर फिल्म बनाने की बात आई तो शुरुआत में थोड़ी झिझक हुई। लगा कि क्या यह फॉर्मेट बड़े पर्दे पर अच्छा लगेगा। लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ते ही साफ हो गया कि यह अलग तरह की कहानी है। यह एक यात्रा की तरह है। किरदार नई जगहों पर जाते हैं। अलग माहौल में होते हैं और नई परिस्थितियों से गुजरते हैं। टीवी के मुकाबले बड़े पर्दे पर इन्हें देखना बिल्कुल नया अनुभव है। बड़े पर्दे पर हर भावना, हर किरदार और हर सीन ज्यादा प्रभाव छोड़ता है। मुझे लगा कि यह फिल्म शो की कॉपी नहीं है, बल्कि उसका आगे बढ़ता हुआ रूप है।
'कुछ सेकंड का फर्क बड़ा हादसा होने से रुक गया'
आसिफ शेख ने आगे बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान एक घटना हुई, जो आज भी याद है। हम एक ऐसी लोकेशन पर थे, जहां चारों तरफ पेड़ लगे हुए थे। लेकिन ये असली जंगल वाले पेड़ नहीं थे। इन्हें केवल जमीन में लगाया गया था। उनकी जड़ें कमजोर थीं और मिट्टी सूखी थी। मैं और रवि किशन एक सीन के लिए बैठे थे। मौसम थोड़ा ठंडा था और हम बातचीत कर रहे थे। तभी अचानक जोर की आवाज आई। एक बड़ा पेड़ हमारी तरफ गिर गया। यह पंद्रह से बीस फुट ऊंचा था और वहीं गिरा जहां हम बैठे थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि तिवारी जी कुछ ही सेकंड पहले उसी जगह खड़े थे। उन्होंने कहा था कि वह पेड़ को पास जाकर देखते हैं। जैसे ही वह कुछ कदम पीछे हटे, उसी समय पेड़ गिर पड़ा। अगर वह वहीं होते, तो हालत गंभीर हो सकती थी। मुझे और रवि जी को हल्की चोटें आईं। भगवान की दया से हम बच गए।
नौ साल शो किया, फिल्म और खास है: शुभांगी अत्रे, अभिनेत्री
मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि नौ साल तक इस शो का हिस्सा रही और अब फिल्म में भी शामिल हूं। यह फिल्म मेरे लिए खास है। शशांक बाली हमें काम करने की पूरी स्वतंत्रता देते हैं, जिससे काम करना आसान हो जाता है। फिल्म की शूटिंग देहरादून और मसूरी में हुई। यह मेरी पसंदीदा लोकेशंस हैं। वहां काम करना बहुत अच्छा अनुभव था। मैं ऋषिकेश मेडिटेशन के लिए जाती हूं, इसलिए इस पूरे क्षेत्र से मेरा जुड़ाव पहले से है। अंगूरी का किरदार मेरे दिल के बहुत करीब है। मैं उसे जरूर मिस करती हूं, लेकिन जो किया, पूरी ईमानदारी से किया। अब आगे नए कामों की प्रतीक्षा है।
सेट पर बहुत मस्ती करते थे: रोहिताश्व गौर, अभिनेता
सेट पर माहौल हमेशा हल्का रहता है। हम सभी के बीच मस्ती चलती रहती है। मेरे साथ तो अक्सर प्रैंक किए जाते हैं। कभी कहा जाता है कि कोई शो छोड़ रहा है। कभी कहा जाता है कि कोई प्रेग्नेंट है और अब कई महीने नहीं आएगा। कभी कोई बाथरूम में जाकर नकली उल्टी करता है ताकि माहौल गंभीर लगे। पहले मैं सच में घबरा जाता था। अब समझ आता है कि यह सब माहौल हल्का रखने के लिए होता है। और पचास साल की उम्र में मुझे हीरो जैसा रोल मिलना मेरे लिए एक अच्छा अवसर है। मैं इसे पूरी तरह एंजॉय करता हूं।
पहली बार आउटडोर शूट और असली स्टंट करने का मौका मिला-विदिशा श्रीवास्तव
टीवी पर हम ज्यादातर एक ही सेट पर शूट करते हैं। लेकिन इस फिल्म में देहरादून और मसूरी में शूटिंग का मौका मिला। यह मेरे लिए नया अनुभव था। मौसम अच्छा था और टीम का मूड भी अच्छा था। हर शाम बहुत खूबसूरत बनी रहती थी। मुझे एडवेंचर पसंद है। इस फिल्म में मैंने कई स्टंट खुद किए। हार्नेस लगाकर ब्रिज से कूदना और फाइट सीक्वेंस करना मेरे लिए रोमांचक रहा। फिल्म में हॉरर भी है और कई एक्शन सीन भी हैं। और, फिल्म में मैं विभूति जी को काफी परेशान करती भी नजर आऊंगी।
