Exclusive: सीरियल ‘ऑफिस ऑफिस’ की वापसी, क्या नजर आएंगे पंकज कपूर? निर्देशक उमेश मेहरा ने साझा की खास बातें
Director Umesh Mehra Exclusive Interview: पंकज कपूर स्टारर टीवी सीरियल ‘ऑफिस ऑफिस’ आज भी दर्शकों को याद है। इस सीरियल का दूसरा सीजन इन दिनों दूरदर्शन पर टेलीकास्ट हो रहा है। क्या इस बार भी शो में पंकज कपूर हैं? और कहानी में क्या-क्या नए बदलाव हुए हैं? अमर उजाला से हुई खास बातचीत ने डायरेक्टर उमेश मेहरा ने इस सीरियल से जुड़ी बातें साझा की हैं।
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टीवी की दुनिया में बहुत कम सीरियल ऐसे हैं, जिनके किरदार लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए। ‘ऑफिस ऑफिस’ सीरियल उन्हीं में से एक था। इस सीरियल में पंकज कपूर, मनोज पाहवा, हेमंत पांडे, संजय मिश्रा और बाकी किरदार सिर्फ कॉमेडी नहीं करते थे बल्कि सरकारी सिस्टम की सच्चाई दिखाते थे। करीब दो दशक बाद अब यह कल्ट सीरियल नए अंदाज में लौट रहा है। इस बार दर्शकों के लिए शो में क्या कुछ नया है, बता रहे हैं डायरेक्टर उमेश मेहरा।
सीरियल के कलाकारों पर दी निर्देशक ने खास जानकारी
डायरेक्टर उमेश अपने नए सीरियल ‘ऑफिस ऑफिस चली मुसद्दी की बेटी’ के बारे में कहते हैं, ‘करीब ढाई साल पहले हमें दूरदर्शन से बुलावा आया था। उन्होंने कहा कि आप हमारे लिए क्या कर सकते हैं? हम लोग कई आइडिया लेकर गए थे। बात करते-करते उन्होंने पूछा कि क्या आप सीरियल ‘ऑफिस ऑफिस’ कर सकते हैं? मैंने कहा कि पुराना सीरियल बनाना अब मुश्किल है। आज सारे कलाकार सुपरस्टार बन चुके हैं, कोई टीवी चैनल उन्हें उस तरह अफॉर्ड नहीं कर सकता। सिर्फ कलाकार ही नहीं, दौर भी अब बदल चुका है। उस वक्त कॉमनमैन सिस्टम में पिसता था और हार जाता था। आज की जनरेशन वैसी नहीं है।’
अब मुसद्दीलाल की बेटी बाजी पलटेगी
निर्देशक उमेश आगे कहते हैं, ‘अचानक मेरे दिमाग में आया कि ‘ऑफिस ऑफिस चली मुसद्दी की बेटी’ बनाया जा सकता है। वो बेचारा कॉमन मैन था, जो सिस्टम में पिस जाता था। लेकिन आज की लड़की अलग है। यहां वो पहले हारेगी जरूर लेकिन फिर बाजी पलटेगी। आज की जनरेशन सवाल पूछती है, लड़ती है, वीडियो बनाती है। आज अगर किसी का काम नहीं होता तो वो पहले रील बनाता है, सोशल मीडिया पर वीडियो डालता है। सोशल मीडिया पर डालते ही सिस्टम हरकत में आ जाता है। हमने उसी दुनिया को पकड़ने की कोशिश की है।'
पुराने एक्टर्स को ना लेने का कारण सिर्फ फीस नहीं थी
आजकल पुराने शोज के रीबूट में कैमियो और नॉस्टैल्जिया सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। लेकिन उमेश मेहरा इस रास्ते पर नहीं जाना चाहते। इस बारे में वे कहते है, ‘अगर मैं पुराने एक्टर्स को लेकर आऊं, तो इसका मतलब है कि मुझे अपने नए कंटेंट पर भरोसा नहीं है। मैं पुराने चेहरों के सहारे सीरियल नहीं चलाना चाहता। नया सीरियल अपने दम पर खड़ा होना चाहिए।’
आज दो मिनट में ऑडियंस पकड़नी पड़ती है
टीवी के बदलते दौर पर बात करते हुए उमेश मेहरा साफ कहते हैं कि अब सबसे बड़ा मुकाबला मोबाइल से है। ‘आज सबसे बड़ा चैलेंज मोबाइल है। लोगों का अटेंशन स्पैन बहुत छोटा हो गया है। इसलिए हमने टीवी शो को उसी हिसाब से डिजाइन किया है। हर कैरेक्टर के पास 2-3 मिनट का ऐसा मोमेंट है, जो अकेले भी वायरल हो सके। आपने वो मोमेंट देखा और आपका एंटरटेनमेंट हो गया। अब कंटेंट उसी तरह बनाना पड़ता है।’
उमेश का कहना है कि टीवी सीरियल की मार्केटिंग का तरीका भी पूरी तरह बदल चुका है। ‘पहले होर्डिंग्स लगते थे, अखबारों में विज्ञापन जाते थे। अब पूरा फोकस डिजिटल मीडिया पर है। आज अगर दो मिनट का कंटेंट वायरल हो जाए तो करोड़ों लोग देख लेते हैं। अब वही असली मार्केटिंग है।’