Exclusive:'आजादी सिर्फ मर्जी से जीने का नाम नहीं…' अभिनेत्री एरिका फर्नांडिस ने बताए स्वतंत्रता के असल मायने
Erica Fernandes Exclusive Interview: एरिका फर्नांडिस 'कुछ रंग प्यार के ऐसे भी' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे टीवी सीरियल से मशहूर हुईं। अभिनेत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आजादी के असल मायने बताए। अमर उजाला से की गई खास बातचीत में आजादी को लेकर अपने विचार साझा किए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अगर कोई आपसे पूछे कि आजादी का मतलब क्या है, तो शायद पहला जवाब होगा कि अपनी मर्जी से जीना। लेकिन अगर कोई आपको रोकने वाला ही न हो, तब? तब आपको खुद तय करना पड़ता है कि आपको जाना कहां है, किस चीज के लिए खड़ा होना है और अपने फैसलों की जिम्मेदारी कितनी उठानी है। अभिनेत्री एरिका फर्नांडिस के लिए आजादी का असली मतलब यहीं से शुरू होता है।
'कुछ रंग प्यार के ऐसे भी' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे टीवी शोज से घर-घर पहचान बनाने वाली एरिका फर्नांडिस पांच साल बाद '108 बेस हॉस्पिटल - उरी' से टीवी पर वापसी कर रही हैं। स्वतंत्रता दिवस पर अमर उजाला डिजिटल से बातचीत में एरिका ने सिर्फ अपने नए शो या किरदार की बात नहीं की। उन्होंने 80 साल में बदले भारत, आज की पीढ़ी और इस दौर में बचाकर रखी जाने वाली चीजों पर भी खुलकर बात की।
'80 साल में हमने सबसे अच्छी तरह क्या बचाया?’
बीते 80 साल में भारत ने क्या सबसे अच्छी तरह बचाया है? एरिका कहती हैं, 'मुझे लगता है कि हमने अपनेपन का अहसास बहुत अच्छी तरह बचाकर रखा है। हम बिल्कुल अलग पृष्ठभूमि से आते हैं, अलग भाषाएं बोलते हैं और हमारी जिंदगी भी एक-दूसरे से बहुत अलग हो सकती है। लेकिन फिर भी कुछ ऐसा है, जो हमें भारतीय होने के नाते जोड़ता है। मुझे लगता है कि हमें इसे कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।'
'आसपास के इंसान का दर्द देखना भूल गए हैं'
एरिका आगे कहती हैं, 'अब हमें सबसे ज्यादा अपनी संवेदनशीलता बचाने की जरूरत है। हम इतनी तेजी से जी रहे हैं कि कई बार रुककर यह सोच ही नहीं पाते कि हमारे आसपास का इंसान किस दौर से गुजर रहा है। मेरे लिए मजबूत होने का मतलब कभी यह नहीं रहा कि आप पर किसी चीज का असर ही न हो। किसी की परवाह कर पाना, संवेदनशील रहना और जरूरत के वक्त किसी के साथ खड़े होना भी बहुत बड़ी ताकत है।
वह थोड़ा रुककर कहती हैं, ‘शायद नैना का किरदार निभाते हुए मैंने इसे और करीब से महसूस किया। वह डॉक्टर है और हालात कितने भी मुश्किल हों, उसके सामने हमेशा किसी की जिंदगी सबसे पहले होती है। यह नजरिया मेरे साथ रह गया है।'
'हर किसी की जिंदगी आपकी तरह क्यों हो?'
एरिका को आज के भारत की एक बात खास तौर पर अच्छी लगती है कि युवा अब अपने लिए सपने देखने से उतना नहीं डरते। वह कहती हैं, 'मुझे इस बात पर गर्व होता है कि भारतीय, खासकर युवा पीढ़ी, अब अपने लिए सपने देखती है। पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंट है। लोगों में चीजों को एक्सप्लोर करने, नए रास्ते आजमाने और अपनी जिंदगी अपने तरीके से बनाने की इच्छा बढ़ी है। जरूरी नहीं कि उनकी जिंदगी वैसी ही हो, जैसी पिछली पीढ़ी ने उनके लिए सोची थी।’
एरिका आगे कहती हैं, ‘मैंने खुद भी सीखा है कि ग्रोथ को सिर्फ इस बात से नहीं मापना चाहिए कि आप अपने करियर में कहां हैं। कई बार थोड़ा पीछे हटना, खुद को समझना और फिर किसी ऐसे काम के साथ लौटना, जो आपको सच में उत्साहित करे, वो भी ग्रोथ है।'
'कोई आपको रोक नहीं रहा हो'
एरिका से जब पूछा गया कि आजादी की असली परीक्षा कब होती है, तो उन्होंने कहा, 'जब आपको पूरी आजादी मिली हो। मुझे लगता है कि जब कोई आपको रोकता है तो आप और ज्यादा अपने इरादे पर टिक जाते हैं। क्योंकि आपको पता होता है कि आप किस चीज के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन जब कोई आपको नहीं रोक रहा होता, तब आपको खुद तय करना पड़ता है कि आप वास्तव में क्या चाहते हैं, किस चीज के लिए खड़े होना चाहते हैं और उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कितने तैयार हैं।'
वह आगे कहती हैं, 'मेरे लिए आजादी अपने बनाए रास्ते पर चल पाने की भी है। मैं यह बिल्कुल नहीं सोचती हूं कि लोग इस बारे में क्या सोचेंगे। आज की जनरेशन के लिए यह और भी जरूरी है, क्योंकि एक तरफ वो अपनी पसंद की जिंदगी जीना चाहती है और दूसरी तरफ लगातार यह देखती रहती है कि लोग उसके बारे में क्या सोच रहे हैं।'
'आजादी का मतलब सिर्फ जो मन आए वो करना नहीं है'
एरिका के लिए स्वतंत्रता का सबसे जरूरी हिस्सा शायद यही है। आजादी के साथ जिम्मेदारी। वह कहती हैं, 'स्वतंत्रता की बात करते हुए हम कई बार भूल जाते हैं कि आजादी सिर्फ यह नहीं है कि आप जो चाहें, वो कर सकें। इसमें ऐसे फैसले लेने की हिम्मत भी शामिल है, जिनकी जिम्मेदारी आप उठा सकें। कई बार सबसे मजबूत चुनाव वही होता है, जिसमें आप खुद से पहले किसी और को रखते हैं।'
'नैना के किरदार से बहुत कुछ सीखा'
टीवी शो '108 बेस हॉस्पिटल - उरी' में एरिका आर्मी डॉक्टर नैना का किरदार निभा रही हैं। वह कहती हैं, 'नैना डॉक्टर है और हालात कितने भी मुश्किल हों, उसके लिए सबसे पहले किसी की जिंदगी मायने रखती है। उसकी जिंदगी में बहुत अनुशासन है, लेकिन उसी अनुशासन के भीतर बहुत निजी फैसले, त्याग और जिम्मेदारियां भी हैं।'
अभिनेत्री एरिका ने आखिर में कहा, 'शायद हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में यह भूल जाते हैं कि हमारे फैसलों का असर सिर्फ हम पर नहीं पड़ता। हम इतनी जल्दी में होते हैं कि सामने वाले के बारे में सोचना ही भूल जाते हैं। किसी के लिए रुक जाना, किसी की तकलीफ समझना या जरूरत के वक्त उसके साथ खड़े रहना भी आजादी की जिम्मेदारी का हिस्सा है। मेरे लिए यही चीज इस किरदार के साथ सबसे ज्यादा रह गई है।'