Interview: अभय वर्मा ने बताये अपनी आजादी के मायने, देश पर की बात, जानें क्या बोले एक्टर
Abhay Verma Interview: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अभिनेता अभय वर्मा ने अमर उजाला के साथ खास बातचीत की। उन्होंने इस राष्ट्रीय पर्व से जुड़ी अपने बचपन की यादों को भी साझा किया।
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एक्टर ने कहा आज पीछे मुड़कर देखता हूं
अभय ने कहा, 'स्कूल की बहुत याद है। हम कुछ बच्चे मिलकर स्किट तैयार करते थे, छोटा सा नाटक करते थे और 'वंदे मातरम' गाते थे। उस वक्त एक अलग ही अहसास होता था इस देश में होने और यहां रहने का। उससे भी बड़ी बात ये थी कि हम साथ मिलकर कुछ अचीव कर पा रहे हैं। आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि वही बात शायद अब भी मेरे साथ है। मुझे लगता है कि अगर हम साथ में हों तो कुछ भी अचीव कर सकते हैं।
'मैं यंग जेनरेशन का हिस्सा हूं और भारत का नागरिक भी हूं'
अभय ने 'फ्रीडम' का मतलब समझाते हुए कहा, 'मेरे लिए तो ये तीनों ही हैं, लेकिन फेलियर से न डरना बहुत जरूरी है। मैं यंग जेनरेशन का हिस्सा हूं और भारत का नागरिक भी हूं। मुझे लगता है कि हम जो कर्म करते हैं, वो वापस जरूर आते हैं। मैं कर्म में बहुत बिलीव करता हूं। जैसा मैं करूंगा, मुझे वैसा ही मिलेगा।'
इसके आगे वह बोले, 'अगर हम खुद को एक-दूसरे की जगह रखकर देख लें तो शायद गलत काम करने से बचेंगे। मैं चाहता हूं कि हमारा देश आगे बढ़ता रहे। मुझे लगता है अपना देश सबसे सुंदर देश है। यहां सब मौसम हैं, सब कल्चर हैं, रिश्ते निभाने के लिए त्योहार हैं, सब कुछ है। मैं तो चाहता हूं कि लोग पूरा वर्ल्ड घूमकर आएं और फिर उन्हें एहसास होगा कि हम कितनी सुंदर जगह रहते हैं।'
'ग्रास इज ऑलवेज ग्रीन ऑन द अदर साइड'
अभय ने आजादी के बारे में बात करते हुए कहा, 'एक चीज से आजादी लेनी है तो वो ये विश्वास है कि हमें कम मिला और दूसरे को ज्यादा मिला। एक्टर हो, कोई क्रिएटिव हो या किसी भी लाइन में हो, हम कभी-कभी दूसरों की जिंदगी देखकर खुद को कंपेयर करने लग जाते हैं। 'ग्रास इज ऑलवेज ग्रीन ऑन द अदर साइड' वाली बात होती है न।लेकिन ऊपर वाले ने जो रोशनी हमारे अंदर दी है, वो सबके अंदर नहीं दी। हर इंसान के अंदर एक ऐसी रोशनी है, जो यूनिक है। मुझे लगता है कि हमें इस विश्वास से हमेशा के लिए आजाद होना चाहिए कि हमें कम मिला और दूसरे को ज्यादा मिला। हर चीज का अपना समय होता है और हर चीज सही समय पर आकर सिखाकर जाती है। बस किसी और की जर्नी देखकर ये मत सोचिए कि यार, उसको जल्दी मिल गया, मुझे अभी तक नहीं मिला। वरना बहुत दुखी हो जाएंगे हम।'
'पहचान बनाना ही आजादी'
अभय वर्मा ने कहा, 'मेरे लिए अपनी पहचान बनाना भी एक तरह की आजादी है। लाखों-करोड़ों लोग मुंबई आते हैं। मैं जब पानीपत से निकला और मुंबई पहुंचा, आधा तो आजाद मैं तभी हो गया था। फिर यहां ऐसे मौके मिले, जिनके बारे में पानीपत में सोच भी नहीं सकता था। शाहरुख सर का 'बेटा, बहुत अच्छा लगा' कहना या किसी बड़े डायरेक्टर का मेरे काम की तारीफ करना, मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। उन लोगों से मिलना, उनके साथ काम करना, जिनके बारे में मैंने पानीपत में सोचा भी नहीं था, मेरे लिए आजादी को और महसूस करने जैसा है।अब मैं धीरे-धीरे आजाद हो रहा हूं। अपने काम से मिलने वाला प्यार मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है और मैं इस आजादी की कदर करना चाहता हूं।'
'हमारे देश को लेकर भी मैं थोड़ा अलग सोचता हूं'
सोशल मीडिया और देश को लेकर अपना सोच बताते हुए अभय ने कहा, 'देखिए, कोई भी चीज अपने आप में बुरी नहीं है। मेरी मम्मी हमेशा कहती हैं न- अति बहुत ही... तो सोशल मीडिया हो, कंपेरिजन हो या एक्सपेक्टेशन, बात ये है कि हम उसे अपने ऊपर कितना हावी होने देते हैं। अगर आप हर वक्त यही सोचेंगे कि उसकी फोटो पर इतने नंबर आए, उसे इतना मिल गया, मुझे क्यों नहीं मिला, तो स्ट्रेस तो होगा ही। लेकिन जब आप अपने सपने के लिए लड़ना शुरू करते हैं, तो वही चीज मेहनत और जुनून में बदल जाती है। और हमारे देश को लेकर भी मैं थोड़ा अलग सोचता हूं। लोग कहते हैं कि पॉपुलेशन बहुत है, इसलिए दिक्कतें बहुत हैं। मुझे लगता है यही हमारी सबसे बड़ी ताकत भी है। इतनी बड़ी संख्या में लोग हैं, बस उन्हें सही दिशा में ले जाना आना चाहिए। हमें असल और नकल में फर्क समझना भी जरूरी है।'
'एक्टर ने कहा आजादी के लिए बहुत लोगों का बलिदान'
मुझे लगता है कि आज हम जो भी कर पा रहे हैं, उसके पीछे बहुत से लोगों का बलिदान है। इसलिए अपनी जिंदगी में जो आजादी हमें मिली है, उसकी कदर करना भी जरूरी है। हम अपनी बात कह पा रहे हैं, अपने सपनों के पीछे जा पा रहे हैं, घूम पा रहे हैं, अलग-अलग कल्चर को जान पा रहे हैं। ये सब बहुत बड़ी बात है।
'उनकी बेटी राशा से मिलना भी मेरे लिए बहुत खास था'
एक्टर अभय वर्मा ने आगे अमर उजाला से बातचीत में कहा, 'बहुत बार एक्टर अपना हीरो पहले से चुनकर आता है, लेकिन मेरे साथ उल्टा हुआ। इस सीरीज के जरिए मुझे अपना हीरो बाद में चुनने का मौका मिला- राजपाल सिंह धालीवाल के नाम से। उनकी बेटी राशा से मिलना भी मेरे लिए बहुत खास था। हम बहुत रोए। उनकी आंखों में पानी था और मुझे लगा कि कुछ बातें शब्दों से नहीं, आंखों से हो रही हैं। वो मुझे 'दादा भैया' कह रही थीं। जब उन्होंने कहा, 'आपने मुझे पापा की याद दिलाई', तो बस... ये बात मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। हम यहां बैठकर आराम से बात कर रहे हैं और हमारे जवान वहां खड़े हैं, ताकि हम अपनी जिंदगी जी सकें। वो मेरे लिए रियल हीरो हैं।'
ये चक्कर ही आजादी का है, इसे महसूस करने का भी
अभय वर्मा ने अपने करियर पर बात करते हुए कहा, कहीं भी उतना आजाद फील नहीं करता, जितना मैं यहां करता हूं। पूरा ये चक्कर ही आजादी का है, इसे महसूस करने का भी। परफॉर्मिंग में है, अदाकारी में है, कलाकारी में है।
मैंने अपने लिए सिर्फ एक ही सपना देखा है- एक्टर बनने का। बचपन में पायलट बनने का सपना था, जो भगवान ने पूरा कर दिया। लेकिन एक्टर बनने का सपना मैंने देखा था। और अब मैं धीरे-धीरे आजाद हो रहा हूं।