सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Celebs Interviews ›   Yashpal Sharma Interview With amarujala Actor Talks About his Movies Lagaan Gangaajal Role and Career

अभिनेता यशपाल को कैसे मिली थी 'लगान'? आशुतोष गोवारिकर ने तीन घंटे सुनाई थी स्क्रिप्ट; ऐसे हुई फीस की बात

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Raghav Updated Tue, 24 Mar 2026 09:25 AM IST
विज्ञापन
सार

Yashpal Sharma Exclusive Interview: चर्चित अभिनेता यशपाल शर्मा ने हाल ही में अमर उजाला के साथ खास बातचीत में अपने करियर से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। कई चर्चित किरदारों की तैयारी को लेकर बात की। पढ़िए कुछ अंश...

Yashpal Sharma Interview With amarujala Actor Talks About his Movies Lagaan Gangaajal Role and Career
यशपाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

अभिनेता यशपाल शर्मा ने 'लगान', 'गंगाजल', 'अब तक छप्पन', 'अपहरण', 'सिंह इज किंग' और 'राउडी राठौड़' जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया है। वे कई टेलीविजन सीरियल में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ चुके हैं। हाल ही में उन्होंने अपने अभिनय करियर से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए। जानिए

Trending Videos

किरदार में किस तरह ढलते हैं, क्या प्रक्रिया है?
यशपाल शर्मा: 'इसके लिए यशपाल शर्मा को भूलना पड़ता है। स्क्रिप्ट बता देती है कि क्या करना है? तलवार उठाने की जरूरत नहीं पड़ती, सिर्फ सुई धागे से काम चल जाता है। हर कलाकार को बस इतना ही करना होता है, उस स्थिति में किरदार में रहें। यह नुस्खा अपना लेने पर काम आसान हो जाता है। इसके बाद आप अपनी मेहनत, ऑरनामेंटेशन बहुत कुछ कर सकते हैं। लेकिन, 50 प्रतिशत तो 'बी देयर' होता है। मैं यही करता हूं।

किसी किरदार को निभाने के लिए आसपास के लोगों को ऑब्जर्व करते हैं? पहली बार जब स्क्रिप्ट आती है तो क्या करते हैं?
यशपाल शर्मा: 'नहीं एकदम से ऐसा नहीं होता कि आज मैं ऑब्जर्व करूंगा। ऐसा करने से नहीं होता, खुद हो जाता है। वह अनुभव होता है। मेरा बचपन ऐसी कॉलोनी में गुजरा है, जहां हिमाचल, बिहार, राजस्थान, डोंगरी, हरियाणा और पंजाब के लोग भी थे। चपरासियों की कॉलोनी थी। वहां मेरे वो जो कॉलेज तक के साल बीते, वह सबसे बड़ी ट्रेनिंग थी। वैसी ट्रेनिंग कोई नहीं दे सकता'।

विज्ञापन
विज्ञापन

Yashpal Sharma Interview With amarujala Actor Talks About his Movies Lagaan Gangaajal Role and Career
यशपाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला

हर वो सीन जिसमें आपकी बेबसी, गुस्सा और लालच भी आ जाता है। खासकर 'राउडी राठौर' का वह सीन, जिसमें बच्चे पास हैं..., चेहरे पर बेबसी है और कुछ नहीं कर सकते, यह कैसे होता है?
यशपाल शर्मा: 'राइटिंग सबसे बड़ी चीज है। फिर डायरेक्शन। इस सीन का श्रेय मैं प्रभु देवा को देता हूं, क्योंकि मुझे यकीन नहीं था। किरदार को लेकर मैं सोच रहा था, कैसा व्यक्ति है यार, इतना कोई गिरता है क्या? उसकी वाइफ विलेन ने पकड़ रखी है। दोनों बच्चे हैं। इतनी भी क्या बेबसी। लेकिन, प्रभु देवा ने बोला कि नहीं। मैंने कहा मुझे देखने तो दो एक बार। बोले नहीं, तुम्हें हां बोलना है बस। मैं कहता हूं, 'ठीक है बापजी'। उस सीन में बेबसी की पराकाष्ठा है'। 

कई बार एक्टर का मन होता है कि ऐसा करना चाहिए और डायरेक्टर कुछ और कहता है। ऐसे में इस टकराव में कैसे करते हैं?
यशपाल शर्मा: 'कई बार ऐसा होता है कि डायरेक्टर बहुत स्ट्रॉन्ग नहीं है। हम ऐसे में कुछ कहते हैं तो वह सलाह डायरेक्टर को भी बेहतर लग रही होती है। वहीं, दूसरी तरफ स्क्रिप्ट स्ट्ऱॉन्ग है और जो उसमें है, वही कर दो तो उसी में खेल हो जाता है। 'गंगाजल' में दोनों चीजें थीं। स्क्रिप्ट भी अच्छी थी। साथ ही 50 प्रतिशत मैंने इम्प्रोवाइज किया था। 'गंगाजल' में मेरा कोई रोल नहीं था। बस इतना था कि वह पीछे-पीछे चल रहा है। मगर, फिर मेरा कैरेक्टर धीरे-धीरे हर सीन में निकलता रहा। हम उसे करते रहे और फिर प्रकाश झा साहब ने निकाल दिया। 

आपको फिल्म 'लगान' कैसे मिली?
यशपाल शर्मा: 'यह फिल्म ऑडिशन देकर मिली। फोन तो थे नहीं। पेजर था। 1999 की बात है। मैंने उस नंबर पर फोन किया। मुझे अगले दिन बुलाया गया कि आशुतोष गोवारिकर मिलना चाहते हैं। मैं अगले दिन गया तो आशुतोष जी ने स्क्रिप्ट सुनाई। पूरे साढ़े तीन घंटे तक घूम-घूमकर उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट सुनाई। मुझे पता चला कि लाखा का रोल है। मैं सोच भी रहा था कि लाखा का रोल बढ़िया है। पता लगा कि इसी रोल के लिए उन्होंने कहा था। मैंने कहा, यह तो मुझे मुंह मांगा मोती मिल गया। उन्होंने कहा कि अभी मिला नहीं है, अभी ऑडिशन देना पड़ेगा। अगले दिन आमिर खान के घर पर ऑडिशन देने आ जाओ। मैं अगले दिन गया और ऑडिशन दिया। मैं वहां निकला ही था कि मेरे पास पेजर पर मैसेज आ गया कि आप सलेक्ट हो गए। फिर प्रोड्यूसर रीना दत्ता (आमिर खान की एक्स वाइफ) से मिलने भेजा गया। तब पूरे रास्ता मैं सोचता रहा कि कितना पैसा मांगू। फिर सोचा कि एक लाख रुपये मांग लेता हूं। देखा जाएगा। जिंदगी में आगे बढ़ना है। रकम ज्यादा लगी तो 80 हजार और 60 हजार मांगने पर सोचा। वहां पहुंचा तो रीना दत्ता ने कहा कि देखो यशपाल हमारा बजट ज्यादा नहीं है। डेढ़ लाख रुपये दे रहे हैं हम। तब मेरे मुंह से निकल गया कि नहीं मैडम दो लाख तो होना चाहिए। इतना बड़ा रोल है। वो बोलीं अच्छा ठीक है साइन कर दो। मैंने सोचा कि गलती मेरे से हुई है या दोनों तरफ से हुई है। वह मेरा बेस्ट फैसला था। वह अब तक का मेरा बेस्ट प्रोडक्शन था।

Yashpal Sharma Interview With amarujala Actor Talks About his Movies Lagaan Gangaajal Role and Career
यशपाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला

'गंगाजल' में आपने क्या इम्प्रोवाइज किया? क्या तैयारी की?
यशपाल शर्मा: मैं अपनी वाइफ प्रतिभा के साथ मिलने गया प्रकाश जी (निर्देशक प्रकाश झा) से तो उन्होंने बताया कि ऐसे-ऐसे एक रोल है। विलेन के बेटे का। मैंने कहा कि ठीक है। तब कुछ काम नहीं था। उन्होंने जो पैसे बताए तो मेरी वाइफ प्रतिभा की हंसी निकल गई एकदम। प्रकाश जी ने ऐसे देखा। मैंने कहा कि ठीक है मैं करूंगा। मुझे स्क्रिप्ट चाहिए। वो बोले कि स्क्रिप्ट तो मैं अजय देवगन को भी नहीं देता। मैंने कहा कि यहां पढ़ सकता हूं। वो बोले, 'हां यहां ऑफिस में पढ़ सकते हैं'। मैंने दो घंटे रुककर स्क्रिप्ट पढ़ी। इतने में समझ गया कि इस किरदार में पोटेंशियल है। वही हमने किया। लेकिन ऐसी स्थिति में डायरेक्टर भी समझदार होना चाहिए। इस किरदार में काफी चीजें इम्प्रोवाइज है। इसमें सबकुछ इम्प्रोवाइज है'।

'अपहरण' का भी आपका किरदार बहुत कमाल है। क्या तैयारी की थी?
यशपाल शर्मा: 'फिल्म 'अपहरण' और 'अब तक छप्पन' ये मेरी अब तक की फेवरेट फिल्में हैं। 'अपहरण' में सेम डायरेक्टर और सेम टाइप की स्क्रिप्ट। लेकिन, फिर भी दोनों किरदार में काफी कुछ अलग था। 'अपहरण' में कई चीजें ऐसी थीं, जिसने चार चांद लगा दिए। स्क्रिप्ट ही सबकुछ बोल देती है। स्क्रिप्ट ही बोलती है। मेरा काम तो उसमें आधा ही है।

'अब तक छप्पन' आपकी फेवरेट रही। राम गोपाल वर्मा के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
यशपाल शर्मा: 'वह फेक एनकाउंटर करके आया है। सिर्फ गिनती बढ़ाने एनकाउंटर। वह हाथ धो रहा है और कह रहा है 48 हो गए। वह कितनी चीजें नहीं बोल रहा है। कई बार डायलॉग बोलने के बाद जब पॉज आता हो तो वह पॉज काफी कमाल कर जाता है। यह किरदार ही बोलता है। राम गोपाल वर्मा तो फिल्म के प्रोड्यूसर थे। उन्होंने एक दो सीन डायरेक्ट किए था। मेरी डेथ वाला सीन डायरेक्ट किया था। मेरे पास एक फोन आया था कि एक फिल्म बन रही है। नाना पाटेकर का कमबैक है। 

आप कॉमेडी में खुद को कैसे देखते हैं। किस तरह आप खुद को ढाल पाए?
यशपाल शर्मा: 'वेलकम टू सज्जनपुर', 'सिंह इज किंग' यही फिल्में हैं। कॉमेडी नाटक ज्यादा हैं। मेरी कॉमेडी का बॉलीवुड ने तो कुछ किया ही नहीं है। मैंने 'बड़े न खेले छोटे खेल' नाटक किया था। तीन घंटे का नाटक था और लीड रोल था। मैं तीन घंटे स्टेज पर था। मैं और मुकेश तिवारी डबल कास्ट में थे। पौने तीन घंटे हमने लोगों को हंसाया। लास्ट के 13 मिनट रुलाया और फिर दो मिनट हंसाया। उन चीजों को तो किसी ने बॉलीवुड में यूज ही नहीं किया। एक सीरियल था मेरा 'नीली छतरी वाले'। उसमें काम करके मुझे बहुत अच्छा लगा। इसमें मेरे कैरेक्टर के साथ ही पूरी कहानी चलती है'।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed