'काम से ज्यादा वहां मोहब्बत मिली'; 'धुरंधर 2' के बड़े साहब ने बताया आदित्य धर के साथ काम करने का अनुभव
Danish Iqbal Interview: फिल्म 'धुरंधर 2' में बड़े साहब के रोल में नजर आए अभिनेता दानिश इकबाल ने हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने आदित्य धर के साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया।
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फिल्म 'धुरंधर 2-द रिवेंज' सिनेमाघरों में लगी हुई है। आदित्य धर निर्देशित फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। इसका हर किरदार ने अपनी छाप छोड़ी है। धुरंधर 2 में बड़े साहब का रोल काफी पसंद किया जा रहा है, जो दानिश इकबाल ने अदा किया है। हाल ही में खास बातचीत में दानिश ने इस किरदार में आई चुनौतियों पर बात की। साथ ही रणवीर सिंह और आदित्य धर के साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया।
ऐसी अफवाहें आईं कि अक्षय कुमार बड़े साहब का किरदार को निभा रहे हैं। इस किरदार को लेकर बड़े-बड़े एक्टर्स का नाम सामने आए कि वो ये किरदार निभा रहे हैं। मगर, जब आपने यह रोल किया तो आपको ऐसा नहीं लगा कि आपने एक झटके में सबको रिप्लेस कर दिया?
दानिश इकबाल: अरे ऐसा मत कहिए। मैंने किसी को रिप्लेस नहीं किया है। मैंने कोई बहुत बड़ा तीर नहीं चलाया। मुझे जितना आता था, वह ईमानदारी से करने की कोशिश की। दर्शकों को मेरी ईमानदारी पसंद आई है और वे उसे सराह रहे हैं। बात करने को तो मैं देखता हूं कि मेरी फीस 10 करोड़ लिखी है। अगर 10 करोड़ मिल जाएं तो शायद मैं वर्षों काम न करूं।
रणवीर सिंह और अर्जुन रामपाल के साथ काम करके कैसा लगा?
दानिश इकबाल: बहुत अच्छा लगा। यह सवाल कई लोग पूछ रहे हैं और मैं तारीफ करते नहीं थक रहा। बहुत ही विनम्र हैं। आपको इतना अच्छा फील कराते हैं कि आप सोचते नहीं कि आप इतने बड़े स्टार के साथ काम कर रहे हैं। वहां हम काम करते हैं तो बहुत फोकस होकर काम करते हैं। लोगों को लगता है कि शूटिंग बड़े मजे की चीज है। मैं शर्तिया कहता हूं कि सेट पर कोई पूरा दिन बिता दे तो पलटकर सेट का मुंह नहीं देखेगा। एक ही चीज को बार-बार करना। फोकस होकर करना। लाइन एकदम सही निकलें। बहुत फोकस चाहिए।
आदित्य धर के डायरेक्शन में ऐसा क्या खास लगा?
दानिश इकबाल: सेट पर माहौल बहुत ही खुशनुमा था। बहुत ही प्यार भरा था। सब एक-दूसरे की बहुत केयर कर रहे थे। मैं क्योंकि बीमार था तो मेरी ज्यादा पैंपरिंग हो रही थी। आदित्य सर बार-बार मेरे पास आकर पूछते थे। कुछ चाहिए तो नहीं। मैं हाथ जोड़कर कहता था कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। बहुत ही विनम्र हैं वे। धुरंधर की सक्सेस होने के पीछे बहुत बड़ा कारण है, उसमें एक कारण है कि बी62 की पूरी टीम जज्बाती लोगों की टीम है। एक-दूसरे की केयर करने वालों की टीम है।काम से ज्यादा वहां मोहब्बत मिली।
यह फिल्म कैसे मिली?
दानिश इकबाल: यह रोल मुझे डायरेक्ट ऑफर हुआ था। मुझे एक दिन मुकेश छाबड़ा जी के ऑफिस से मैसेज आया कि आपकी हाइट कितनी है? फिर उम्र पूछी, फिर वजन पूछा। मैं सोच रहा था कि क्या करवाना है इन्हें। फिर कॉल आया कि क्या आपकी ये डेट्स खाली हैं। मैंने हां बोल दिया। फिर मुकेश छाबड़ा जी का कॉल आया और उन्होंने बताया कि यह दाउद का रोल करना है। मैंने कहा कि आप श्योर हो कि मुझे यह रोल दे रहो हो। वे बोले- हां बिल्कुल। कुछ डर थे मेर अंदर, लेकिन अब सब इतिहास है।
इस फिल्म की कुछ आलोचनाएं हो रही हैं। उन्हें कुछ जवाब देना चाहेंगे?
दानिश इकबाल: जिस तरह हम प्यार की बहुत कद्र करते हैं, उसी तरह कोई निंदा कर रहा है तो वह भी सिर आंखों पर। क्या कर सकते हैं? किसी को चुप नहीं करा सकते और कराना भी नहीं चाहिए। जिसके जो मन में है, बोलेगा। बस यही है कि सिनेमा को अगर आप सिनेमा की तरह देखा जाएगा तो वह सिनेमा है। अगर इसे किसी और चश्मे से देखेंगे तो फिर किसी चीज का कोई अंत नहीं है।
'संकल्प' फिल्म का अनुभव कैसा रहा?
दानिश इकबाल: फिल्म संकल्प का पहले दिन का शूट मेरा नाना पाटेकर के साथ था। मुझे यह बात पता नहीं थी। मुझे जब किसी ने बताया तो बहुत डर गया था, क्योंकि सुन रखा था कि वे बहुत सख्त हैं। मगर, मैं जैसा सोचकर जा रहा था, वे उसके विपरीत निकले। एक शॉट हुआ, उसके बाद उन्होंने मुझसे पूछा कि थिएटर करता है? मैंने कहा हां, तो बोले अच्छा करता है। उन्होंने बहुत सहज महसूस कराया। साथ में हम चाय पीने लगे। हम लोग रिहर्सल भी करने लगे साथ में। वे बहुत मेहनत करते हैं। हाथ से डायरी लिखते हैं, उसमें डायलॉग लिखते हैं। नए बच्चे तो नाना सर की तरह मेहनत ख्वाब में भी न सोच पाएं। उन्होंने बहुत प्रेरित किया।
धुरंधर 3 आ रही है?
पता नहीं। इसका जवाब सिर्फ आदित्य सर दे सकते हैं।