London Files Review: अर्जुन रामपाल का लक्ष्य से चूका निशाना, ‘लंदन फाइल्स’ देखने से पहले यहां पढ़ें पूरा रिव्यू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिनेमाघर खुलने के साथ ही ओटीटी के सामने चुनौती फिर से दर्शकों को मोबाइल और स्मार्ट टीवी पर रोक कर रखने की है। दर्शक घरों से बाहर निकलकर मनोरंजन की बड़े परदे की दुनिया की तरफ भाग रहे हैं और ओटीटी पर अब भी अपराध कथाओं के जाने पहचाने तेवर ही बार बार दोहराए जाते नजर आ रहे हैं। जी5 पर वेब सीरीज ‘रंगबाज’ से पहचान बनाने वाले निर्देशक सचिन पाठक का नाम वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ के साथ जुड़ा देखने के बाद उत्सुकता इस बात की रही कि क्या अपराध की दुनिया का कोई नया रूप दर्शकों के सामने पेश करने में कामयाब होंगे? अर्जुन रामपाल की सीरीज में मौजूदगी से ये आस भी बंधती है। सीरीज की शुरुआत होती भी काफी दमदार तरीके से।
फॉर्मूला अपराधी कौन?
तमाम दूसरी अपराध सीरीज की तरह ही अर्जुन रामपाल की ‘लंदन फाइल्स’ में भी कोशिश आखिर तक इस बात का सस्पेंस बनाए रखने की है कि अपराधी कौन? तनाव बनाए रखने की कोशिशे हैं। लंदन की पृष्ठभूमि का अपना एक अलग रहस्यमयी आकर्षण है। लेकिन तीसरे एपीसोड तक आते आते रास्ते घुमावदार होने लगते हैं। और, समझ में आने लगता है कि एक मजबूत प्लॉट पर कहानी तो अपराध की खड़ी करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसकी लेखन टीम और निर्देशन टीम के बीच में तारत्मय गड़बड़ा गया है। क्राइम थ्रिलर में जैसे ही दर्शक को ये समझ आने लगे कि अब आगे क्या होने वाला है, सीरीज देखने का मजा जाता रहता है।
लापता का पता लगाने की कहानी
वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ को देखने का इकलौता आकर्षण इसमें अर्जुन रामपाल की मौजूदगी है। धरने प्रदर्शनो के माहौल से शुरू होने वाली इस वेब सीरीज की कहानी लंदन पुलिस के डिटेक्टिव ओम सिंह की कहानी है। बाहर से आकर बसने वालों के खिलाफ बन रहे कानून को लेकर तलवारें खिंची है। और, इसी बीच शहर की प्रतिष्ठित और धमकदार शख्सीयत अमर रॉय की बेटी लापता हो जाती है। वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ में इसके बाद पुलिस वाले को लापता बेटी का पता लगाना है। उसकी अपनी एक कहानी की परतें धीरे धीरे खुलनी शुरू होती है। और, साथ ही इसमें तमाम ऐसी बातें जुड़नी शुरू होती हैं, जो एक वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ को अपने शुरुआती इरादे से भटकाने लगती हैं।
लक्ष्य से भटकी कहानी
अर्जुन रामपाल की वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ का ज्यादा प्रचार प्रसार भी इसके ओटीटी वूट ने किया नहीं है। सत्य कथा और मनोहर कहानियां जैसी पत्रिकाओं को देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली पत्रिकाएं बना चुके देश में अपराध कथाओं का आकर्षण शुरू से रहा है लेकिन मामला आकर अटकता है दर्शक की पसंद और वेब सीरीज बनाने वाले की पसंद के बीच बन सकने वाले पुल पर। वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ इस पुल के बीच आकर रुक जाती है। इसे समझ नहीं आता कि वह फोकस किस पर करे, ओम सिंह की काबिलियत पर या कि उसके अपने अंदरूरनी झंझावातों पर।
अर्जुन रामपाल पर फोकस
अपने भीतर के तूफान से जूझते एक पुलिस वाले के किरदार में अभिनेता अर्जुन रामपाल खुद को फिट करने की पूरी कोशिश करते हैं। उनकी मेहनत पर दाद भी निकलती है, लेकिन उनके किरदार में ऐसा कुछ है नहीं जो सीरीज खत्म करने के बाद आपके साथ रह जाए। यही हाल पूरब कोहली का है। सीरीज देखने से ये भी लगता है कि इसके कलाकारों की खास दिलचस्पी अपने अपने किरदारों में है नहीं, वे बस अपना काम कर रहे हैं। पूरब कोहली का तो काम भी ज्यादा नहीं है। हां, जितना है उतना वह ईमानदारी से निभाने की कोशिश करते दिखते हैं। सागर आर्या ने बेहतर काम किया है। उनका अभिनय आने वाले दिनों में कुछ अच्छे किरदार दिखा सकता है। अलबत्ता, सपना पब्बी का होना ना होना वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ पर खास फर्क डालता नहीं दिखता।
देखें कि न देखें
अगर आप उन लोगों में से हैं जो वीकएंड पर स्मार्ट टीवी ऑन करके बस कुछ भी देखने नहीं बैठ जाते हैं तो आपके लिए सलाह यही है कि वेब सीरीज ‘लंदन फाइल्स’ पर समय खराब न करें। हां, अगर आप अर्जुन रामपाल के बहुत बड़े प्रशंसक हैं तो आपके लिए ये सीरीज टाइम पास हो सकती है।