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Jubilee Review: अपारशक्ति, सिद्धांत और अदिति की बेहतरीन अदाकारी, हिंदी सिनेमा की दिलचस्प सियासत पर बनी ‘जुबली’

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 07 Apr 2023 07:46 AM IST
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Jubilee Review in Hindi by Pankaj Shukla Soumik Sen Vikramaditya motwane aparshakti khurana sidhant gupta
जुबली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
जुबली
कलाकार
अपारशक्ति खुराना , सिद्धांत गुप्ता , अदिति राव हैदरी , वामिका गब्बी , प्रोसेनजीत चटर्जी , नंदीश सिंह संधू , राम कपूर और अरुण गोविल
लेखक
सौमिक सेन , विक्रमादित्य मोटवानी और अतुल सभरवाल
निर्देशक
विक्रमादित्य मोटवानी
निर्माता
विक्रमादित्य मोटवानी , शिबाशीष सरकार , सृष्टि बहल और विक्रम मल्होत्रा
रिलीज
7 अप्रैल 2023
रेटिंग
4/5

हिंदी सिनेमा के शुरुआती दिनों का सबसे मशहूर स्टूडियो रहा है, बॉम्बे टाकीज। मुंबई में मलाड के इलाके में शुरू हुआ ये स्टूडियो अपने आप में एक कहानी है। बॉम्बे टाकीज को बनाया, सजाया और संवारा हिमांशु राय और देविका रानी ने। देविका रानी विलायत में पली बढ़ीं। हिमांशु राय से शादी की। दोनों जर्मनी गए। फिल्म बनाने की तकनीक सीखी और फिर दोनों ने मुंबई आकर साथ में फिल्में बनाने का कारोबार किया। हिमांशु राय नहीं रहे तो देविका रानी की एक रूसी पेंटर से दोस्ती हुई। उनकी दूसरी शादी भी हुई। वगैरह वगैरह..! इसी बॉम्बे टाकीज में मौका पाकर अशोक कुमार सुपरस्टार बने। छोटा भाई किशोर कुमार को गाने का यहीं शौक लगा और बाकी की कहानी हिंदी सिनेमा में दिलचस्पी रखने वालों को पता ही है। प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई नई वेब सीरीज ‘जुबली’ का आधार यही है।

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जुबली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

थोड़ी सच्ची, थोड़ी झूठी कहानियां

वेब सीरीज ‘जुबली’ की कहानी ऱॉय टाकीज में काम करने वाले एक मामूली सी कारिंदे बिनोद के सुपरस्टार मदन कुमार बनने की कहानी है। देश को आजादी अभी मिली नहीं है और रॉय टाकीज को एक नए सुपरस्टार की तलाश है। लखनऊ का नामी रंगमंच कलाकार जमशेद खान ऑडिशन में अव्वल नंबर रहता है और उसे अपने स्टूडियो के लिए साइन करने इसकी मालकिन सुमित्रा कुमारी लखनऊ आती हैं। दोनों में इश्क परवान चढ़ता है। रॉय बाबू को इसका पता चलता है। बिनोद दोनों को लेने आता है और तब तक बंटवारे के दंगे शुरू हो जाते हैं। हादसे होते हैं। आपदा में अवसर बिनोद के सामने आता है, रॉय बाबू उसे अपनी नई फिल्म का हीरो बना देते हैं। फिल्म हिट हो जाती है। और इसके बाद हिट फिल्मों की कतार लग जाती है। बिनोद की लखनऊ यात्रा के दौरान उसे ट्रेन में एक नौजवान मिलता है, वह कराची से लखनऊ जा रहा है जमशेद को अपनी थियेटर कंपनी में शामिल करने। इस नौजवान को लखनऊ में एक तवायफ नीलोफर मिलती है। सारे किरदार एक एक करके अलग अलग हालात में आजादी के बाद फिर से मुंबई में मिलते हैं। सबका विकास हो रहा है। एक तरफ नेहरू की मशहूर स्पीच ‘ट्रिस्ट विद डेस्टिनी’ बज रही है, दूसरी तरफ बिनोद दास हिंदी सिनेमा का सुपरस्टार मदन कुमार बन रहा है।

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Jubilee Review in Hindi by Pankaj Shukla Soumik Sen Vikramaditya motwane aparshakti khurana sidhant gupta
जुबली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

देसी खुशबू की कमाल कहानी

मैं अक्सर लिखता रहता हूं कि विदेशी ओटीटी संचालकों को ऐसी देसी कहानियों पर गौर करना चाहिए जो यहां की मिट्टी में सनी हैं, उनकी खुशबुएं अपने में समेटे हैं। वेब सीरीज ‘जुबली’ इसी मिजाज की वेब सीरीज है। अभी इसके औसतन 50 मिनट के पांच एपिसोड रिलीज हुए हैं, पांच एपिसोड हफ्ते भर बाद आएंगे। आहिस्ता आहिस्ता एक एपिसोड का हर दिन मजा लीजिए क्योंकि इसे जल्दी खत्म कर दिया तो आगे की कहानी के लिए आप बेचैन हो जाएंगे, इसकी गारंटी है। और, ये गारंटी सीरीज में आती है इसके रचयिता विक्रमादित्य मोटवानी व सौमिक सेन की सोच से और इसके पटकथा लेखक अतुल सभरवाल की लिखाई से। हिंदी में बनी इस साल की ये अब तक की बेहतरीन सीरीज है और, इसके लिए इसकी पूरी टीम ‘स्टैंडिग ओवेशन’ की हकदार है। फिल्म ‘कला’ में अपने संगीत की तमाम कलाएं दिखा चुके अमित त्रिवेदी इस बार भी कौसर मुनीर के साथ मिलकर उस दौर का संगीत ले आए हैं जिसे हिंदी सिनेमा के संगीत का गोल्डन पीरियड कहा जाता है। और, सीरीज में जहां गाने नहीं बजते हैं, वहां जो संगीत है उसमें कमाल अलोकानंदा दास गुप्ता है। संगीत की बात चली है तो तारीफ इसकी साउंड डिजाइन टीम की भी बनती है। सन्नाटे और अकुलाहट को कैसे बिना बैकग्राउंड म्यूजिक के बयां किया जा सकता है, ये वेब सीरीज ‘जुबली’ अच्छे से दिखाती है।

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जुबली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अपारशक्ति खुराना की अभिनयशक्ति

वेब सीरीज ‘जुबली’ ये भी साबित करती है कि अगर कहानी अच्छी है तो ओटीटी वालों को फिल्मों के स्थापित कलाकारों पर तिजोरी लुटाने की भी जरूरत नहीं है। सीरीज में सबसे अनुभवी कलाकार प्रोसेनजीत हैं और उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप ही सीरीज में बढ़िया काम भी किया है। लेकिन, इस सीरीज में जिन दो सितारों ने अपने अभिनय से चौंकाया है, वे हैं अपारशक्ति खुराना और सिद्धांत गुप्ता। बड़े भाई आयुष्मान खुराना की छाया में जीते रहे अपारशक्ति ने पहली बार परदे पर अपने अभिनय का असली रंग दिखाया है। अपनी काबिलियत वह बड़े परदे पर भी दिखाने की कोशिश करते रहे हैं लेकिन इस बार उन्हें मिला है विक्रमादित्य मोटवानी जैसा जौहरी जिसने उन्हें घिस घिसकर कोहिनूर बना दिया है। वह सीरीज के उस संवाद पर भी खरे उतरते हैं कि ‘यहां सबको बड़ा बड़ा बोलने में बहुत मजा आता है लेकिन जो चुप रहता है, वह लंबा चलता है।’ स्टाफ क्वार्टर से निकलकर स्टार क्वार्टर का सफर तय करने वाला अपारशक्ति का किरदार इस सीरीज का आधार है, उसी पर हिंदी सिनेमा में चलती सियासत बुनी जाती है। वह रूसियों के निशाने पर है लेकिन आल इंडिया रेडियो पर हिंदी फिल्मों गानों पर लगी पाबंदी के वक्त वही एक किरदार है जो भेष बदलकर हिंदी फिल्मी गाने रेडियो सिलोन तक पहुंचाता है। ये रेडियो स्टेशन अमेरिका ने अपने नियंत्रण में ले रखा है और इस पर शुरू होती है गीतमाला। सिनेमा को सॉफ्ट पावर के रूप में इस्तेमाल करने के रूस और अमेरिका दोनों के हथकंडों की झलक भी सीरीज में मिलती है।

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जुबली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सिद्धांत गुप्ता की सीटीमार एक्टिंग

बंटवारे के बाद की सियासत समझाने को सीरीज में सिद्धांत गुप्ता अभिनीत किरदार जय खन्ना है। वह अपने परिवार के साथ कराची से भागा और बंबई में आकर रिफ्यूजी या कैंपी कहलाया। अरमान उसके बड़े बड़े हैं, लेकिन घर का वह बागी है। रिफ्यूजी कैंप की डिस्पेंसरी में काम करने वाली नर्स उसे प्यार करती है। नर्स का पिता नेता बन चुका है तो अपनी बेटी से शादी की शर्त पर वह जय को स्टूडियो के लिए जगह भी दिलवाता है। जय जिससे प्यार करता है वह वही लखनऊ वाली तवायफ है जो अब बंबई आकर एक बड़े फाइनेंसर की दिलदार हो चुकी है। वह जय को समझाती है, ‘फिल्म बनाने के लिए किसी न किसी के साथ तो सोना ही होता है, किसी के साथ जिस्म से तो किसी के साथ ईमान से।’ वेब सीरीज ‘जुबली’ में सिद्धांत गुप्ता ने अपारशक्ति को बराबर की टक्कर दी है। और, इन दोनों की अभिनय कला को असल चुनौती मिलती है सुमित्रा कुमारी का किरदार निभा रहीं अदिति राव हैदरी से।

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जुबली रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अदिति के किरदार का असली त्रियाचरित्र

अदिति राव हैदरी का अपना एक आभामंडल है। सही किरदार और सही वेशभूषा मिले तो वह छोटे से छोटे किरदार में जान डाल देती रही हैं और यहां तो वेब सीरीज ‘जुबली’ की हीरोइन ही वही हैं। रॉय टाकीज पर मालिकाना हक की साझीदार सुमित्रा कुमारी को ये बर्दाश्त नहीं कि जमशेद खान की जगह उनके स्टूडियो का कोई अदना सा मुलाजिम मदन कुमार बन जाए। जमशेद खान उस दौर का अभिनेता है, जब ‘खान’ हीरो नहीं बन सकते थे। इसी खान पर खुद को न्यौछावर कर चुकी सुमित्रा कुमारी अब मदन कुमार बन चुके बिनोद को नीचा दिखाने, बर्बाद करने, जलील करने की सारी कोशिशें करती है। लेकिन, पासा उसके हक में जल्दी जल्दी गिरता नहीं है। सुमित्रा कुमारी का किरदार अदिति की अभिनय यात्रा की एक नई दमक है। गुजरे दौर के हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री का ये किरदार मौजूदा दौर की अभिनेत्रियों के लिए भी अदाकारी की एक ऐसी लकीर बनाता दिखता है जिसके पार जाना हर अभिनेत्री चाहेगी। सीरीज में वामिका गब्बी दूसरी दमदार अदाकारा हैं। उनकी शोखी का करिश्मा उनके पहले गाने से ही असर करने लगता है और इसके बाद जब भी वह परदे पर आती हैं, कहानी कोई न कोई चौंकाने वाला मोड़ लेती ही जाती है।

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जुबली रिव्.ू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

गालियां छोड़ हर विभाग अव्वल नंबर

वेब सीरीज ‘जुबली’ में अभिनेता अरुण गोविल भी नजर आए हैं। सीरीज की कास्टिंग जानदार है। छोटे से छोटे रोल के लिए कलाकार बहुत ठोंक बजाकर चुने गए हैं। जमशेद खान के मेकअपमैन से लेकर रिफ्यूजी कैंप में जय से अदावत रखने वाले गली के गुंडे तक की कास्टिंग बहुत सोच समझकर की गई है। फिल्म फाइनेंसर वालिया के रोल में राम कपूर सीरीज की गालियों का कोटा पूरा करते हैं। गालियां दूसरे किरदार भी सीरीज में देते हैं। हालांकि सीरीज से ये गालियां हटा दी जाएं तो न सिर्फ इसका असर बेहतर हो सकता है बल्कि ये पूरे परिवार के साथ देखी जा सकने वाली सीरीज का तमगा भी पा सकती है। सीरीज में काबिल ए तारीफ काम करने वालों में सिनेमैटोग्राफर प्रतीक शाह, कॉस्ट्यूम डिजाइनर श्रुत्ति कपूर, कला निर्देशक वाही शेख, योगेश बंसोडे, अब्दुल हामिद शेख व प्रीति गोले के अलावा इसकी एडीटर आरती बजाज का नाम भी सबसे आगे है।
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