Heart Of Stone Review: अपने बूते गैल गैडट फिर नहीं बन पाईं वंडर वूमन, आलिया भट्ट के किरदार ने भी किया निराश
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सिनेमा ऐसी आदत है कि एक बार लग जाए तो फिर छूट पाना बहुत मुश्किल है। गुरुवार रात ‘ओएमजी 2’ और फिर आज सुबह सुबह ‘गदर 2’ देखने के दौरान आलिया भट्ट फिल्म शुरू होने से पहले और फिर इंटरवल में कम से कम छह-छह बार देखने को मिलीं। सेब काटकर मसूड़ों के मजबूत होने की बात समझाते हुए वह इन दिनों एक असरदार देसी टूथपेस्ट की ब्रांड अंबेसडर जो बनी हुई है। फिल्म ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ के लिए उन्हें तालियां मिल रही हैं। करण जौहर को तो फिल्म बनाने के पैसे मिल ही चुके हैं, असल खाता बही उन लोगों का दिक्कत में है जिनके पैसे इस फिल्म में लगे हुए हैं। कौन जाने 10 साल बाद करण जौहर भी अनुराग कश्यप की तरह इस बात का ‘खुलासा’ करें कि उनकी फिल्म भी ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की तरह वायकॉम 18 के लिए घाटे का सौदा रही। खैर, बात हो रही थी आलिया भट्ट की। और, अरसे से मन था कि आलिया भट्ट की पहली हॉलीवुड फिल्म ‘हार्ट ऑफ स्टोन’ रिलीज होते ही देखनी है। हालांकि, वजह वह नहीं बल्कि गैल गैडट थीं, जो वंडर वूमन की तरह अरसे से लुभाती रही हैं। वैसे बताते हैं कि उनका नाम हिब्रू भाषा का है और इसका सही उच्चारण गल गदो होना चाहिए।
गैल गैडट की तेजी से फड़फड़ाती लौ
नेटफ्लिक्स पर ही गैल गैडट की पिछली फिल्म ‘रेड नोटिस’ रिलीज हुई थी। उस फिल्म से लेकर इस फिल्म तक वह ‘शैजेम! फ्यूरी ऑफ द गॉड्स’, ‘द फ्लैश’ और ‘फास्ट टेन’ में नजर आ चुकी हैं। ‘हार्ट ऑफ स्टोन’ इस साल की उनकी आखिरी प्रस्तुति है। और, ठीक ही है। अब कम से कम उनके चक्कर में तो नेटफ्लिक्स पर एक और हॉलीवुड फिल्म देखने का बहाना नहीं रहेगा। गैल गैडट के बारे में जो लोग जानते हैं उनको पता है कि वह इजरायल से हैं। वहां की सेना में अनिवार्य मानी जाने वाली सेवाएं दे चुकी हैं। साल 2004 की जिस मिस यूनीवर्स प्रतियोगिता में भारत की तनुश्री दत्ता नौवें नंबर पर रही थीं, उसमें उनका नाम टॉप 10 की सूची तक में नहीं आ पाया था। लेकिन ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ फ्रैंचाइजी ने उनकी लाइफ बदल दी और ‘वंडर वूमन’ बनकर तो वह दुनिया भर में करोड़ों प्रशंसकों की चहेती अदाकारा बन गईं। डीसी कॉमिक्स की फिल्मों में उनका सफर कितना लंबा रहेगा, इस बात का संकेत इसी से मिलता है कि वह अब खुद को केंद्र बिंदु में रखने वाली ओटीटी फिल्में खूब बनाने लगी हैं।
दगे हुए कारतूस सी फिल्म की कहानी
धनुष, प्रियंका चोपड़ा और अनिल कपूर जैसे सितारे हॉलीवुड फिल्मों में जिस तरह के किरदार पाते हैं, उनको ध्यान में रखते हुए आलिया भट्ट से मुझे वैसे भी कोई चौंका देने वाला किरदार करने की उम्मीद फिल्म ‘हार्ट ऑफ स्टोन’ में नहीं थी, मुझे उम्मीद थी गैल गैडट से कि वह इस बार ‘रेड नोटिस’ वाली गलती नहीं दोहराएंगी। मतलब कि कम से कम कहानी तो ऐसी चुनेंगी जो अंतर्राष्ट्रीय अपील की हो और जिसमें कुछ तो नयापन हो। लेकिन, वह इस बार भी जो कारतूस लाईं वह पहले से दगा हुआ निकला। टॉम क्रूज जो करतब अपनी हर ‘मिशन इंपॉसिबल’ सीरीज में करते हैं, उसे एक बार और दोहराने का गैल गैडट को ख्याल भी कैसे आया, सोचने वाली बात है। यहां चैप्टर नाम का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनिया को आफत में पड़ने से रोकता रहता है। उसकी एक एजेंट स्टोन किसी तरह एमआई 6 में दाखिल हो जाती है लेकिन उसकी पहचान जल्द ही खुल जाती है। चैप्टर का सारा काम एक उपग्रह में रखे डाटा बैंक से चलता है जिसका नाम है, हार्ट। इस डाटा बैंक की मदद से चैप्टर पूरी दुनिया में निगाह रख सकता है। बस इसी को हासिल करने की कोशिश में है पुणे की केया धवन जिसके माता पिता की एक मेडिकल लैब में परीक्षण के दौरान मौत हो जाती है। उसे इस लैब के मालिक से बदला लेना है। कंप्यूटर की वह मास्टर है, ठीक फिल्म की हीरोइन स्टोन की तरह।
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‘प्रोफेसर प्यारेलाल’ 1981 - रिपीट
फिल्म ‘हार्ट ऑफ स्टोन’ की कहानी का खाका जैसे ही सजकर तैयार होता है, समझ आने लगता है कि फिल्म बनाने वालों ने पहला लोचा तो कर दिया है। लेकिन, फिर भी उम्मीद बनी रहती है कि फिल्म के निर्देशक टॉम हार्पर शायद इसे पेश करने के तरीके में कुछ चौंकाने वाला कर जाएं और फिल्म देखने में निवेश किए जा रहे दो घंटे के समय का कुछ तो रिटर्न मिले। लेकिन, आसमान से लेकर धरती और उसके नीचे रचे गए एक्शन दृश्यों में कुछ भी ऐसा नहीं है जो रोमांच पैदा कर सके। आसमान में ऊंचाई से गिरते हुए दो लोगों के बीच गुत्थमगुत्था होने के दृश्य भारतीय दर्शक तो फिल्म ‘प्रोफेसर प्यारेलाल’ में साल 1981 में ही देख चुके हैं। रही बात स्नो ड्राइविंग और बाइक चेज की तो ये सब जेम्स बॉन्ड इतनी बार कर चुके हैं कि ऐसा कोई सीन शुरू होते ही उसकी पूरी सीक्वेंस और उसका परिणाम खुद ब खुद आंखों के सामने तैर जाता है। निर्माता और अभिनेत्री दोनों तौर पर यहां गैल गैडट ने निराश किया है।
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असरदार नहीं रहा आलिया का अभिनय
फिल्म ‘हार्ट ऑफ स्टोन’ को लेकर खुद नेटफ्लिक्स को भारतीय दर्शकों से कोई खास उम्मीद शुरू से नहीं रही। फिल्म की प्रेस कांफ्रेस में भारत की तरफ से एक भी पत्रकार शामिल नहीं किया गया। फिर गैल गैडट और आलिया भट्ट ने इस फिल्म के बारे में जब मीडिया से बातें शुरू कीं तो यहां भी मुख्यधारा का देसी मीडिया हाशिये पर ही रहा। फिल्म देखने के बाद समझ आता है कि इसमें 20 साल की एक आईटी एक्सपर्ट का किरदार कर रहीं आलिया को भी फिल्म बनते बनते ये तो समझ आ ही गया होगा कि यहां वह बस एक सेलिब्रिटी हैं, जिनके पास इस फिल्म के बाद कुछ इंटरनेशनल ब्रांड्स और आ सकते हैं। बाकी कुछ फिल्म में न आलिया के लिए हैं और न ही हॉलीवुड फिल्मों के शौकीन देसी दर्शकों के लिए।