फिल्म समीक्षा: 'दिलवाले' दिल नहीं, बाकी सब है
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निर्माताः गौरी खान
निर्देशकः रोहित शेट्टी
सितारेः शाहरुख खान, काजोल, वरुण धवन, कृति सैनन, वरुण शर्मा, जॉनी लीवर, बोमन ईरानी, संजय मिश्रा
रेटिंग **
बड़े-बड़े सितारों की ‘छोटी’ बातों के प्रति आप सहिष्णु हैं तो फिर आपको कुछ सोचने की जरूरत नहीं। दिलवाले आपके लिए है। वैसे आप काम चला सकें तो इसमें आपको सितारे नहीं, उनकी छाया मिलेगी। कहानी की जगह गढ़े गए सीन मिलेंगे। जिंदगी की तस्वीरों की जगह पेंट किए हुए सैट मिलेंगे। कंप्यूटर ग्राफिक्स से सजाई एक बनावटी दुनिया मिलेगी।
परंतु अगर सिनेमा/सितारे को लेकर आपके इरादों में किसी तरह की हकलाहट नहीं है और स्वस्थ रहने के लिए डॉक्टर ने कोई ‘गुरुआ गोली’ लेने की अनिवार्यता नहीं जताई है तो फिर आप विकल्प की तलाश कर सकते हैं।
दिलवाले सबसे ज्यादा इस बात के लिए निराश करती है कि यहां आपको वह सुपरसितारा नहीं मिलता जिसकी छवि ने कभी आपका दिल चुराया था। फिल्म देख कर मालूम होता है कि सुपरसितारे की छाया अब सिर्फ आपके दिल में बाकी है, पर्दे पर उसका दिलकश अंदाज खो गया है। इसे बढ़ती उम्र के अनुरूप रोल करने की मजबूरी कहें या किरदार की मांग, शाहरुख की मौजूदगी में भी दिलवाले उनका सिनेमा नहीं है।
पुरानी मधुर ट्यून को ही घिसने तक बजाओ
ऐसा लगता है कि कलाकार से एक फिल्मी व्यसायी बन कर वह पुरानी मधुर ट्यून को ही घिसने तक बजा रहे हैं। जहां तक काजोल के साथ शाहरुख की कैमेस्ट्री का सवाल है वह फिल्म में नायिका में बार-बार खलनायकी वाले तत्व आ जाने से गायब हो गई है। वास्तव में शाहरुख-काजोल को साथ में दिलों को जीतने के लिए अब किसी मसाला फिल्म की जगह दिलकश कहानी की जरूरत है।
उधर, वरुण और कृति सैनन अपने सीनियर ऐक्टरों की छत्रछाया में खो गए हैं। खास तौर पर वरुण निराश करते हैं कि उन्होंने अब तक अकेलेदम अपनी जो इमेज बनाई थी, उसे इस फिल्म से धक्का पहुंचता है। जिस तरह का किरदार उन्होंने किया, उसे हीरो नहीं करते।
दिलवाले पारंपरिक बॉलीवुड फिल्मों में मिलने वाले तमाम मसालों से तैयार की गई रैसिपी है। दो भाई, जिनमें से एक को पिता ने सड़क से उठाया था। दो बहनें (जिनके बीच का लगाव कभी पर्दे पर उभरता ही नहीं)। इन भाईयों-बहनों के माफिया पिता, जो कभी दोस्त थे। मगर फिर दुश्मन बन गए। दुश्मन परिवार के बड़े लड़के-लड़की में प्यार। फिर गोलीबारी के बीच गलतफहमियां।
कहानी में आप समझ जाएंगे आगे क्या है
अलग-अलग रास्तों पर चलते हुए उनका पंद्रह साल बाद पुनर्मिलन। इस बीच उनके छोटे भाई-बहन के बीच प्यार होना। कहानी की इन घुमावदार गलियों में भी आप आसानी से जानते हैं कि आगे कौन सा मोड़ आने वाला है। अतः यहां रोमांच पैदा होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। इन सबके साथ कॉमेडी के लिए आधा दर्जन कलाकारों के अलग-अलग ट्रैक। ताकि आप बुढ़ाते रोमांस के बीच उबासी न लेने लगें।
वास्तव में निर्देशक रोहित शेट्टी ने अपनी पिछली मल्टी स्टारर फिल्मों के फार्मूलों को ही यहां आजमाया है। गाड़ियां वे उड़ाते ही हैं। इस बार साड़ियां भी उड़ा दी। रंग-बिरंगे सैट वाली कहानी को कहने के अंदाज में रोहित कुछ विशेष नया नहीं पेश करते।
नामचीन कलाकार तो यहां हैं ही। फिल्म को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने और रंग-रोगन सही रखने रखने पर काफी खर्च किया गया है। बुल्गारिया की कुछ खूबसूरत लोकेशनों पर शूटिंग की गई है। तमाम तड़क-भड़क के बावजूद सच यही है कि कृत्रिम ढंग से हंसाने की कोशिशों के बीच सिनेमा का दिल इस दिलवाले से गायब है।