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'पहले जिस टैग से भागती थी अब वो खुशी देता है', भूमि ने करियर पर की बात; बोलीं- 'दलदल' का वॉयलेंस बनावटी नहीं

Kiran Jain किरण जैन
Updated Sat, 31 Jan 2026 06:49 PM IST
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सार

Bhumi Pednekar Exclusive interview: भूमि पेडनेकर की नई सीरीज ‘दलदल’ इस शुक्रवार ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। भूमि ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि आगे वो किस तरह के किरदार करना पसंद करेंगी। इसके अलावा एक्ट्रेस ने फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के पे गैप पर भी बात की। पढ़िए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू...

Bhumi Pednekar Exclusive interview on daldal industry pay gap and personal experience
भूमि पेडनेकर का इंटरव्यू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भूमि पेडनेकर की वेब सिरीज ‘दलदल’ सिर्फ एक क्राइम-थ्रिलर कहानी नहीं है, बल्कि इसमें बचपन हुए ट्रॉमा पर भी बात की गई है। अमर उजाला से हुई बातचीत में भूमि ने फिल्म में दिखाए गए वॉयलेंस और उसे दिखाने के उद्देश्य पर चर्चा की। इसके अलावा एक्ट्रेस ने अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में भी काफी कुछ साझा किया। 

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पिछले साल बॉक्स ऑफिस पर मेल एक्शन और वाॅयलेंस ट्रेंड में रहा। ऐसे माहौल में आपकी सीरीज का वाॅयलेंस कहां खड़ा होता है?
सीरीज में वाॅयलेंस है, लेकिन मैं इसे महिला बनाम पुरुष के नजरिए से नहीं देखती। मेरे लिए वाॅयलेंस का कोई जेंडर नहीं होता। असली बात यह है कि कहानी में वाॅयलेंस दिखाया क्याें जा रहा है ? यहां वाॅयलेंस सिर्फ दिखावे के लिए नहीं बल्कि किरदारों की मनोवैज्ञानिक हालत और उनके भीतर के ट्रॉमा को समझाने के लिए है। जब किसी के अंदर इतनी घुटन हो तो प्रतिक्रिया भी तीखी ही होगी। ऐसे में दलदल का वाॅयलेंस मुझे जरूरत के मुताबिक लगता है न कि बनावटी।

Bhumi Pednekar Exclusive interview on daldal industry pay gap and personal experience
भूमि पेडनेकर का इंटरव्यू - फोटो : इंस्टाग्राम -@bhumisatishpednekkar

क्या पर्सनल लाइफ में कभी कोई दर्दनाक अनुभव हुआ ?

जी हां। हम सबकी जिंदगी में कुछ न कुछ ऐसा जरूर होता है जो भीतर एक तरह का ट्रॉमा छोड़ जाता है। यह हमेशा बहुत बड़ा नहीं होता। कभी बचपन में कोई बुरा अनुभव हो जाए, कोई बैड टच हो, या स्कूल में किसी ने बुली कर दिया हो। उस समय हम आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन हमारी बॉडी उस अनुभव को याद रखती है।
वह याद हमारे शरीर में कहीं न कहीं दर्ज हो जाती है।औरत होने के नाते अगर कभी आपको खतरा महसूस हुआ हो, कोई आपको दूर से घूरता रहा हो, या किसी की मौजूदगी ने आपको असहज कर दिया हो, तो वह भी ट्रॉमा ही है।
और यह हम में से लगभग हर महिला के साथ किसी न किसी रूप में होता है। बड़ी बात यह है कि ये सिर्फ हमारी पीढ़ी की बात नहीं है। हमारी मां, हमारी नानी और पिछली कई पीढ़ियां भी ऐसे ही अनुभवों से गुजरी हैं। कहा जाता है कि मां का ट्रॉमा भी बच्चे तक पहुंचता है। इसलिए कई बार लगता है कि हम सब किसी न किसी स्तर पर ट्रॉमा को साथ लेकर ही जन्म लेते हैं।

Bhumi Pednekar Exclusive interview on daldal industry pay gap and personal experience
भूमि पेडनेकर का इंटरव्यू - फोटो : इंस्टाग्राम -@bhumisatishpednekkar

कठिन अनुभवों से बाहर आने में आपकी सबसे बड़ी ताकत कौन रहा?
कठिन अनुभवों से बाहर आने में मेरे परिवार ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। मैं खुद को बहुत लकी मानती हूं कि मेरे पास ऐसा परिवार है। स्कूल के दिनों में भी मेरे साथ कुछ बातें हुईं, लेकिन मैं हमेशा अपने माता पिता के पास जा सकती थी।
वे मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे। मुझे पता था कि वे बिना जज किए मुझे समझेंगे और संभालेंगे। यही मेरा सबसे बड़ा सहारा रहा और यही वजह है कि मैं आज मजबूत बन पाई। 

आपको अक्सर सामाजिक मुद्दों वाली फिल्मों से जोड़ा जाता है। क्या यह टैग आपको सीमित करता है?
हां, मेरी फिल्मों में अक्सर सामाजिक मुद्दे दिखाई देते रहे हैं और कुछ समय तक मुझे इस बात का डर भी था कि कहीं मुझे सिर्फ सामाजिक विषयों वाली फिल्मों का टैग न मिल जाए। पहले यह सवाल मुझे थोड़ा परेशान कर देता था क्योंकि लगता था कि शायद लोग मुझे एक ही तरह की फिल्मों में देखने लगेंगे। लेकिन आज मैं इस बात पर गर्व महसूस करती हूं। 
पहले मैं इस टैग से भागती थी पर अब मुझे एहसास है कि यह एक तरह की जिम्मेदारी भी है और मुझे वह जिम्मेदारी निभाने में खुशी होती हैमैं ऐसे ही काम करना चाहती हूं। मुझे कंटेंट आधारित और सामाजिक रूप से जागरूक फिल्में करना पसंद है ऐसी कहानियां जिनमें कोई सार्थक बात हो... जो किसी की सोच को बदल सकें या कम से कम प्रभावित कर सकें।
अगर मेरा काम किसी की सोच को थोड़ा भी आगे बढ़ा सके तो मेरे लिए यही सबसे बड़ा पुरस्कार है।

Bhumi Pednekar Exclusive interview on daldal industry pay gap and personal experience
भूमि पेडनेकर का इंटरव्यू - फोटो : इंस्टाग्राम -@bhumisatishpednekkar

किस तरह के किरदार और निभाने की इच्छा है?
मैं एक पीरियड फिल्म करना चाहूंगी। मैंने अब तक कोई पीरियड फिल्म नहीं की और मैं हमेशा से इस जोनर के प्रति बेहद आकर्षित रही हूं। हमारे इतिहास में कई महान औरतें, नेता और नायिकाएं रही हैं जिनके बारे में जानकर लगता है कि उन किरदारों को निभाना कितना प्रेरणादायक होगा।
स्वतंत्र भारत या उससे पहले के दौर की किसी मजबूत महिला पर आधारित कहानी में काम करना मुझे बहुत पसंद आएगा।

इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए आप कौन सा बदलाव देखना चाहेंगी?
मैं हमेशा पे गैप के बारे में बात करती हूं क्योंकि मुझे लगता है कि हमारी इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए पे गैप अब भी बहुत ज्यादा है। खासकर पोस्ट पैंडेमिक इसका असर और भी बढ़ गया है और उसका पूरा बोझ औरतों को ही झेलना पड़ा है।मैं सच में उम्मीद करती हूं कि इसमें कुछ बराबरी आए।
साथ ही मुझे लगता है कि महिलाओं के नेतृत्व वाली कहानियों को थिएटर में जितना स्पेस और अवसर मिलना चाहिए उतना अब नहीं मिल रहा। यह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।यह बदलाव सिर्फ इंडस्ट्री अपने आप नहीं ला सकती इसमें ऑडियंस की भी बड़ी भूमिका है।
अगर ऑडियंस ऐसे कंटेंट को सपोर्ट करे तो महिलाओं के नेतृत्व वाली कहानियों को फिर से वह जगह मिल सकती है जिसकी वे हकदार हैं।

Bhumi Pednekar Exclusive interview on daldal industry pay gap and personal experience
भूमि पेडनेकर का इंटरव्यू - फोटो : Instagram @bhumisatishpednekkar

अपने करियर के किस अनुभव को आप फिर से जीना चाहेंगी?
फिल्मों की बात करूं तो कई ऐसी फिल्में हैं जो मेरे दिल के बहुत करीब हैं। लेकिन अगर मुझसे पूछा जाए कि किस फिल्म के अनुभव को मैं फिर से जीना चाहूंगी तो शायद ‘बधाई दो’ सबसे पहले दिमाग में आती है।मुझे वह फिल्म करते हुए बहुत मजा आया था।
उसका प्रोसेस, उसका किरदार और पूरी टीम सब कुछ बहुत खास था। वह अनुभव इतना खूबसूरत था कि अगर कभी मौका मिले तो मैं उसे फिर से करना चाहूंगी।

एक्टिंग, चैरिटी और बिजनेस के बीच कौन सा काम आपके दिल के सबसे करीब है?
एक्टिंग, बिजनेस और चैरिटी मेरी जिंदगी में ये सब अलग-अलग तरह से महत्व रखते हैं। बाकी दिल के सबसे ज्यादा करीब मेरा चैरिटी का काम है। मैं यह काम तब से कर रही हूं जब मैं एक्टर भी नहीं बनी थी। 
खासकर जलवायु से जुड़ी पहल, पशु कल्याण और बच्चों के साथ किया गया काम यह सब मेरे बहुत करीब है। इनके लिए काम करने में मुझे सच में खुशी मिलती है।


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