Ramayan Animation Movie: 32 साल बड़े परदे पर लौट रही एनीमेशन रामायण, अरुण गोविल के अलावा इन सितारों की आवाजें
रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस के पहले हिंदी संस्करण में 'रामायण' के 'राम' यानी गोविल ने ही अपनी आवाज दी थी। इसके साथ ही अन्य किरदारों को बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने अपनी आवाज दी थी।
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रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस राम 1993 की एक एनिमेशन फिल्म है, जो जापान और भारत द्वारा सह-निर्मित है। युगो साको द्वारा निर्मित और निर्देशित यह फिल्म भारतीय महाकाव्य रामायण पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन कोइची सासाकी और राम मोहन ने किया था, जिसमें वनराज भाटिया ने संगीत दिया था। यह फिल्म अब सिनेमाघरों में वापस आ रही है। 1993 की जापानी-भारतीय एनीमे क्लासिक 24 जनवरी, 2025 को पूरे भारत में बड़े पर्दे पर आएगी।
नया हिंदी डब वर्जन किया जाएगा रिलीज
यह फिल्म भारत में पहली बार 24वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव इफ्फी में दिखाई गई थी। इसे 1993 के वैंकूवर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भी दिखाया गया था। इसके बाद, 1990 के दशक के अंत में एक हिंदी डब संस्करण जारी किया गया था। हालांकि, आगामी 4K रिलीज में एक नया हिंदी डब होगा। पहली बार यह फिल्म हिंदी, तमिल और तेलुगु के साथ-साथ इसके मूल अंग्रेजी संस्करण में भी उपलब्ध होगी।
हिंदी संस्करण में इन सितारों की आवाज
रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस के पहले हिंदी संस्करण में 'रामायण' के 'राम' यानी गोविल ने ही अपनी आवाज दी थी। इसके साथ ही अन्य किरदारों को बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने अपनी आवाज दी थी। वहीं अमरीश पुरी 'रावण' की आवाज बने थे। दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा सीरीज के कथावाचक बने।
कैसे आया 'रामायण' एनीमेशन फिल्म बनाने का विचार
दरअसल, 1983 में उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद के पास डॉ. बी.बी. लाल द्वारा की गई खुदाई के बारे में एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'द रामायण रेलिक्स' पर काम करते समय युगो साको को रामायण की कहानी के बारे में पता चला। उन्हें रामायण की कहानी इतनी पसंद आई कि उन्होंने इस विषय पर गहन शोध किया और जापानी में रामायण के 10 संस्करण पढ़े। रामायण पढ़ने के बाद वे इसे एनीमेशन में बदलना चाहते थे, क्योंकि उन्हें नहीं लगता था कि लाइव-एक्शन फिल्म रामायण के वास्तविक सार को पकड़ सकती है। उन्होंने इंटरव्यू में फिल्म बनाने के बारे में कहा था, 'क्योंकि राम भगवान हैं, इसलिए मुझे लगा कि उन्हें किसी अभिनेता द्वारा दिखाए जाने के बजाय एनीमेशन में दिखाना बेहतर होगा।'
फिल्म को बनाने के लिए कैसे साथ आए भारत-जापान
25 अप्रैल 1983 को युगो साको की 'द रामायण रेलिक्स' डॉक्यूमेंट्री के बारे में खबर प्रकाशित होने के बाद विश्व हिंदू परिषद ने हस्तक्षेप किया और विरोध पत्र दिल्ली में जापानी दूतावास को मिला, जिसमें कहा गया था कि कोई भी विदेशी मनमाने ढंग से रामायण का सिनेमाई रूपांतरण नहीं कर सकता, क्योंकि यह भारत की महान राष्ट्रीय विरासत है। समस्या हल होने के बाद युगो साको ने वीएचपी और सरकार के सामने एक एनिमेटेड रामायण का विचार रखा। उन्होंने उन्हें बताया कि एनीमेशन जापान में एक गंभीर कला रूप है और यह रामायण को व्यापक वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने में मदद करेगा। सरकार ने शुरू में सहमति व्यक्त की, लेकिन बाद में द्वि-राष्ट्र सहयोग के उनके प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि रामायण एक बहुत ही संवेदनशील विषय है और इसे कार्टून के रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता है। कुछ कारणों से भारत में इसके निर्माण की संभावनाओं को खत्म कर दिया, लेकिन भारत सरकार या किसी विशेष धार्मिक समूह द्वारा फिल्म के निर्माण और वितरण पर कोई विरोध या प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
जापान में हुआ फिल्म का निर्माण
कोई विकल्प और समर्थन न होने के कारण फिल्म का निर्माण जापान में ही करने का निर्णय लिया गया और दोनों देशों के कलाकारों के साथ मिलकर इसका निर्माण किया गया। टीईएम कंपनी लिमिटेड ने निर्माण का भार संभाला और एक नया प्रोडक्शन स्टूडियो निप्पॉन रामायण फिल्म कंपनी लिमिटेड की स्थापना की गई। फिल्म का मुख्य एनीमेशन 1990 में 450 कलाकारों के साथ शुरू हुआ। भारतीय एनिमेटरों ने अपने जापानी साथियों को फिल्म में दर्शाए गए भारतीय रीति-रिवाजों और परंपराओं के बारे में बताया जैसे कि धोती कैसे पहनी जाती है और बच्चे अपने बड़ों से कैसे आशीर्वाद लेते हैं। आखिरकार फिल्म बनकर तैयार हुई, जिसके हिंदी संस्करण को दिग्गज बॉलीवुड अभिनेताओं की आवाज के साथ डबिंग होने के कारण खूब पसंद भी किया गया।
भारत में फिल्म की रिलीज
हिंदी डब संस्करण 1990 के दशक के अंत में रिलीज किया गया था। फिल्म को बड़े पैमाने पर सिनेमाघरों में रिलीज नहीं किया गया था, क्योंकि राम जन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था और फिल्म विवादों में घिर गई थी। हालांकि, अप्रैल 1997 में भारत के कुछ हिस्सों में इसे सीमित रूप से सिनेमाघरों में रिलीज किया गय। इसे जापान में टोक्यो अंतर्राष्ट्रीय फैंटास्टिक फिल्म फेस्टिवल में 3 नवंबर 1997 को प्रदर्शित किया गया था और 10 नवंबर 1997 को योकोहामा में योकोहामा लैंडमार्क हॉल में दिखाया गया। बाद में इसे टीवी चैनलों कार्टून नेटवर्क और पोगो पर बार-बार जारी किया गया।