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Exclusive : सोशल मीडिया पोस्ट और हैशटैग से बदलाव नहीं आएगा, कृतिका कामरा बोलीं- खरीदने से बचेगा हैंडलूम

Fri, 07 Aug 2026 09:15 AM IST
Kiran Vinod Kumar Jain Kiran Vinod Kumar Jain
Updated Fri, 07 Aug 2026 09:15 AM IST
सार

Kritika Kamra Exclusive Interview On National Handloom Day: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस यानी नेशनल हैंडलूम डे 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन कई सेलेब्स और आम यूजर्स हैंडलूम को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया पोस्ट साझा करते हैं, लेकिन अभिनेत्री कृतिका कामरा मानती हैं कि सिर्फ पोस्ट डालकर बुनकरों की जिंदगी नहीं बदली जा सकती।

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Kritika Kamra Exclusive Interview On National Handloom Day 2026 Actress Talk About To Save Lives of Weavers
कृतिका कामरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला से खास बातचीत में कृतिका ने अपनी शादी की साड़ी से जुड़ी यादें साझा कीं। साथ ही बताया कि अभिनय के साथ-साथ वह हैंडलूम को बढ़ावा देने के लिए क्या कर रही हैं? 

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Kritika Kamra Exclusive Interview On National Handloom Day 2026 Actress Talk About To Save Lives of Weavers
कृतिका कामरा - फोटो : इंस्टाग्राम@kkamra

'शादी की साड़ी में सिर्फ धागे नहीं, मां का प्यार था'
शादी के दिन हैंडलूम साड़ी चुनने के पीछे क्या वजह थी? इस सवाल पर कृतिका का जवाब बेहद भावुक था। वह कहती हैं, 'ये मेरे लिए बहुत भावनात्मक फैसला था। मेरी शादी की साड़ी मां ने चंदेरी के कारीगरों के साथ मिलकर बनवाई थी। मैं हमेशा से ही अपनी शादी के दिन एक खास लाल रंग की साड़ी पहनना चाहती थी। उस शेड को ढूंढने में कई हफ्ते लगे। उसमें असली जरी का भी इस्तेमाल हुआ। जब वो साड़ी बनकर आई तो उसमें पहले से ही इतना काम और मां का इतना प्यार था कि मैं उसके अलावा कुछ और पहनने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी।’

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Kritika Kamra Exclusive Interview On National Handloom Day 2026 Actress Talk About To Save Lives of Weavers
कृतिका कामरा - फोटो : इंस्टाग्राम@kkamra

'प्यार से बनी चीजें अनमोल होती हैं' 
वहीं चंदेरी से अपना रिश्ता बयां करते हुए कृतिका बताती हैं कि उनका पैतृक घर चंदेरी से ज्यादा दूर नहीं। वह बचपन से ही वहां आती-जाती रही हैं। कृतिका कहती हैं, 'पहले चंदेरी जाना सिर्फ एक आउटिंग लगता था। लेकिन अब वहां जाकर समझ आता है कि एक हैंडलूम साड़ी बनाने के पीछे कितनी मेहनत और कितना सब्र होता है। आज सब कुछ बहुत जल्दी बन जाता है और जल्दी मिल जाता है। ऐसे समय में जो चीज समय देकर और प्यार से बनाई जाती है, उसका मोल ही अलग है। मेरे लिए तो वह अनमोल ही है। लॉकडाउन के दौरान मुझे लगा कि इस कला को और लोगों तक पहुंचना चाहिए।'

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Kritika Kamra Exclusive Interview On National Handloom Day 2026 Actress Talk About To Save Lives of Weavers
कृतिका कामरा - फोटो : इंस्टाग्राम@kkamra

'मुझे देखकर लोग हैंडलूम पहने तो वही मेरी जीत होगी'
क्या नई पीढ़ी हैंडलूम को अपना रही है? इस सवाल के जवाब में कृतिका कहती हैं, ‘बदलाव शुरू हो चुका है। युवाओं का हैंडलूम में रुझान बढ़ा है। सोशल मीडिया की वजह से लोगों को पता चल रहा है कि उनके कपड़े कहां से आते हैं और किसने बनाए हैं। लेकिन अभी भी हैंडलूम को शादी और त्योहारों से निकालकर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना होगा। मैं खुद कोशिश करती हूं कि रेड कार्पेट हो या कोई इवेंट, हैंडलूम पहनूं। अगर मुझे देखकर कुछ लोग भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में हैंडलूम पहनना शुरू करें तो मेरे लिए वही सबसे बड़ी जीत होगी।'

Kritika Kamra Exclusive Interview On National Handloom Day 2026 Actress Talk About To Save Lives of Weavers
कृतिका कामरा - फोटो : इंस्टाग्राम@kkamra

'सिर्फ पोस्ट करने से बदलाव नहीं आएगा'
आखिर में जब हमने पूछा कि नेशनल हैंडलूम डे पर हर साल इतने अभियान चलते हैं। क्या इनसे सचमुच बदलाव आता है? तो कृतिका बोलीं, 'ये बहुत अच्छा सवाल है। मैंने खुद भी अपने आप से ये पूछा था। सच तो यह है कि सिर्फ एक दिन पोस्ट कर देने या हैशटैग इस्तेमाल करने से बदलाव नहीं आने वाला। अगर हम सच में बुनकरों को मजबूत करना चाहते हैं तो हमें हैंडलूम आइटम खरीदने होंगे। बदलाव तभी आएगा, जब हम इसे खरीदकर बढ़ावा देंगे।'

 

Kritika Kamra Exclusive Interview On National Handloom Day 2026 Actress Talk About To Save Lives of Weavers
कृतिका कामरा - फोटो : इंस्टाग्राम@kkamra
‘बिजनेस अभी भी सीख रही हूं’  
अभिनेत्री होने के साथ ही कृतिका अब उद्यमी भी बन चुक हैं। दोनों में ज्यादा चुनौती किसमें है? इस पर कृतिका कहती हैं, 'एक्टिंग मेरा पहला प्यार है। मैं दिल से आर्टिस्ट हूं। बिजनेस हमारे परिवार में कभी किसी ने नहीं किया, इसलिए यहां हर दिन कुछ नया सीखना पड़ता है। हमने कभी यह नहीं सोचा कि कंपनी बनाएंगे और फिर उसे बेच देंगे। हमारा उस क्राफ्ट और उस जगह से लगाव है। लेकिन अगर बिजनेस चलेगा नहीं तो हम बुनकरों की मदद भी नहीं कर पाएंगे। इसलिए कलाकार और उद्यमी, इन दोनों के बीच संतुलन बनाना सबसे मुश्किल है।'
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