Morbius Review: नोबल ठुकराने वाले वैज्ञानिक की डरा देने वाली कहानी, ये है बॉक्स ऑफिस का रौद्रम् रणम् रुधिरम्
किसी बहुत लोकप्रिय कथा संसार में नए चरित्रों को लाना आसान नहीं होता। मार्वल का अपना सिनेमाई संसार है, जिसे इसके प्रशंसक मार्वल सिनेमाई ब्रह्मांड यानी मार्वल सिनेमैटिक यूनीवर्स के नाम से पुकारते हैं। इस संसार में आयरमैन से लेकर हल्क, थॉर, कैप्टन अमेरिका, कैप्टन मार्वल और स्पाइडरमैन जैसे किरदार धूम मचाते रहे हैं। इनमें से स्पाइडरमैन का मुकाबला अक्सर ऐसे लोगों से होता रहा है, जिन्होंने विज्ञान से हासिल शक्तियों का प्रयोग जाने-अनजाने में दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए शुरू कर दिया। स्पाइडरमैन की दुनिया मार्वल कॉमिक्स से तो निकली है, लेकिन इसे बसाया है सोनी पिक्चर्स ने। इस बार मार्वल को साथ मिला सहयोगी कंपनी कोलंबिया पिक्चर्स का और तैयार हुआ है एक नया किरदार ‘मॉरबियस’। कहने को यह रक्त पिपासु अलौकिक शक्तियों का मालिक है, लेकिन वह सुपरहीरो बनेगा या सुपरविलेन, इसका पता मार्वल सिनेमैटिक यूनीवर्स की आने वाली फिल्मों में चलेगा। अभी तो यह बस विज्ञान के एक खराब मालिक बनने की कहानी है।
‘बैटमैन’ के लिए खतरा बना ‘मॉरबियस’
फिल्म ‘मॉरबियस’ विदेशों में तमाम लोगों ने देखी और इंटरनेट पर इसके बारे में दिखी प्रतिक्रियाओं को देखकर पहली बार तो यही लगा कि फिल्म नहीं देखनी चाहिए। लेकिन, फिल्म देखने के बाद समझ ये नहीं आता कि आखिर इस अलग तरह के प्रयोग से पश्चिमी समालोचकों को दिक्कत कहां है? क्या यह ‘बैटमैन’ प्रेमी लोगों की असुरक्षा की भावना है या फिर डीसी कॉमिक्स पसंद वालां को इस बात की जलन है कि मार्वल के पास भी चमगादड़ों से शक्ति पाने वाला एक किरदार आ गया है। वजह जो भी हो, लेकिन फिल्म ‘मॉरबियस’ एक अच्छी टाइमपास फिल्म है। फिल्म में खूनखराबा है, लेकिन यह फिल्म ‘डेडपूल’ सीरीज की फिल्मों की तरह हिंसक भी नहीं है।
विज्ञान वरदान भी, अभिशाप भी
कहानी सीधी, सहज और सपाट है। वजीफे की बदौलत पढ़ाई करके कृत्रिम खून बनाने का नोबल पुरस्कार जीतने वाला और उसे ठुकरा देने वाला वैज्ञानिक डॉ. माइकल मॉरबियस बचपन से आनुवंशिक बीमारियां झेल रहा है। न ठीक से चल सकता है। न ठीक से लड़ सकता है और न ही ठीक से प्यार कर सकता है। एक प्रयोग उसकी जिंदगी बदल देता है, बस साथ में अभिशाप यह है कि उसे लगातार खून पीते रहना है। और, उसके इस अभिशाप को वरदान समझ लेने वाला एक इंसान और भी है, जिससे मॉरबियस बचपन से प्यार करता रहा है।
जेरेड की जानदार अदाकारी
डॉ. माइकल मॉरबियस की इस कहानी में दूसरे किरदार भी हैं। लेकिन, पहले बात लीड किरदार को निभाने वाले कलाकार जेरेड लोटो की। बैसाखियों के सहारे चलने वाले एक लुंज-पुंज वैज्ञानिक के किरदार से लेकर डीएनए में परिवर्तन के बाद मिले अद्भुत शरीर सौष्ठव वाले मॉरबियस के किरदार तक जेरेड ने एक चुनौती को दमदार तरीके से जिया है। उनके चेहरे के हावभाव तो किरदार में जान डालते ही हैं, उनकी देह भाषा इस किरदार को और प्रामाणिक बनाती है। चमगादड़ को मिली जन्मजात नियामत यानी कि रडार तकनीक के प्रयोग से आवाजों को सुन पाना और लोगों का पता लगा पाना इस किरदार की खूबी है। और इस मायने में न सिर्फ ये कहानी अतरंगी है, बल्कि मार्वल सिनेमैटिक यूनीवर्स को एक नई दिशा में भी ले जाती है।
माइकल और माइलो की कहानी
अब बात करते हैं फिल्म ‘मॉरबियस’ के दूसरे किरदार यानी माइलो मॉरबियस, मार्टीन बैनक्राफ्ट और एमिल निकलस की। माइलो और माइकल ने बचपन साथ बिताया। हमउम्र किशोरों की फब्तियां और लातें झेलीं। दिव्यांग बच्चों की शाला चलाने वाले एमिल निकलस उनके अभिभावक हैं। माइकल को उनका प्यार ज्यादा मिलता है। माइलो इससे चिढ़ता है। माइकल जब अपनी शारीरिक कमजोरियों से निजात पाने का फॉर्मूला पा लेता है तो माइलो को भी यही चाहिए। दिक्कत यहां इसके साइड इफेक्ट्स की है, लेकिन माइकल के मना करने के बाद भी माइलो इसे अपना लेता है। एमिल और मार्टिन रास्ते में आते हैं। दोनों माइकल को बहुत प्यार करते हैं। प्रेम की यह तड़प पिता की भी है और प्रेमिका की भी। प्रेम की कमी से इंसान के पिशाच बन जाने का विचार ही फिल्म ‘मॉरबियस’ का असल डीएनए है। मार्टिन के किरदार में एड्रिया खूब जमी हैं। निकलस बने जेरेड हैरिस से हमदर्दी होती है। माइलो के किरदार में मैट स्मिथ ने शानदार काम किया है और कई मौकों पर वह फिल्म के नायक पर भारी भी पड़े हैं।
एमसीयू का दमदार विस्तार
फिल्म ‘मॉरबियस’ औसत से अच्छी बन पड़ी फिल्म है। इसे इस मुकाम तक पहुंचाने में इसके सिनेमैटोग्राफर ओलिवर वूड का अहम योगदान है। चमगादड़ों से मॉरबियस की पहली मुलाकात के दृश्य से ही ओलिवर दर्शकों को अपने साथ ले लेते हैं। और, फिर पूरी फिल्म दर्शक उनके कैमरे के साथ ही ऊंचाइयों और गहराइयों की नाप लेते रहते हैं। इस दौरान जॉन एक्स्ट्रैंड का संगीत फिल्म की सांसें बन जाता है। फिल्म ‘मॉरबियस’ की भावनाओं और इसके किरदारों के रूप-प्रतिरूप के बीच सामंजस्य बैठाए रखने का काम फिल्म के संगीत ने बखूबी किया है। फिल्म की कमियां गिनती की हैं। एक तो यह कि यह फिल्म अधूरी-सी लगती है और एंड क्रेडिट्स में इसकी भरपाई करने की कोशिश भी की गई है। दूसरी यह कि अगर यह फिल्म स्पाइडरमैन की कहानी का हिस्सा बनने वाली है तो फिर इसमें सिर्फ पीटर पार्कर के अखबार के अलावा कुछ संदर्भ और भी होने चाहिए थे।
