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‘हादसे की वजह टेक्नोलॉजी नहीं, मनोवैज्ञानिक कमी’, गाजियाबाद सुसाइड केस पर बोलीं पंचायत एक्ट्रेस सुनीता राजवार

Kiran Jain किरण जैन
Updated Thu, 05 Feb 2026 05:45 PM IST
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सार

Ghaziabad Triple Sister suicide Case: गाजियाबाद में 12, 14 और 16 साल की तीन बहनों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को हिला दिया है। ऑनलाइन गेम, विदेशी पॉप कल्चर और डिजिटल लत पर फिर बहस तेज हो गई है, लेकिन 'पंचायत' फेम एक्ट्रेस सुनीता राजवार  इस मामले को एक अलग नजरिए से देखती हैं।

Ghaziabad Triple Sister suicide Case: After Sonu Sood actor Sunita Rajwar Raises concern Over Online Gaming
सुनीता राजवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अभिनेता सोनू सूद इस घटना पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग पर बैन की बात कही। सोनू सूद के बाद अभिनेत्री सुनीता राजवार ने भी घटना पर दुख जताया है। अमर उजाला से बातचीत में अभिनेत्री ने कहा कि असली समस्या मोबाइल या इंटरनेट नहीं, बल्कि भारत में बच्चों के मनोविज्ञान और मानसिक समझ की कमी है। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश।

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Ghaziabad Triple Sister suicide Case: After Sonu Sood actor Sunita Rajwar Raises concern Over Online Gaming
सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar

'विदेशी कंटेंट बच्चों पर तेज असर डालता है'
आज बच्चे मोबाइल पर दुनियाभर का कंटेंट देखते हैं। विदेशी संस्कृति और ऑनलाइन ट्रेंड उनका ध्यान तेजी से खींच लेते हैं। कई बार वे ऐसे वीडियो या खेल भी देख लेते हैं, जो उनकी उम्र के लिए सही नहीं होते, लेकिन उन्हें वह सब अच्छा लगता है। समस्या विदेशी कंटेंट नहीं, बल्कि यह है कि उन्हें कोई नहीं बताता कि क्या सही है और क्या नहीं। अगर बच्चों को सही दिशा और भावनात्मक सहारा मिले, तो ऐसा कंटेंट उन्हें भटकाने की ताकत नहीं रखता। आज मोबाइल बच्चों के लिए जरुरत भी बन चुका है। कोविड के बाद से स्कूल का काम भी फोन पर होने लगा है। इसलिए माता-पिता चाहकर भी फोन नहीं हटा सकते। कई घरों में मां के पास फोन नहीं होता, लेकिन बच्चों के पास होता है, क्योंकि पढ़ाई उसी पर होती है। फोन को दोष देना आसान है, लेकिन असली कमी यह है कि हम बच्चों की डिजिटल आदतों और उनकी मानसिक जरूरतों को समझ ही नहीं पा रहे हैं। अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो मोबाइल भी उनके लिए सुरक्षित हो सकता है।

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'आज के बच्चों का बचपन मोबाइल में सिमट गया है'
हमारे समय में बच्चे बाहर खेलते थे। पतंग उड़ाते थे, गिल्ली-डंडा खेलते थे। आज के बच्चों का बचपन मोबाइल में सिमट गया है। मोबाइल की दुनिया में कोई सीमा नहीं होती। फोन को नहीं पता कि उसे दस साल का बच्चा चला रहा है या चालीस साल का आदमी। जो भी लिखोगे, वह तुरंत सामने आ जाएगा। यही खतरा है, क्योंकि बच्चा हर चीज समझने की उम्र में नहीं होता।

'बहुत से माता-पिता को पता ही नहीं'
बहुत से माता-पिता को यह भी नहीं पता चलता कि बच्चा मोबाइल पर क्या कर रहा है, क्या देख रहा है या किससे बात कर रहा है? कई बार बच्चे खेल-खेल में माता-पिता के बैंक खाते से पैसे भी खर्च कर देते हैं और पता तब चलता है जब बैंक का संदेश आता है। यह बच्चों की गलती नहीं, बल्कि बड़ों की डिजिटल जानकारी की कमी है। जब माता-पिता ही ऑनलाइन दुनिया नहीं समझते, तो बच्चे को कैसे समझाएंगे।

Ghaziabad Triple Sister suicide Case: After Sonu Sood actor Sunita Rajwar Raises concern Over Online Gaming
सुनीता राजवार - फोटो : सोशल मीडिया

'हमारे देश में मनोविज्ञान की शिक्षा पीछे'
भारत में मनोविज्ञान की शिक्षा अभी भी बहुत पीछे है। स्कूलों में इसे वैकल्पिक विषय की तरह देखा जाता है, जबकि यह सबसे जरूरी होना चाहिए। शिक्षकों को सीखना चाहिए कि बच्चे से कैसे बात करनी है, कैसे समझाना है और कौन-सी बात उसके मन पर चोट कर सकती है। कई बार शिक्षक पूरी कक्षा के सामने डांट देते हैं और इससे बच्चे का आत्मविश्वास टूट जाता है। यह सिर्फ पढ़ाई का नहीं, मानसिक विकास का सवाल है।

'माता-पिता को भी समझना होगा'
हर बच्चा अलग होता है। कोई पढ़ाई में पीछे होगा, कोई खेल में बेहतर, किसी की लिखावट अच्छी नहीं होगी। तुलना करने से बच्चा अंदर से टूट जाता है। बच्चों को सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि सहारा चाहिए। उन्हें ऐसा माहौल चाहिए जहां वे बिना डर अपनी बात कह सकें।

Ghaziabad Triple Sister suicide Case: After Sonu Sood actor Sunita Rajwar Raises concern Over Online Gaming
सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar

'आसपास कोई ऐसा नहीं था, जो उनसे बात करे'
गाजियाबाद की तीनों बहनों का एक ही चीज में इतना डूब जाना केवल प्रभाव का मामला नहीं है। यह गंभीर मनोवैज्ञानिक स्थिति है। तीन भाई-बहनों का बिल्कुल एक जैसी सोच रखना बहुत कम होता है। इससे साफ है कि उनके आसपास कोई ऐसा नहीं था, जो उनसे बात करे, उन्हें समझे या उनकी भावनाओं को महसूस कर सके। घरवालों को भी यह एहसास नहीं हुआ कि बच्चियां अंदर ही अंदर क्या झेल रही थीं। यही इस घटना का सबसे दुखद पहलू है।

'मोबाइल सुविधा भी है और खतरा भी'
मोबाइल सुविधा भी है और खतरा भी। आज मेट्रो, बस, पार्टी या किसी भी जगह देख लीजिए, हर कोई फोन में डूबा रहता है। बच्चे यही देखकर सीखते हैं। धीरे-धीरे वे अकेले पड़ने लगते हैं। लेकिन सिर्फ फोन को दोष देने से कुछ नहीं होगा। यह समझना जरूरी है कि बच्चा मोबाइल की ओर जाता क्यों है और उसकी क्या कमी है।

Ghaziabad Triple Sister suicide Case: After Sonu Sood actor Sunita Rajwar Raises concern Over Online Gaming
सुनीता राजवार - फोटो : इंस्टाग्राम @sunita_rajwar

'मनोविज्ञान को स्कूल में लाना जरूरी'
मेरे हिसाब से स्कूलों में मनोविज्ञान को अनिवार्य करना भी एक समाधान है। जब बच्चा अपनी भावनाओं और जिज्ञासाओं को समझना सीखेगा, तभी वह गलत दिशा में जाने से बचेगा। माता-पिता को भी समझना होगा कि जिज्ञासा कोई गलती नहीं होती। उसे सही दिशा देना ही सही परवरिश है। लोग कुछ दिन बात करेंगे और आगे बढ़ जाएंगे, लेकिन जिस परिवार पर यह दुख गुजरा है, उसके जख्म इतनी आसानी से नहीं भरते।

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Ghaziabad Triple Suicide - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

क्या है पूरा मामला?
गाजियाबाद में एक दुखद घटना सामने आई, जहां 12, 14 और 16 साल की तीन बहनों ने अपनी बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। यह हादसा देर रात हुआ और घरवालों को इसकी भनक भी नहीं लगी। जब परिवार नीचे पहुंचा, तब तक बच्चियां गिर चुकी थीं। पुलिस जांच कर रही है कि तीनों ने ऐसा कदम क्यों उठाया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें मोबाइल पर काफी समय बिताती थीं और कोरियन कंटेंट, विदेशी पॉप कल्चर और ऑनलाइन वीडियो देखती थीं। पुलिस अब उनके फोन, चैट और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही है। यह घटना पूरे इलाके में सदमे का कारण बनी हुई है।

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