Diljit Dosanjh: ‘फिल्म घर-घर पहुंच चुकी है, यही मकसद था’, 'सतलुज' पर बैन लगने पर बोले दिलजीत दोसांझ
Satluj Movie Banned: दिलजीत दोसांझ ने अपनी नई फिल्म 'सतलुज' के ओटीटी से हटाए जाने पर अपने विचार साझा किए हैं। इससे पहले उन्होंने एक पोस्ट के जरिए इस मामले पर रिएक्शन दिया था।
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यहां पढ़ें फिल्म सतलुज का रिव्यू: Satluj Movie Review: रूह कांप जाए इतना सच दिखाती है फिल्म; दिलजीत ने जीता दिल, 'धुरंधर’ वाले सुविंदर ने डराया
दिलजीत दोसांझ ने कहा 'मुझे खुशी है कि जितनी मेहनत हमने की थी कि जो नया यूथ है, वो फिल्म की बात भी कर रहा है। एक वीडियो देखा उसमें गुरुद्वारे में हमारी फिल्म दिखाई जा रही है। आज घर-घर जसवंत सिंह खालरा जी की चर्चा हो रही है। बस यही मकसद था। जो होना था हो गया। तीन दिन में कई लोगों ने यह फिल्म देख ली अब बैन कर देने से कोई फर्क नहीं होगा। मुझे बहुत तसल्ली है, हमारी चार साल की मेहनत पूरी हो गई। कई लोगों ने डाउनलोड कर ली है।'
उन्होंने आगे कहा 'हमें पता ही था कि यह होगा। फिल्म हटा दी जाएगी। हमें लगा संडे को सब अपने परिवार के साथ देखेंगे उन्होंने उससे पहले ही इसे हटवा दिया। समझ नहीं आ रहा ऐसा क्यों किया गया। सिर्फ 2 दिन में ही फिल्म ने इतनी चर्चा पा ली। अब आपके डिलीट करने से कुछ नहीं होना।'
अभिनेता ने आगे कहा 'फिल्म की शूटिंग करते हुए भी हमें काफी तकलीफ हुई। 15 दिनों तक फिल्म की शूटिंग करवा दी जाती थी। चार साल से हम लोग इसे रिलीज कराने पर मेहनत कर रहे हैं। मैं हनी पाजी (हनी त्रेहान) को सैल्यूट करता हूं कि उन्होंने इस फिल्म पर अपनी पूरी जिंदगी लगा दी।'
दिलजीत ने आगे कहा 'जितना आवाज दबाओगे, उतनी ही फिल्म चर्चा में आएगी। जसवंत सिंह खालरा जी की कुर्बानी आप ऐसे ही नहीं बर्बाद कर सकते। जब तक जिंदा रहूंगा हंसता ही मिलूंगा। पंजाब की मिट्टी में ही मोटिवेशन है।'
उन्होंने आगे कहा 'मैं इसलिए उदास नहीं हूं कि आपने फिल्म हटा दी। मैं ये देखकर उदास हूं कि हम इतने वर्षों से वहीं खड़े हैं। कैसे लोग हैं। इंसानियत नाम की चीज नहीं उनके अंदर। बाकी तो फिल्म ने दो दिन में ही अपना असर दिखा दिया। इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए, वो हटाई नहीं जा सकती।'
दिलजीत दोसांझ ने कहा 'मैं पॉलिटिशियन नहीं बन सकता। मैं हर इंसान से प्यार करता हूं और राजनीति तो तभी हो सकती है, जब लोगों को डराकर रखोगे। उनकी लड़ाईयां करवाकर रखोगे। वर्ना तो राजनीति हो ही नहीं सकती।'
फिल्म को ओटीटी से हटाए जाने पर दिलजीत दोसांझ ने कहा 'मैं अंधेरे को चुनौती देता हूं। जो सतलुज के साथ हुआ, वही शहीद जसवंत सिंह खालरा के साथ भी हुआ था।' उन्होंने फिल्म का एक सीन पोस्ट किया।
दरअसल 'सतलुज' एक एक्टिविस्ट के संघर्ष पर आधारित है, जिसने पंजाब में उग्रवाद के चरम पर होने के दौरान कथित तौर पर बिना कानूनी प्रक्रिया के की गई हत्याओं का सच सामने लाने की कोशिश की थी।