‘40 के बाद पैकअप हो जाएगा...’ लेकिन ऐसा नहीं हुआ’, बोले सैफ अली खान; ‘कर्तव्य’ से लेकर करियर तक की खुलकर बात
Saif Ali Khan Exclusive Interview: सैफ अली खान को बीते दिनों फिल्म 'कर्तव्य' में देखा गया। हाल ही में अभिनेता ने इस फिल्म के बहाने अपने करियर को लेकर दिलचस्प बातें साझा कीं।
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'जब आप 40 साल के हो जाओगे, तब पैकअप हो जाएगा...' सैफ अली खान को एक डायरेक्टर ने करियर के शुरुआती दिनों में ये बात कही थी। लेकिन वक्त के साथ चीजें बदलीं और सैफ को अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का मौका मिलता रहा। अब 'कर्तव्य' में एक पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आने वाले सैफ अली खान ने अमर उजाला से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने नए रोल, परिवार, शूटिंग के अनुभव और जिंदगी में ‘कर्तव्य’ के मायने पर खुलकर बात की।
‘मैंने पुलिसवाले का नहीं, एक इंसान का किरदार निभाया’
फिल्म में अपने किरदार को लेकर सैफ ने कहा, ‘सबसे पहले तो इस किरदार का बात करने का ढंग और इसकी भाषा मुझे बहुत अलग लगी। जिस सेटिंग में ये कहानी आधारित है, उसकी बोली और डायलॉग्स सीखने में काफी मजा आया। ये काफी डायनामिक कैरेक्टर है।
पिछली बार जब मैंने वर्दी पहनने वाले पुलिसवाले का किरदार निभाया था, वो काफी डिप्रेस्ड और थोड़ा अलग तरह का इंसान था। बहुत अमेजिंग कैरेक्टर था, लेकिन इस बार के किरदार में हीरोइज्म भी है, डायनामिज्म भी है, रोमांस भी है। वो अपनी बीवी से बहुत प्यार करता है, बच्चे से प्यार करता है। थोड़ा काम से थका हुआ भी है, लेकिन बहुत रियलिस्टिक इंसान है। जब उस पर प्रेशर आता है तो वो किस तरह रिएक्ट करता है और प्रॉब्लम्स के चक्रव्यूह से कैसे निकलता है, मुझे वो बहुत अच्छा लगा।
मुझे पुलकित की कहानी भी बहुत पसंद आई। मैंने इसे सिर्फ एक पुलिसवाले का रोल नहीं समझा। मैंने एक इंसान का किरदार निभाया है, जो पुलिस में है। हमेशा जब भी मुझे ऐसे रोल ऑफर हुए हैं, मैंने पहले इंसान को देखा है, फिर उसकी नौकरी को।’
‘मेरे लिए फैमिली की सुरक्षा सबसे बड़ा कर्तव्य है’
‘कर्तव्य’ शब्द पर बात करते हुए सैफ थोड़ा निजी भी हो गए। उन्होंने कहा, ‘इस किरदार और मुझमे एक समानता जरूर है। हम अपनी फैमिली को सुरक्षित देखना चाहते हैं। जो भी हम करते हैं, दुनिया में जो भी काम करते हैं, जो भी नौकरी करते हैं, वो बच्चों की देखभाल और अपनी फैमिली की सुरक्षा के लिए ही करते हैं। ये सारी चीजें हमारे लिए बहुत मायने रखती हैं। मेरे लिए यही इस किरदार और मेरी असल जिंदगी की सबसे बड़ी समानता है।’
‘सुबह 4 बजे ट्रेन आई... तब जाकर वो शॉट मिला’
नॉर्थ इंडिया में शूटिंग का अनुभव याद करते हुए सैफ के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने कहा, ‘इस फिल्म का पूरा माहौल काफी इंडिपेंडेंट सिनेमा जैसा था। सेट पर बहुत प्यारा एटमॉस्फेयर था। अनिल मेहता जी बेहतरीन डीओपी हैं। हम रात में शूटिंग कर रहे थे और पुलिस वाली गाड़ी की लाइट में कुछ पेपर चिपका रहे थे। उनका असिस्टेंट उस समय नहीं था, तो मैं ही उनका असिस्टेंट बन गया था।
हम दोनों पेपर चिपका रहे थे और साथ में सीन के बारे में बात भी कर रहे थे। उसी माहौल में ये फिल्म बनी, जो मुझे बहुत प्यारा लगा। एक शॉट मुझे आज भी याद है। बहुत ठंड थी, रात का समय था। रसिका भी वहां थीं। जब हम बात कर रहे थे तो मुंह से धुआं निकल रहा था। मैं उस समय गोली भी चला रहा था और बंदूक से भी आग और धुआं निकल रहा था। हम लोग ट्रेन का इंतजार कर रहे थे क्योंकि हम एक पुल के नीचे शूटिंग कर रहे थे। नदी के पास बहुत खूबसूरत जगह थी। सब काफी थके हुए थे, लेकिन हमने इंतजार किया। सुबह करीब चार बजे ट्रेन आई और तब जाकर हमने वो शॉट लिया। स्क्रीन पर वो इतना खूबसूरत लगता है कि आज भी याद है। पैकअप के बाद हम लोग बॉर्डर के काफी करीब भी गए थे। हमने अपने सैनिकों को देखा। वो बहुत अच्छी सुबह थी।’
‘अब लगता है थोड़ा और कुलचे खा लेने चाहिए थे’
अमृतसर के खाने का जिक्र आते ही सैफ हंस पड़े। उन्होंने कहा, ‘शूटिंग के दौरान मैं दुर्भायवश खाना ज्यादा एंजॉय नहीं करता। काफी साधारण और डाइट टाइप का खाना चलता है। लेकिन अमृतसर में थे तो एक बार सरसों का साग और रोटी जरूर खाई थी।’
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘अब मुझे थोड़ा रेग्रेट होता है कि शायद मुझे और कुलचे खाने चाहिए थे। क्योंकि फिल्म में मैं बहुत पतला भी नहीं दिखना चाहता था। मैं थोड़ा भरा हुआ दिखना चाहता था… लेकिन बहुत ज्यादा हैवी भी नहीं लगना चाहता था। तो मैं खुद ही कन्फ्यूज था कि खाना है या नहीं खाना। अब लगता है कि थोड़ा और कुलचे खा ही लेने चाहिए थे।’
‘एक डायरेक्टर ने कहा था- 40 के बाद पैकअप हो जाएगा’
अपने लंबे करियर को लेकर सैफ ने कहा, ‘मैंने अब इस बारे में ज्यादा सोचना बंद कर दिया है। पहले सोचता था कि ये रोल बहुत अच्छा रहेगा। कभी-कभी कोई आइडिया आता था कि शायद लॉयर का रोल करना चाहूंगा या कुछ ऐसा। लेकिन आजकल ऐसा ज्यादा नहीं सोचता। अब जो रोल आते हैं, उनमें से सबसे अच्छा चुनने की कोशिश करता हूं। लेकिन हां, मुझे उम्मीद है कि आगे भी अच्छे रोल मिलते रहेंगे। मुझे लगता है कि एक उम्र के बाद भी अच्छे और दिलचस्प रोल आते रहते हैं और ये बहुत अच्छी बात है।’
सैफ ने एक पुराना किस्सा याद करते हुए कहा, ‘मुझे याद है, मेरी शायद पहली, दूसरी या तीसरी फिल्म के दौरान एक डायरेक्टर ने मुझसे कहा था कि 'जब आप 40 साल के हो जाओगे, तब पैकअप हो जाएगा… क्योंकि उसके बाद एक्टर्स को रोल नहीं मिलते।' लेकिन थैंकफुली ऐसा नहीं हुआ। अब भी अच्छे रोल मिल रहे हैं, तो वो सुनकर आज थोड़ा मजेदार लगता है।’
‘छोटी-छोटी जिम्मेदारियां ही असली कर्तव्य हैं’
आखिर में ‘कर्तव्य’ शब्द पर लौटते हुए सैफ ने कहा, ‘मुझे लगता है कि पहले इस शब्द को लेकर मेरा नजरिया थोड़ा अलग था। समय के साथ इसकी समझ बदलती गई। लेकिन सच कहूं तो मेरे लिए कर्तव्य कोई बहुत बड़ी या फिल्मी चीज नहीं है।
मुझे लगता है कि जिंदगी की छोटी-छोटी जिम्मेदारियां ही सबसे ज्यादा मायने रखती हैं। जैसे बच्चों के साथ समय बिताना, उन्हें स्कूल छोड़ना, उनकी देखभाल करना, परिवार के लिए मौजूद रहना। हम सब अपनी जिंदगी में रोज ऐसी कई चीजें करते हैं, जो शायद सुनने में छोटी लगती हैं, लेकिन वही असली जिम्मेदारियां होती हैं। मेरे लिए कर्तव्य का मतलब अब काफी हद तक यही है।’