Exclusive: 'प्रियंका चोपड़ा से उड़ना सीखा..'; मिस वर्ल्ड 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी निकिता पोरवाल
Nikita Porwal Exclusive interview: मिस वर्ल्ड 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहीं निकिता पोरवाल ने अमर उजाला से अपनी तैयारियों, मां के भरोसे, कविताओं के शौक, प्रियंका-ऐश्वर्या से मिली प्रेरणा और एक्टिंग के सपने पर खुलकर बात की।
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मिस वर्ल्ड का मंच जितना चमकदार नजर आता है, वहां तक पहुंचने का सफर उतना ही कठिन होता है। इसके पीछे महीनों की तैयारी, अनुशासन और लगातार खुद को बेहतर बनाने की चुनौती छिपी होती है। फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2024 निकिता पोरवाल इन दिनों इसी तैयारी में जुटी हैं।
कभी सुबह जल्दी उठने से बचने वाली निकिता आज कई बार रात के दो बजे मेकअप शुरू करती हैं और सुबह चार बजे तक तैयार हो जाती हैं। उनका कहना है कि देश का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी ने उनकी पूरी दिनचर्या बदल दी है।
'ताज सिर पर रखा... लेकिन आंखों के सामने सिर्फ तिरंगा था'
निकिता के लिए फेमिना मिस इंडिया का ताज किसी निजी उपलब्धि से कहीं बढ़कर था। वह कहती हैं, 'बहुत खुशी हुई, क्योंकि हमेशा से सपना था कि जिंदगी में कुछ ऐसा करूं, जहां मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिले। जब फेमिना मिस इंडिया का ताज मेरे सिर पर सजा, तो सबसे पहला ख्याल यही आया कि अब मुझे मिस वर्ल्ड में अपने देश को रिप्रेजेंट करने का मौका मिलेगा। मेरे लिए वही सबसे बड़ा एहसास था। ताज जीतने की खुशी अपनी जगह थी, लेकिन उससे भी बड़ी खुशी यह थी कि अब दुनिया के सबसे बड़े मंच पर मैं भारत का नाम लेकर खड़ी होऊंगी।'
'लोगों को सिर्फ ताज दिखता है... हमें हर दिन वही रूटीन दोहराना पड़ता है'
मिस वर्ल्ड की तैयारियों को लेकर निकिता कहती हैं कि इस सफर का सबसे अहम हिस्सा लगातार एक जैसी मेहनत करते रहना है। 'देखिए, कोई एक जादुई चीज नहीं होती। मिस वर्ल्ड की पूरी तैयारी कंसिस्टेंसी पर टिकी होती है। हर दिन वही रूटीन... वही मेहनत... वही डेडिकेशन। एक-दो दिन नहीं, बल्कि महीनों तक। यही सबसे मुश्किल हिस्सा है। लोग बाहर से सिर्फ रैंप वॉक और खूबसूरत गाउन देखते हैं, लेकिन उसके पीछे रोज खुद को उसी अनुशासन के साथ दोबारा तैयार करना पड़ता है। मुझे लगता है कि यही सबसे अनोखी चीज है, जो मैं इन दिनों कर रही हूं।'
'रात के दो बजे मेकअप... सुबह चार बजे तैयार; छोटी वाली निकिता मुझे देखकर हंस पड़ती'
निकिता मानती हैं कि पिछले एक साल में उनके भीतर सबसे बड़ा बदलाव अनुशासन का आया है। 'मुझे सुबह जल्दी उठने में बहुत परेशानी होती थी। मैं बिल्कुल मॉर्निंग पर्सन नहीं थी। लेकिन मिस इंडिया बनने के बाद एहसास हुआ कि जब आप एक नेशन को रिप्रेजेंट करते हैं, तब आपका अपना टाइम मायने नहीं रखता। जिम्मेदारियां आपकी सुविधा से कहीं बड़ी हो जाती हैं।'
वह आगे कहती हैं, 'आज कभी-कभी ऐसा होता है कि रात के दो बजे मेकअप शुरू करना पड़ता है और सुबह चार बजे तक पूरी तरह तैयार रहना होता है। अगर कोई छोटी वाली निकिता से कहता कि एक दिन तुम ऐसा करोगी, तो वह शायद सामने वाले पर कभी विश्वास ही नहीं करती। लेकिन आज की निकिता यह सब कर लेती है... और खुशी-खुशी करती है। क्योंकि अब यह सिर्फ मेरे बारे में नहीं है, यह मेरे देश के बारे में है।'
'रैंप वॉक से ज्यादा वक्त किताबों के साथ गुजरता है'
निकिता के मुताबिक, मिस वर्ल्ड की तैयारी सिर्फ रैंप वॉक और फिटनेस तक सीमित नहीं होती। 'मेरा पूरा दिन अलग-अलग ट्रेनिंग से भरा रहता है। रैंप वॉक, कम्युनिकेशन ट्रेनिंग, हेयर और मेकअप प्रैक्टिस तो होती ही है, लेकिन उसके साथ बहुत ज्यादा पढ़ाई भी करनी पड़ती है। अलग-अलग विषयों पर पढ़ना, लोगों से मिलना, इवेंट्स अटेंड करना, अलग-अलग संस्कृतियों को समझना... ये सब हमारी तैयारी का हिस्सा होता है। एक अच्छा मिस वर्ल्ड डेलिगेट सिर्फ सुंदर नहीं दिखता, बल्कि दुनिया के सामने अपने देश की संस्कृति और सोच को भी पेश करता है।'
'जब कैमरे बंद हो जाते हैं... मैं कविताएं लिखती हूं'
ग्लैमर की दुनिया से इतर निकिता अपने खाली समय में परिवार के साथ रहना और लिखना पसंद करती हैं। वह कहती हैं, 'अगर मेरी कोई प्रोफेशनल कमिटमेंट नहीं होती, तो मैं अपना ज्यादातर समय परिवार के साथ बिताती हूं। मुझे लिखना बहुत पसंद है। मैं कविताएं लिखती हूं। लिखना मेरे लिए थेरेपी की तरह है। जब भी मुझे थोड़ा 'मी टाइम' चाहिए होता है, मैं लिखने बैठ जाती हूं। वही मुझे सबसे ज्यादा सुकून देता है।'
'मुझे खुद पर जितना भरोसा नहीं था... उससे ज्यादा मेरी मां को था'
निकिता मानती हैं कि उनके सफर में ऐसे कई मौके आए, जब उन्हें खुद पर संदेह हुआ। 'ऐसे बहुत सारे मोमेंट आए। आखिर 60 साल के फेमिना मिस इंडिया के इतिहास में मध्य प्रदेश से पहले कोई राष्ट्रीय विजेता नहीं बनी थी। इसलिए कई बार लगता था कि क्या पता इस बार भी नहीं हो पाएगा। मन में बहुत सारे डाउट आते थे। लेकिन हर बार मेरी मां मेरे आत्मविश्वास से भी बड़ी ताकत बनकर खड़ी रहीं। उस समय मेरी मां ने मुझे ऐसा भरोसा दिया, जो शायद मुझे खुद पर भी नहीं था। उन्होंने कभी मुझे हार मानने नहीं दी। अगर आज मैं यहां तक पहुंची हूं, तो मिस इंडिया बनने का सबसे बड़ा श्रेय मैं अपनी मां को देती हूं।'
'प्रियंका ने उड़ना सिखाया... ऐश्वर्या ने जड़ों से जुड़े रहना'
प्रेरणा की बात आती है, तो निकिता सबसे पहले प्रियंका चोपड़ा और ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम लेती हैं 'प्रियंका चोपड़ा मुझे बहुत पसंद हैं। एक मॉडल से बॉलीवुड, फिर हॉलीवुड तक उन्होंने जिस तरह अपनी पहचान बनाई, वह वाकई प्रेरणादायक है। उन्होंने कभी रुकना नहीं सीखा। वह लगातार आगे बढ़ती रहीं। मुझे उनकी यही बात सबसे ज्यादा पसंद है।'
वहीं, ऐश्वर्या राय बच्चन को लेकर वह कहती हैं, 'ऐश्वर्या जिस तरह पूरी दुनिया में भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं, वह मुझे बहुत प्रेरित करता है। वह जहां भी जाती हैं, अपनी भारतीय पहचान को कभी पीछे नहीं छोड़तीं। आधुनिक होने के बावजूद अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहना उनसे सीखा जा सकता है।'
'मिस वर्ल्ड के बाद अगर कोई सपना है... तो वह कैमरे के सामने खड़े होने का है'
निकिता के लिए ब्यूटी पेजेंट मंजिल नहीं, बल्कि सफर का एक पड़ाव है। उनका कहना है कि एक्टिंग हमेशा से उनका सपना रहा है। 'मैं हमेशा से एक्टिंग करना चाहती थी। मैंने थिएटर में पढ़ाई की है और अभिनय से मेरा रिश्ता बहुत पुराना है। अगर मुझे अच्छी एक्टिंग का अवसर मिलती है, तो मैं जरूर फिल्मों में काम करना चाहूंगी।'
'किच्चा सुदीप के साथ स्क्रीन शेयर करना चाहती हूं'
पसंदीदा अभिनेता के बारे में पूछने पर निकिता ने बिना देर किए किच्चा सुदीप का नाम लिया। 'मैं किच्चा सुदीप की बड़ी फैन हूं। अगर कभी उनके साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला, तो वह मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा होगा।'
'मेरे लिए मिस वर्ल्ड सिर्फ ताज नहीं... लोगों की जिंदगी बदलने का मंच है'
निकिता इस बार मिस वर्ल्ड में अपने 'ब्यूटी विद ए पर्पज' प्रोजेक्ट 'माटी' के साथ उतरेंगी। इस पहल की प्रेरणा उन्हें देश के आदिवासी इलाकों की यात्राओं के दौरान मिली। वह कहती हैं, 'जब मैं आदिवासी इलाकों में गई, तो महसूस हुआ कि वहां की महिलाओं और बच्चों के पास हुनर और सपने तो हैं, लेकिन अवसर नहीं हैं। वहीं से 'माटी' का जन्म हुआ। मेरा प्रयास है कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिले, लेकिन उनकी संस्कृति और पहचान भी बनी रहे। अगर मिस वर्ल्ड का मंच किसी एक गांव की बेटी की जिंदगी बदलने में भी मेरी मदद कर सके, तो मेरे लिए वही सबसे बड़ी जीत होगी।'