Mardani 3 Movie Review: रानी मुखर्जी की दमदार वापसी, सधा हुआ अभिनय; हिस्सों में चौंकाती है कहानी
Mardani 3 Movie Review: फिल्म ‘बॉर्डर 2’ को टक्कर देने के लिए आज सिनेमाघरों में फिल्म ‘मर्दानी 3’ रिलीज हुई। जानिए, कैसी है रानी मुखर्जी की यह फिल्म? पढ़िए फिल्म ‘मर्दानी 3’ का रिव्यू।
विस्तार
‘मर्दानी 3’ रानी मुखर्जी की सबसे पसंद की जाने वाली फ्रैंचाइजी का नया हिस्सा है। पहले दो भागों से अलग यह फिल्म छोटी बच्चियों पर हो रहे अपराध, उनकी सुरक्षा और पुलिस की मेहनत को सामने रखती है। फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है। शुरुआत से ही फिल्म का माहौल गंभीर है और कहानी एक ऐसे अपराध के बारे में है, जिसे रोकना आसान नहीं दिखता।
कहानी
फिल्म में शिवानी NIA के साथ काम कर रही होती है और शुरुआत में ही उसे एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस मिलता है। एक बड़े अधिकारी की बेटी और उसी घर की नौकरानी की बेटी अचानक गायब हो जाती हैं। यह घटना पुलिस पर तुरंत दबाव बना देती है। इसी समय देश के कई हिस्सों से 8-12 साल की कुल 93 बच्चियां भी लापता पाई जाती हैं। शुरुआत में ये मामले अलग लगते हैं, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर शिवानी को पता चलता है कि इसके पीछे एक संगठित मानव तस्करी गिरोह है। इस गिरोह की मुखिया एक बुजुर्ग महिला अम्मा है, जो पूरे नेटवर्क को चलाती है।
जांच के दौरान यह भी सामने आता है कि इस गिरोह का संबंध एक भिखारी गैंग से भी है, जो मजबूरी का दिखावा करके बड़े स्तर पर मेडिकल फील्ड में गैर-कानूनी काम करता है। शिवानी अपनी टीम के साथ सबूत जुटाती है, नेटवर्क का पता लगाती है और बच्चियों को बचाने के लिए लगातार कार्रवाई करती है।
अभिनय
रानी मुखर्जी (ACP शिवानी रॉय): यह फिल्म रानी की ही फिल्म है। उनका अभिनय बहुत मजबूत है। चाहे जांच का तनाव हो, गुस्से वाले सीन हों या पूरी स्थिति की गंभीरता हर जगह रानी का कंट्रोल और स्क्रीन-प्रेजेंस साफ दिखता है। उन्होंने एक पुलिस ऑफिसर की थकान, जज्बा और गुस्सा, सबको बिना ओवरएक्टिंग के दिखाया है।
मल्लिका प्रसाद (अम्मा): इस बार विलेन का किरदार यानी अम्मा फिल्म की जान है। मल्लिका प्रसाद का काम बहुत प्रभावी है। वह शांत भी दिखती हैं, खतरनाक भी और उनकी मौजूदगी से ही कई सीन भारी लगते हैं। रानी और मल्लिका के बीच की टक्कर फिल्म को और ऊंचा ले जाती है।
जानकी बोड़ीवाला (फातिमा): ‘शैतान’, ‘वश’ और ‘छेल्लो दिवस’ से पहचान बनाने वाली जानकी बोड़ीवाला इस फिल्म में भी अहम रोल में नजर आती हैं। वह शिवानी की टीम का हिस्सा होती हैं और अपने सीन में सहज दिखती हैं। उनके किरदार में एक हल्की-सी कॉम्प्लेक्सिटी भी है, जो उन्हें बाकी टीम से थोड़ा अलग बनाती है। उनका रोल सीधा-सादा नहीं है और फिल्म में उनका योगदान ध्यान खींचता है।
अन्य कलाकार: प्रजेश कश्यप फिल्म में रामानुजन के रूप में दिखते हैं और उनका अंदाज प्रभावी है। जिस भी सीन में आते हैं, उनकी मौजूदगी मजबूत महसूस होती है। उन्होंने विलेन के किरदार को सादगी और दमदार अंदाज के साथ निभाया है। बाकी सभी किरदार अपने हिस्से का काम ठीक तरह से निभाते हैं। कहीं भी यह नहीं लगता कि कोई भूमिका ज्यादा चढ़ी हुई है।
निर्देशन
'मर्दानी 3' का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है। उनका डायरेक्शन सीधा और कंट्रोल में है। वे कहानी को भटकने नहीं देते और फिल्म की रफ्तार ठीक बनी रहती है। केस की गंभीरता भी बिना जरूरत का ड्रामा बढ़ाए दिखाई गई है, जिससे फिल्म असर छोड़ती है। अभिराज पहले 'बैंड बाजा बारात', 'गुंडे', 'सुल्तान', 'जब तक है जान' और 'टाइगर 3' जैसी फिल्मों में असिस्टेंट डायरेक्टर रहे हैं। 'मर्दानी 3' उनकी पहली बड़ी डायरेक्टेड फिल्म है।
तकनीकी पहलू
बैकग्राउंड स्कोर कहानी की टेंशन बढ़ाता है। कैमरा वर्क जगहों और माहौल को वास्तविकता के करीब रखता है। एडिटिंग अच्छी है, फिल्म खिंचती नहीं। एक्शन कम है लेकिन असरदार है, ज्यादा दिखावा नहीं है।
कमजोरियां
कहानी का ढांचा पहले की दोनों फिल्मों जैसा लग सकता है। कुछ मोड़ आसानी से समझ में आ जाते हैं और इंटरवल से पहले वाला हिस्सा थोड़ा अनुमान लगाने लायक लगता है। सस्पेंस के कुछ हिस्से उतने चौंकाने वाले नहीं हैं जितनी उम्मीद होती है। इमोशनल सीन्स जल्दी निपटा दिए गए महसूस होते हैं, थोड़ी और गहराई होती तो असर ज्यादा होता।
अगर आप रानी मुखर्जी का दमदार अभिनय देखना चाहते हैं, साथ ही गंभीर और सच्चाई से भरी क्राइम कहानियां पसंद करते हैं और ऐसी फिल्में देखते हैं, जिनमें ड्रामा से ज्यादा केस की पकड़ मजबूत हो, तो 'मर्दानी 3' आपके लिए जरूर देखने लायक है।