‘क्योंकि सास…’ फेम अपरा मेहता की टीवी पर वापसी, कमबैक पर बाेलीं- डेली शो करने को लेकर थोड़ी दुविधा में थी
Apara Mehta Interview: छह महीने के छोटे से ब्रेक के बाद टीवी की जानी-मानी अभिनेत्री अपरा मेहता एक बार फिर छोटे पर्दे पर वापसी कर रही हैं। वह सीरियल 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' में नजर आएंगी। नए सीरियल और अपने करियर को लेकर अपरा मेहता ने कई बातें अमर उजाला के साथ साझा कीं।
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हाल ही में टीवी की चर्चित अभिनेत्री अपरा मेहता ने अमर उजाला डिजिटल से अपने नए सीरियल 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' को लेकर लंबी बातचीत की। वह इस सीरियल में कैसा किरदार निभा रही हैं? खुद इस किरदार से कितना रिलेट करती हैं? साथ ही अपने हिट और पुराने सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ को लेकर भी वह कई बातें साझा करती हैं। पढ़िए अपरा मेहता से हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
आपने नए सीरियल के लिए किस वजह से हामी भरी?
मैंने अपने इतने लंबे करियर में लगभग हर चैनल के साथ काम किया है। यहां तक कि ऐसे चैनल्स के साथ भी जो आज बंद हो चुके हैं। लेकिन इस चैनल के साथ मेरा ये पहला अनुभव है। जब मुझे 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' सीरियल का कॉन्सेप्ट सुनाया गया, मेरे किरदार के बारे में बताया गया, तभी मुझे महसूस हुआ कि ये रोल करना चाहिए।
आजकल कई कलाकार वेब सीरीज कर रहे हैं। क्या आप टीवी को ज्यादा महत्व देती हैं?
मैं खुद कंफ्यूज थी कि डेली सीरियल करूं या नहीं। आजकल वेब प्लेटफॉर्म पर भी अच्छा काम हो रहा है। लेकिन जैसे ही मैंने इस सीरियल की कहानी गहराई समझी, तो मुझे लगा कि ये फैसला सही है। इस मौके को छोड़ना नहीं चाहिए।
'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' में क्या खास है? इसमें आपका रोल क्या है?
जब आप मुझे इस शो में देखेंगे, तो मेरा गेटअप देखकर अच्छा लगेगा। सच कहूं तो मुझे खुद को इस अवतार में देखकर बहुत खुशी हुई। इतने साल बाद भी अगर कोई किरदार आपको नया महसूस कराए, तो वो एक एक्टर के लिए बहुत बड़ी बात होती है। मेरा किरदार सीरियल में घर की हेड का है। परिवार में उसका मान-सम्मान है। लेकिन वो काफी रूढ़िवादी है, परंपराओं में विश्वास रखती है। उन्हें लगता है कि अगर रीति-रिवाज निभाए जाएंगे, तो ही परिवार एकजुट रहेगा। हां, वो थोड़ी पुरानी सोच की है। उसका मानना है कि हमारे यहां जो हमेशा से होता आया है, वही सही है। बदलाव को स्वीकार करना उसके लिए आसान नहीं है, लेकिन वो बुरी या गलत इंसान नहीं है। यही इस किरदार की सबसे दिलचस्प बात है।
असल जिंदगी में आपकी सोच क्या है?
मैं मुंबई की गुजराती हूं। बहुत प्रोग्रेसिव परिवार से आती हूं। मेरे लिए ये किरदार निभाना थोड़ा चैलेंजिंग जरूर है। लेकिन एक कलाकार के तौर पर ऐसे रोल करना जरूरी होता है। इस किरदार का ग्राफ बहुत बैलेंस्ड है। आगे चलकर उसका सफर ऑडियंस को जरूर पसंद आएगा। वो धीरे-धीरे खुलेगी और बदलेगी और यही जर्नी लोगों को सीरियल से जुड़कर रखेगी।
क्या आपको लगता है कि 21वीं सदी में आकर भी समाज में बदलाव आया है?
हम 21वीं सदी में काफी आगे आ चुके हैं। लेकिन अब बहुत सी पुरानी प्रथाओं को बदलने की जरूरत है। महिलाओं को पढ़ाई का मौका मिलना चाहिए, उन्हें आत्मनिर्भर होना चाहिए। शादी के बाद भी एक औरत अपने पैरों पर खड़ी रह सकती है। हर महिला को अपने हुनर को आगे बढ़ाने और खुद के लिए कुछ करने की आजादी मिलनी चाहिए।
आज भी टीवी को सिनेमा की तरह अहमियत नहीं मिलती है, इस पर आपका क्या कहना है?
मैं एक टीवी एक्टर हूं, मुझे पूरा भरोसा है कि टीवी की पहुंच आज भी सबसे ज्यादा है। हमारी मॉरल रिस्पॉन्सिबिलिटी बनती है कि हम समाज को वही दिखाएं जो आज के समय की सच्चाई है। मैं गुजराती थिएटर के जरिए दुनिया भर में परफॉर्म करती हूं। मैंने देखा है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय भी इंडियन टीवी को बहुत फॉलो करते हैं। कई बार फिल्मों से भी ज्यादा सीरियल को पसंद करते हैं। ऐसे में हमें सीरियल में आज का भारत दिखाना चाहिए। जहां महिलाएं घर और काम दोनों को बराबरी से संभाल रही हैं।
‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में आपने सविता का किरदार निभाया था। यह सीरियल आपके करियर में क्या मायने रखता है?
इस सीरियल ने इंडियन टेलीविजन का इतिहास ही बदल दिया। इसने टीवी को ग्लोबल पहचान दिलाई। इतने बड़े और यादगार सीरियल का हिस्सा होना मेरे लिए हमेशा गर्व की बात रहेगी। ‘क्योंकि…’ मेरे दिल के बहुत करीब है। मैं चाहती हूं कि ये सीरियल हमेशा लोगों की यादों में बसा रहे।