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Qayamat Se Qayamat Tak: आमिर के साथ फिल्म बनाना चाहते हैं मंसूर, साझा किए ‘कयामत से कयामत तक’ के किस्से

Sat, 22 Mar 2025 08:23 AM IST
सुवेश शुक्ला एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: सुवेश शुक्ला Updated Sat, 22 Mar 2025 08:23 AM IST
सार

शुक्रवार को आमिर खान की फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ की स्क्रीनिंग ‘रेड लॉरी फिल्म फेस्टिवल’ हुई। इस दौरान आमिर खान और मंसूर खान ने एक साथ फिल्म बनाने की इच्छा भी जाहिर की। 
 

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Mansoor Khan want to make movie with Aamir Khan recall making of Qayamat Se Qayamat Tak
आमिर खान - फोटो : इंस्टाग्राम@amirkhanactor_

विस्तार

शुक्रवार को आमिर खान की फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ को ‘रेड लॉरी फिल्म फेस्टिवल’ के पहले दिन प्रदर्शित किया गया। इस दौरान फिल्म के निर्देशक मंसूर खान और अभिनेता ने एक बार फिर एक साथ फिल्म करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने अपनी इस फिल्म से जुड़े कई रोमांचक किस्से और शूटिंग के दौरान आने वाले उतार-चढ़ाव के बारे में भी साझा किया। आइए जानते हैं फिल्म के अंत को लेकर निर्देशक को क्यों कशमकश का सामना करना पड़ा।

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आमिर की पहली लीड फिल्म
‘कयामत से कयामत तक’ से आमिर खान ने लीड हीरो के तौर पर डेब्यू किया था। मंसूर खान द्वारा निर्देशित इस रोमांटिक-ड्रामा में जूही चावला भी थीं। यह फिल्म साल 1988 की एक बड़ी हिट फिल्म बन गई। आमिर ने बातचीत के दौरान कहा, “नासिर (हुसैन) साहब, नुजहत (हुसैन की बेटी) और मैं पटकथा लिख रहे थे और मंसूर ‘जो जीता वही सिकंदर’ लिख रहे थे। नासिर साहब बीमार पड़ गए और उन्हें बाईपास ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। उन्होंने मंसूर से कहा कि उनकी स्क्रिप्ट तैयार है और अगर उन्हें यह पसंद आए तो वे इसे निर्देशित कर सकते हैं।

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मंसूर को यह पसंद आया, लेकिन जब वह इसमें शामिल हुए तो उन्होंने पहले लिखी गई बातों में से लगभग 80 प्रतिशत को बदल दिया। नुजहत और मेरे लिए यह राहत की बात थी, क्योंकि हमें नासिर साहब से लड़ना मुश्किल लगता था। उनकी सोच हमारी सोच से अलग थी। इसलिए, हम इसका आनंद ले रहे थे, क्योंकि स्क्रिप्ट उसी तरह आगे बढ़ रही थी जैसा हम चाहते थे।” 

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नेपोटिज्म नहीं प्रतिभा के दम पर बनाई फिल्म
मंसूर ने कहा कि उन्हें यह फिल्म पूरी तरह से अपनी प्रतिभा के आधार पर बनाने का मौका मिला, ना कि इसलिए कि उनके पिता एक फिल्म निर्माता थे। उन्होंने कहा, “यह नेपोटिज्म नहीं था। अगर मेरे पिता नेपोटिज्म करते तो मैं कभी ऐसा नहीं करता। मुझे फिल्म बनाने का अंदाजा था। मैंने एक फिल्म बनाई थी, 'अम्बर्टो', इसकी शूटिंग 1981 या 1982 में हुई थी।" मंसूर ने आगे बताया कि यह उनके दिवंगत फिल्म निर्माता पिता थे, जिन्हें ‘बहारों के सपने’, ‘कारवां’ और ‘यादों की बारात’ के लिए जाना जाता था। उन्होंने ही मंसूर को ‘कयामत से कयामत तक’ की हैप्पी एंडिंग के लिए राजी किया, जिसे शूट भी किया गया था, लेकिन इस्तेमाल नहीं किया गया।


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आमिर के साथ बनाना चाहते हैं फिल्म
निर्देशक मंसूर जिन्होंने ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘अकेले हम अकेले तुम’ और ‘जोश’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। हालांकि उन्होंने बाद में फिल्में बनाना बंद कर दिया, लेकिन अब वह आमिर के साथ मिलकर एक नई फिल्म बनाने का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा कि वह साल 2023 में प्रकाशित अपनी किताब ‘वन: द स्टोरी ऑफ द अल्टीमेट मिथ’ पर फिल्म बनाने के लिए विचार कर रहे हैं।

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