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Bhool Chuk Maaf Review: बनारसी बाबू अवतार में जमे नहीं राजकुमार राव, ओटीटी पर ही निकलती बरात तो अच्छा होता

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 23 May 2025 11:04 PM IST
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Bhool Chuk Maaf Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Sharma Rajkumar Rao Wamiqa Gabbi Seema Raghuvir Sanjay
भूल चूक माफ रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
भूल चूक माफ
कलाकार
राजकुमार राव , वामिका गब्बी , सीमा पाहवा , संजय मिश्रा , जाकिर हुसैन , रघुवीर यादव , इश्तियाक खान , विनीत कुमार और नलनीश नील आदि
लेखक
करण शर्मा
निर्देशक
करण शर्मा
निर्माता
दिनेश विजन
रिलीज
23 मई 2025
रेटिंग
1/5

साउथ सिनेमा के धुरंधरों की नजर में उत्तर की काशी है। ‘कल्कि 2898 एडी’ देखी होगी तो पता होगा कि इस काशी में आगे क्या होने वाला है? लेकिन, अपने हिंदी सिनेमा के लिए काशी शुरू से सत्य की नगरी रही है। डायरेक्ट कैलाश पर्वत से महादेव इसकी निगरानी करते हैं। सीसीटीवी वैसे तो उनके पूरी दुनिया में हैं लेकिन जितना महादेव, महादेव काशी में होता है तो यहां यूं लगता है कि उनकी तीसरी आंख ही पहरेदारी में है। यहां जीवन भी महादेव और मृत्यु तो महादेव है ही। लेकिन, फिल्म ‘भूल चूक माफ’ वाली काशी मुंबई के किसी स्टूडियो में बसी है। उत्तर प्रदेश के किन्हीं दो ऐसे ब्राह्मण परिवारों की कहानी है, जहां के एक पंडित जी इतवार के दिन छत पर बैठकर अपना अलग स्टोव लेकर ‘खीर’ पकाते हैं और उसमें लौंग का तड़का भी लगाते हैं। उनका बेटा गाय को रोटी नहीं ‘पूरनपोली’ (महाराष्ट्र का व्यंजन) खिलाने की बात करता है। बनारस में पला बढ़ा 40 साल का ये लूमड़ थाने में बैठकर सरकारी रिकॉर्ड में अपनी उम्र 25 साल कराने की कोशिश कर रहा है। 

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Bhool Chuk Maaf Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Sharma Rajkumar Rao Wamiqa Gabbi Seema Raghuvir Sanjay
भूल चूक माफ रिव्यू - फोटो : सोशल मीडिया

दो महीने में सरकारी नौकरी का फॉर्मूला
खैर अपने को क्या, अपना काम है फिलिम देखना, और आप सबको ये बताना कि फैमिली आउटिंग के लिए जब आप वीकएंड पर निकलेंगे तो क्या गाढ़ी कमाई के ढाई तीन हजार रुपये इस फिल्म को देखने पर लुटाए जा सकते हैं? नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म पड़ी हुई है ‘नेकेड’। इसके अलावा एक और अंग्रेजी फिल्म है, ‘ग्राउंडहॉग डे’। ‘भूल चूक माफ’ मिलाकर इन तीनों फिल्मों की कहानी का गुणसूत्र एक ही है। फिल्म के हीरो का एक टाइम लूप में फंस जाना। यहां रंजन को जब तक समझ आता है कि शिवजी से उन्होंने जो नेक काम करने की मन्नत मांगी थी, वह पूरी नहीं की है, तब तक गाड़ी स्टेशन से निकल लेती है। इसी के चलते रन-जन अपनी शादी से ठीक एक दिन पहले की तारीख में अटके हैं। फिल्म में ये प्रसंग भी इंटरवल से ठीक पहले आता है। उससे पहले की कहानी वही है जो आप फिल्म के ट्रेलर में देख चुके हैं। बनारस के एक लड़का और लड़की घर से भागे हैं। पुलिस उन्हें थाने ले आती है। मामला इस बात पर सुलटता है कि लड़का दो महीने में सरकारी नौकरी पा लेगा। बलिहारी है ऐसी यूपी पुलिस की। और, बलिहारी है ऐसी बेटियों के पिताओं की भी, जिन्हें लगता है कि कोई बेरोजगार दो महीने में सरकारी नौकरी पा लेगा।


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Bhool Chuk Maaf Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Sharma Rajkumar Rao Wamiqa Gabbi Seema Raghuvir Sanjay
भूल चूक माफ - फोटो : यूट्यूब

एक कालजयी फिल्म बनाने से चूके दिनेश
फिल्म ‘भूल चूक माफ’ दरअसल सरकारी नौकरियों को लेकर परेशान देश के करोड़ों युवाओं की एक जबर्दस्त केस स्टडी हो सकती थी लेकिन उसके लिए फिल्म निर्माता दिनेश विजन को एक अलग विजन के साथ साथ एक 25-26 साल के लड़के की भी जरूरत होती। और, इस उमर के जो लड़के हिंदी फिल्म निर्माताओं की आंखें अपनी ‘रौशनी’ से इन दिनों चौंधिया दे रहे हैं, उनमें अगस्त्य नंदा से लेकर वेदांग रैना, शिखर पहाड़िया आदि सबका ऐसे किसी प्रसंग से जीवन में न लेना देना पड़ा है और न ही शायद पड़ेगा। आज के जमाने का अमोल पालेकर जैसा कोई युवक ही ऐसा किरदार निभा सकता है। ऐसा युवक जिसने निजी जीवन में भी नौकरी पाने के संघर्ष को जिया हो। दिनेश विजन को कोई नहीं मिला तो उन्होंने ‘स्त्री 2’ से उछले राजकुमार को फिल्म में वैसी ही जबर्दस्ती से फिट कर दिया हैं, जैसे संवादों के बीच बीच में ‘बकैती’ शब्द ठूंसा गया है। अरे भाई, बकैती का मतलब दबंगई के आसपास  है। अनावश्यक बातें करने को बकैती नहीं ‘बक**’ कहते हैं। क्या करण शर्मा? कुछ दिन तो गुजारे होते काशी में..!

Bhool Chuk Maaf Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Sharma Rajkumar Rao Wamiqa Gabbi Seema Raghuvir Sanjay
भूल चूक माफ - फोटो : यूट्यूब

प्यार जैसा प्यार नहीं, चिल्लाना हर बार
फिल्म की हीरोइन वामिका गब्बी हैं। प्यार क्या होता है, उनके किरदार तितली ने फिल्मों तक में नहीं सीखा है। बात बात में गबरू जवान बनने की कोशिश करती हैं और बस बोली में मात खा जाती हैं। एक तो पता नहीं निर्देशक करण शर्मा की वामिका गब्बी से क्या ही खटकी है इस पूरी फिल्म की शूटिंग के दौरान कि एक भी ढंग का क्लोजअप इस लड़की का पूरी फिल्म में नजर नहीं आता। डायरेक्टर और हीरोइन के बीच की ‘ट्यूनिंग’ न बन पाने का किस्सा कुछ कुछ लगता है यहां, लेकिन मामला महिला सशक्तीकरण का भी है यहां। ये लड़की अपने बॉयफ्रेंड को पाल रही है। बॉयफ्रेंड कैसा है हमने पहले ही बता दिया। उसको सरकारी नौकरी के लिए रिश्वत तक का जुगाड़ ये लड़की कर रही है। और, लड़का है कि बिला नागा हर रोज गाय के गोबर में कूद जा रहा है। दोनों के परिवार मिश्रा और तिवारी ही क्यों हैं? पता नहीं। काशी के ब्राह्मणों जैसी कोई पृष्ठभूमि तो दोनों परिवारों की यहां रची नहीं गई है। जाकिर हुसैन, रघुवीर यादव इन दोनों परिवारों के मुखिया हैं, लेकिन ढंग का एक भी सीन दोनों के पल्ले नहीं आया है। सीमा पाहवा भी हैं हीरो की मम्मी के अवतार में। उन पर कैमरा जब भी आता है, उनके अभिनय पर सुहाता है। बाकी कोई आधा दर्जन और नए नए से चेहरे फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने तलाशे हैं, पर अब चूंकि डायरेक्टर ही राइटर है और पैकेज डील में लिखी हुई फिल्म है तो ‘रेड 2’सरीखा यहां इन सहायक कलाकारों के लिए कुछ है नहीं। हां, नलनीश नील दर्जी के किरदार में चेहरे पर हंसी ले आने में कामयाब रहते हैं। 

Bhool Chuk Maaf Review in Hindi by Pankaj Shukla Karan Sharma Rajkumar Rao Wamiqa Gabbi Seema Raghuvir Sanjay
फिल्म 'भूल चूक माफ' का एक सीन - फोटो : इंस्टाग्राम@rajkummar_rao

कहानी ही नहीं ढंग की तो कैमरा क्या करेगा!
फिल्म के ओपनिंग क्रेडिट्स में सिनेमैटोग्राफर सुदीप चटर्जी का नाम देखकर दिल उछला था कि कुछ तो सुंदर सुंदर अगले दो घंटे दिखेगा। पर उनकी काशी सिर्फ ड्रोन से ही दिख रही है। कभी बाएं से दाएं तो कभी ऊपर से नीचे। बाकी की काशी दिनेश विजन ने उन्हें मुंबई में बनाकर दे दी है। एडीटिंग करने वाले मनीष प्रधान को जरूर एक सौ रुपये नकद और एक रुपया यूपीआई वाली दक्षिणा मिलनी चाहिए कि उन्होंने इतनी कमजोर कथा, पटकथा वाली फिल्म को दो घंटे में ही समेट दिया। फिल्म देखते समय आपको अपने मोबाइल पर मैसेज, रील्स और फेसबुक नोटिफिकेशन निपटाने में दिक्कत न आए तो कुछ गाने भी इस काम के लिए रखे गए हैं। इन गानों के लिए तनिष्क बागची के रचे संगीत से बढ़िया तो केतन का बैकग्राउंड म्यूजिक है। फिल्म के म्यूजिक का असली रिपोर्ट कार्ड जानना हो तो जान लीजिए कि जब कुछ न बन पड़ा तो दिनेश विजन को आखिर में यहां ‘चोर बजारी’ बजाना पड़ा है। फिल्म ओटीटी पर भी आपको धीरज के साथ देखनी पड़ेगी। इसे सीधे वहीं रिलीज करना ही ज्यादा बेहतर होता, टुकड़ों टुकड़ों में ही इसे देखा जा सकता है। ये दो घंटे पकड़कर बिठाने वाली फिल्म नहीं है। 

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