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Review: काजोल की 'वीआईपी 2: ललकार' में कुछ भी नहीं है खास
रवि बुले
Updated Sat, 19 Aug 2017 07:22 AM IST
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'वीआईपी 2' फिल्म रिव्यू
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निर्माताः धनुष/के.एस. थानु
निर्देशकः सौंदर्या रजनीकांत
सितारेः धनुष, काजोल
रेटिंग: *
साउथ के सुपरस्टार धनुष और बॉलीवुड की स्टार काजोल की यह फिल्म कहने मात्र को वीआईपी है। इसमें कुछ भी खास नहीं है। मूल तमिल में बनी फिल्म हिंदी में डब करके रिलीज की गई है। यह बुरी तरह निराश करती है। इसकी कहानी घिसी-पिटी और इसमें डाले गए फिल्मी मसाले बेस्वाद हैं। न रोमांस है और न ऐक्शन। कॉमेडी ऐसी कि आप पक जाएं। भावनाओं के स्तर पर भी फिल्म नहीं छूती।
पढ़ें: Review: कुछ मीठी कुछ फीकी है 'बरेली की बर्फी'
यह कहानी युवा इंजीनियर रघुवरन (धनुष) की है, जो एक छोटी कंपनी में काम करते हुए भी बेस्ट इंजीनियर का अवार्ड जीतता है और तब साउथ में सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी की मालकिन वसुंधरा (काजोल) उसे जॉब ऑफर करती है। जिसे रघुवरन ठुकरा देता है। वह अपने जैसे युवा एक हजार इंजीनियरों का ग्रुप, वीआईपी चलाता है और ग्रुप को कंस्ट्रक्शन की दुनिया में ऊंचाई पर ले जाने के ख्वाब देखता है। रघुवरन की ना से वसुंधरा के अहंकार को ठेस पहुंचती है और वह उसके रास्ते में कर कदम पर मुश्किलें पैदा करना शुरू कर देती है।
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निर्देशकः सौंदर्या रजनीकांत
सितारेः धनुष, काजोल
रेटिंग: *
साउथ के सुपरस्टार धनुष और बॉलीवुड की स्टार काजोल की यह फिल्म कहने मात्र को वीआईपी है। इसमें कुछ भी खास नहीं है। मूल तमिल में बनी फिल्म हिंदी में डब करके रिलीज की गई है। यह बुरी तरह निराश करती है। इसकी कहानी घिसी-पिटी और इसमें डाले गए फिल्मी मसाले बेस्वाद हैं। न रोमांस है और न ऐक्शन। कॉमेडी ऐसी कि आप पक जाएं। भावनाओं के स्तर पर भी फिल्म नहीं छूती।
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यह कहानी युवा इंजीनियर रघुवरन (धनुष) की है, जो एक छोटी कंपनी में काम करते हुए भी बेस्ट इंजीनियर का अवार्ड जीतता है और तब साउथ में सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी की मालकिन वसुंधरा (काजोल) उसे जॉब ऑफर करती है। जिसे रघुवरन ठुकरा देता है। वह अपने जैसे युवा एक हजार इंजीनियरों का ग्रुप, वीआईपी चलाता है और ग्रुप को कंस्ट्रक्शन की दुनिया में ऊंचाई पर ले जाने के ख्वाब देखता है। रघुवरन की ना से वसुंधरा के अहंकार को ठेस पहुंचती है और वह उसके रास्ते में कर कदम पर मुश्किलें पैदा करना शुरू कर देती है।
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काजोल और धुनष
कहानी धुनष ने लिखी है। साफ है कि वह अच्छे कहानीकार नहीं हैं। वीडियो पर अपने ससुर रजनीकांत की फिल्में देख-देख कर वह जो कहानी और सीन गढ़ सकते थे, उन्होंने 'वीआईपी-2' में गढ़े। धनुष के अंदाज से पता चलता है कि वह रजनीकांत की जगह लेने को आतुर हैं। लेकिन इस फिल्म में वह बुरी तरह नाकाम हैं। 'वीआईपी-2' में कई कमजोरियां हैं। सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि नायक रघुवरन शादीशुदा है और नायिका वसुंधरा उम्रदराज।
पढ़ें: 'भल्लालदेव' पर भारी पड़ेगा 'नेने राजू नेने मंत्री' का राणा
कारपोरेट लड़ाइयों को धनुष ने ऐसे समेटा है मानों वे बच्चों का खेल होती हैं। अभिनय के स्तर पर न तो धनुष असर पैदा करते हैं और न काजोल किसी तरह आकर्षित करती हैं। हिंदी के दर्शक समझ नहीं पाएंगे कि आखिर काजोल ने क्या सोच कर यह फिल्म की? निर्देशक के रूप में ऐश्वर्या रजनीकांत की यह दूसरी फिल्म है, वह इसमें भी कोई कमाल या नयापन कहीं नहीं दिखा पातीं। इसे आप वक्त गुजारने के लिए भी नहीं देख सकते।
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कारपोरेट लड़ाइयों को धनुष ने ऐसे समेटा है मानों वे बच्चों का खेल होती हैं। अभिनय के स्तर पर न तो धनुष असर पैदा करते हैं और न काजोल किसी तरह आकर्षित करती हैं। हिंदी के दर्शक समझ नहीं पाएंगे कि आखिर काजोल ने क्या सोच कर यह फिल्म की? निर्देशक के रूप में ऐश्वर्या रजनीकांत की यह दूसरी फिल्म है, वह इसमें भी कोई कमाल या नयापन कहीं नहीं दिखा पातीं। इसे आप वक्त गुजारने के लिए भी नहीं देख सकते।