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Uttar Pradesh: स्मार्ट मीटर पर योगी सरकार का 'संयमित प्रयास', लेकिन इस पहल के केन्द्र में क्या है?
इवेंट्स डेस्क
Published by: न्यूज डेस्क
Updated Wed, 29 Apr 2026 01:13 PM IST
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सार
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है और उपभोक्ताओं को कई तरह की राहत दी गई है। मुख्यमंत्री का साफ निर्देश है कि जब तक समिति की रिपोर्ट न आए, कोई जल्दबाजी नहीं होगी।
यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को राहत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लागू करने की प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ताओं की ओर से बड़े पैमाने पर असुविधा होने की बातें सामने आने लगी थीं। इसी के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी और उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया।
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विशेषज्ञ समिति में कौन-कौन हैं और वह क्या करेगी?
सरकार ने जो विशेषज्ञ समिति बनाई है उसमें IIT कानपुर के प्रोफेसर, तकनीकी अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ और विद्युत क्षेत्र के अनुभवी अधिकारी शामिल हैं। यह समिति स्मार्ट मीटर के तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ उपभोक्ता हितों के व्यावहारिक पहलुओं का भी गहन विश्लेषण करेगी। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि जब तक समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती, स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया स्थगित रहेगी।
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उपभोक्ताओं को क्या-क्या राहत दी गई है?
सरकार ने उपभोक्ताओं को कई तरह की तत्काल राहत दी है...
- बिजली आपूर्ति: जीरो बैलेंस की स्थिति में भी सीमित अवधि तक बिजली आपूर्ति जारी रखने का प्रावधान किया गया है। नई स्थापना के बाद एक निर्धारित समय तक किसी भी प्रकार की कटौती नहीं होगी।
- कनेक्शन काटने पर रोक: मुख्यमंत्री का साफ निर्देश है कि यदि उपभोक्ता की कोई गलती नहीं है तो उसका बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। एक निश्चित सीमा तक कनेक्शन न काटने का निर्णय भी लिया गया है।
- अवकाश के दिन: छुट्टी के दिनों में किसी का भी कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
- SMS अलर्ट: बहु-स्तरीय SMS अलर्ट प्रणाली लागू की गई है ताकि उपभोक्ताओं को समय रहते जानकारी मिले और उन्हें अनावश्यक असुविधा से बचाया जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस पूरे मामले पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख शुरू से उपभोक्ता-केंद्रित रहा है। उनका स्पष्ट कथन है कि आम उपभोक्ता मूलतः ईमानदार होता है और यदि उसे सही बिल मिले तो वह भुगतान करने में पीछे नहीं हटता। इसी सोच के आधार पर निर्देश दिए गए हैं कि तकनीकी सुधार की प्रक्रिया आम नागरिक पर अतिरिक्त बोझ डालकर नहीं बल्कि उसे साथ लेकर आगे बढ़ाई जाएगी।
जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं?
सरकार ने सात दिन का विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जिसमें अधिकारियों को घर-घर भेजकर उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनी जाएंगी और मौके पर ही समाधान किया जाएगा। हेल्पलाइन 1912 को सक्रिय किया गया है। शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। ओवर बिलिंग के मामलों में त्वरित कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।
स्मार्ट मीटर पर अंतिम फैसला कब और कैसे होगा?
सरकार का स्पष्ट रुख है। पहले तथ्यों की जांच, फिर संतुलित निर्णय, उसके बाद ही क्रियान्वयन। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का फैसला होगा। सरकार ने संकेत दिया है कि स्मार्ट मीटर तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक जरूरी कदम है, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया पारदर्शी, संतुलित और उपभोक्ता-केंद्रित होनी चाहिए। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार का उद्देश्य केवल राजस्व वृद्धि नहीं बल्कि उपभोक्ता संतुष्टि और सेवा की गुणवत्ता बेहतर बनाना भी है।

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