टॉम हैंक्स ने द्वितीय विश्व युद्ध को लेकर अपने लगाव के बारे में की बात, कहा- मैं इस बारे में सोच रहा हूं
Tom Hanks: टॉम हैंक्स ने दूसरे वर्ल्ड वॉर को लेकर अपने आकर्षण के बारे में बताया। जानिए उन्होंने क्या कुछ कहा…
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हॉलीवुड स्टार टॉम हैंक्स का द्वितीय विश्वयुद्ध से गहरा नाता है। उन्होंने इस ऐतिहासिक घटना पर आधारित कई ऑस्कर विजेता फिल्मों और लोकप्रिय टीवी सीरीज में एक्टिंग, निर्माण और निर्देशन किया है। उनका मानना है कि वो इस बात से जूझ रहे हैं कि वो द्वितीय विश्व युद्ध से कविता, सुकून और ज्ञान क्यों पाते हैं?
टॉम हैंक्स ने सेकेंड वर्ल्ड वॉर पर की बात
अभिनेता ने 1998 में स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म 'सेविंग प्राइवेट रायन' में अपने पहले ऐतिहासिक संघर्ष से जुड़े प्रोजेक्ट के बारे में बात की। तब से टॉम हैंक्स ने युद्ध पर आधारित मिनी सीरीज 'बैंड ऑफ ब्रदर्स', 'द पैसिफिक' और 'मास्टर्स ऑफ द एयर' को बनाया है। साथ ही नौसैनिक युद्ध पर आधारित थ्रिलर 'ग्रेहाउंड' में एक्टिंग भी की।
अब उन्हें 'द हिस्ट्री चैनल' की डॉक्यूमेंट्री 'वर्ल्ड वॉर II विद टॉम हैंक्स' में नैरेट करते हुए सुना जा सकता है। हॉलीवुड रिपोर्टर से द्वितीय विश्व युद्ध से संबंधित प्रोजेक्ट्स से जुड़ने के बारे में बात करते हुए टॉम ने कहा, ‘मैं हाल ही में इस बात से जूझ रहा हूं।
रात में खुद के उन पलों में मैं खुद से पूछता हूं कि मैं बार-बार कविता, सुकून और ज्ञान के उस संयोजन के लिए इसकी ओर क्यों मुड़ता हूं?’ फीमेलफर्स्ट डॉट यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, हैंक्स का मानना है कि इसका कारण उस समय की दुनिया और आज की दुनिया के बीच की समानताएं होनी चाहिए।
हमारे सामने अधिक विकल्प होना चाहिए
टॉम ने आगे कहा कि यह 2026 में हमारे सामने मौजूद स्पष्ट विकल्पों के बारे में अधिक होना चाहिए, न कि इस बारे में कि 1930 के दशक में उन साहसी लोगों ने क्या किया था। इसके साथ ही उस समय प्रत्येक व्यक्ति को शामिल होने के लिए जो कड़े फैसले लेने पड़े थे, वे आज हमें शामिल होने के लिए जो कड़े फैसले लेने पड़ते हैं, उनसे अलग नहीं हैं।
हालांकि, टॉम हैंक्स ने माना कि द्वितीय विश्व युद्ध में लिए जाने वाले व्यक्तिगत फैसले स्वतंत्रता और गुलामी के बीच के अंतर जितने स्पष्ट और प्रत्यक्ष थे, फिर भी अंततः सब कुछ एक चुनाव पर ही डिपेंड करता है, चाहे युद्ध किसी भी रूप में हो।
20 एपिसोड की है सीरीज
एक्टर-निर्देशक ने कहा कि दो प्रकार की ताकतें थीं जो कहती थीं कि हम नस्लीय रूप से किसी से भी महान हैं, या हम अपने खून में अपने गुणों के कारण धार्मिक रूप से किसी से भी महान हैं। क्या आज भी ऐसी कोई ताकत मौजूद है? हां, बिल्कुल। इसलिए इस संदर्भ में चाहे युद्ध किसी भी रूप में हो, अंततः हमें किसी न किसी प्रकार का व्यक्तिगत चुनाव करना ही होगा। यह 20 एपिसोड की एक सीरीज है जिसमें अभिनेता और पुलित्जर पुरस्कार विजेता इतिहासकार जॉन मीचम विश्वव्यापी संघर्ष की हर प्रमुख घटना को कवर करेंगे।