सुरों की दुनिया से सिनेमा जगत तक का सफर, फिल्म ‘ओ रोमियो’ में अभिनय का अनुभव राहुल देशपांडे ने किया साझा
Rahul Deshpande Exclusive Interview: क्लासिकल म्यूजिक की दुनिया में राहुल देशपांडे एक जाना-माना नाम हैं। हाल ही में वह फिल्म ‘ओ रोमियो’ में एक ग्रे शेड किरदार निभाते नजर आए। इस किरदार में खूब तारीफ हासिल की। आखिर कैसे उन्होंने संगीत की दुनिया से सिनेमा जगत तक का सफर तय किया। अमर उजाला से खास बातचीत में अपने करियर को लेकर कई बातें राहुल देशपांडे ने साझा की हैं।
विस्तार
राहुल देशपांडे क्लासिकल म्यूजिक की दुनिया से निकलकर अचानक बड़े पर्दे पर एक सख्त और रहस्यमयी किरदार के रूप में नजर आए। यह देखकर कई लोग चौंक गए। राहुल देशपांडे के लिए यह बदलाव जितना अप्रत्याशित है, उतना ही दिलचस्प भी। शाहिद कपूर की फिल्म ‘ओ रोमियो’ में उन्होंने खलनायक जयंत पाटरे का किरदार निभाया। फिल्म में अपने किरदार, म्यूजिक और आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर राहुल देशपांडे ने काफी कुछ बताया है।
किरदार मुश्किल नहीं था लेकिन चुनौती असली थी
राहुल देशपांडे संगीत की सुर साधते हुए अभिनय के रंगमंच पर कैसे आए? क्या फिल्म ‘ओ रोमियो’ का किरदार निभाना मुश्किल काम था? पूछने पर राहुल देशपांडे कहते हैं, ‘यह मुश्किल नहीं था लेकिन चुनौतीपूर्ण जरूर था। यह किरदार मेरे व्यक्तित्व के बिल्कुल उलट है। लेकिन यही बात इसे चुनौतीपूर्ण और दिलचस्प बनाती है। मुझे इस किरदार के बैकग्राउंड पर काम करना था। निर्देशक विशाल भारद्वाज जी ने इस किरदार यानी जयंत पाटरे की पृष्ठभूमि के बारे में मुझसे बहुत पहले बात की थी। मैंने भी अपना रिसर्च वर्क इस किरदार को लेकर अच्छे से किया।'
राहुल आगे कहते हैं, ‘मैं लंबे समय से थिएटर से जुड़ा हूं। मराठी म्यूजिकल्स प्ले को पुनर्जीवित करता रहा हूं। मैंने कई तरह के किरदार निभाए हैं।’’
राहुल देशपांडे की संगीत से जुड़ी हैं जड़ें
राहुल देशपांडे चाहे ‘ओ रोमियो’ में अभिनय करके छा गए हों लेकिन उनकी जड़ें संगीत से जुड़ी हैं। इसी संगीत ने ही उनके लिए सिनेमा के दरवाजे खोले हैं। वह कहते हैं, ‘सुरों की दुनिया ने ही मुझे इस सिनेमा की दुनिया तक पहुंचाया। यही वजह है कि विशाल जी ने मुझे चुना। मैं क्लासिकल म्यूजिक बैकग्राउंड से आता हूं। इससे मुझे अभिनय करने में भी बहुत मदद मिली। मुझे लगता है कि विशाल जी ने मेरे लिए ‘ओ रोमियो’ का किरदार इसी आधार पर बनाया।'
बॉलीवुड में मेलोडी कम है
बॉलीवुड संगीत को लेकर भी राहुल देशपांडे अपनी राय रखते हैं। वह कहते हैं, ‘फिल्म ‘ओ रोमियो’ का साउंडट्रैक दिखाता है कि बॉलीवुड संगीत कैसा हो सकता है। विशाल भारद्वाज जी ने जो धुनें बनाईं, उनमें जो खामोशी है, वह बहुत खूबसूरत है। फिल्म में आइटम नंबर भी हैं, लेकिन जो गाने मुझे छूते हैं, वे सिंगर अरिजीत ने गाए हैं। मुझे लगता है कि मेलोडी आज भी हर इंसान के दिल में खास जगह रखती है। बस वही बात आज के बॉलीवुड संगीत में थोड़ी कम हो गई है। लेकिन विशाल जी जैसे निर्देशक और संगीतकार सच में बताते हैं कि संगीत कैसा होना चाहिए और कैसे बनाया जाना चाहिए।'
अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट्स को लेकर राहुल देशपांडे कहते हैं, ‘मैं ऐसा किरदार करना चाहूंगा जिसकी जिंदगी में संगीत हो, जिसका संबंध संगीत से हो। यह मेरे दिल के बहुत करीब है। मैं इंडियन क्लासिकल, हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक से जुड़ा हूं। मैंने म्यूजिकल्स प्ले किए, अलग-अलग लोगों के साथ काम किया। लेकिन मेरा मूल यानी संगीत नहीं बदला। मेरे गुरु की सीख और लोगों का साथ हमेशा जमीन से जोड़े रखता है।'
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