घर-गाड़ी से Concert-Travel तक: जरूरत से लाफइस्टाइल तक कैसे पहुंचा लोन? क्यों तेजी से कर्ज ले रहे Gen Z?
Gen Z में लोन अब सिर्फ घर-गाड़ी जैसी जरूरतों तक सीमित नहीं है। BNPL, क्रेडिट कार्ड और छोटे पर्सनल लोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। युवा कॉन्सर्ट, ट्रैवल और लाइफस्टाइल पर भी उधार खर्च कर रहे हैं। आईए जानतें है कि जेन-जी का यह नया शौक क्यों चिंता का विषय है?
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विस्तार
पहले की पीढ़ियों में लोग आमतौर पर 30-40 की उम्र के बाद ही लोन लेते थे। 1960 और 1970 के दशक में जन्मे लोगों ने अक्सर घर या गाड़ी जैसे बड़े खर्चों के लिए पहली बार लोन लिया। लेकिन 2000 के दशक में जन्मी पीढ़ी यानी Gen-Z ने क्रेडिट की दुनिया में काफी जल्दी कदम रखा है। Gen-Z 22 की उम्र से ही क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन और EMI जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
क्या है BNPL?
Gen-Z करीब 22 साल की उम्र से ही क्रेडिट सिस्टम का हिस्सा बनने लगे हैं। इसकी शुरुआत अक्सर छोटे लोन, Buy Now Pay Later यानी BNPL जैसे विकल्पों से होती है। BNPL का मतलब है कि अभी खरीदो और बाद में भुगतान करो। पहले लोग लोन का इस्तेमाल घर, कार या किसी बड़े सामान के लिए किया जाता था। लेकिन Gen Z में यह तस्वीर बदल रही है। अब क्रेडिट की शुरुआत छोटी खरीदारी और कम समय के लिए, लिए गए छोटे लोन से हो रही है।
भारत में क्या बदलाव हो रहे हैं?
- एक सर्वे के अनुसार भारत में लोगों के लोन लेने का तरीका तेजी से बदल रहा है। मार्च 2026 तक घर खरीदने के अलावा लिए जाने वाले रिटेल लोन की हिस्सेदारी कुल घरेलू कर्ज में 58.4% हो गई। एक साल पहले यह आंकड़ा 54.9% था।
- वहीं, पर्सनल लोन में बड़ा उछाल देखने को मिला है। सोने के बदले लिए जाने वाले लोन मार्च 2022 के 74,738 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 में 4.61 लाख करोड़ रुपये हो गए। इसके साथ ही दूसरे पर्सनल लोन भी करीब दोगुने होकर 9.02 लाख करोड़ से बढ़कर 17.32 लाख करोड़ रुपये पहुंच गए हैं।

छोटे अमाउंट वाले लोन में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 50 हजार रुपये से कम के लोन में Fintech कंपनियों की हिस्सेदारी 56.8% हो गई है। इस सेगमेंट में क्रेडिट करीब 41.6% बढ़ा है, लेकिन करीब 6.4% लोन की किस्तें समय पर नहीं चुकाई जा रही हैं। खास बात यह है कि Fintech कंपनियों से मिलने वाले बिना गारंटी वाले लोन का करीब आधा हिस्सा 35 साल से कम उम्र के लोगों को दिया जा रहा है। यानी युवा तेजी से छोटे लोन और डिजिटल क्रेडिट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
युवाओं को क्यों आसान लग रहा है उधार?
भारत में लोन लेने का चलन सभी उम्र के लोगों में एक जैसा नहीं है। युवाओं में अब लोन लेने की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही, जरूरत की चीजें खरीदने के लिए लोन या क्रेडिट का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। आज करीब आधे क्रेडिट-एक्टिव लोगों के पास हैं।
युवा खर्च किस चीज पर कर रहे हैं?
पिछले 10 साल में भारत में क्रेडिट लेने का ट्रेंड काफी बदला है। 2017 में जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 5% थी, जो 2024 में बढ़कर 18% हो गई। हालांकि 2026 में यह घटकर 15% रह गई। वहीं, क्रेडिट लेने वाले लोगों में युवाओं की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। 2017 में यह 33% थी, जो 2026 में बढ़कर 39% हो गई।
चिंता सिर्फ इस बात की नहीं है कि युवा लोन ले रहे हैं, बल्कि यह है कि वे इस पैसे का इस्तेमाल किस लिए कर रहे हैं। पहले लोन का इस्तेमाल घर या कार जैसी संपत्ति बनाने के लिए ज्यादा होता था। अब क्रेडिट का इस्तेमाल तुरंत खरीदारी और लाइफस्टाइल खर्चों के लिए भी बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में क्रेडिट कार्ड का बकाया 3 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया, वहीं समय पर भुगतान न करने वाले मामलों में 40% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

ज्यादा लोन चिंता का विषय क्यों?
रिपोर्ट में एक क्रेडिट ब्यूरो के अधिकारी ने युवा उधारकर्ताओं को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर युवा कम उम्र में ही ज्यादा कर्ज लेने लगते हैं, तो सवाल उठता है कि वे भविष्य में इन लोन की EMI समय पर चुका पाएंगे या नहीं। खासकर पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और दूसरी कंजम्पशन लोन में जोखिम ज्यादा हो सकता है। इसकी एक वजह यह है कि कई बार लोन देने वाली कंपनियां युवा ग्राहक की कमाई और उसकी वास्तविक भुगतान क्षमता का सही अंदाजा नहीं लगा पातीं।
क्या लोन सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, Lifestyle बन गया है?
- Gen Z में क्रेडिट का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी या जरूरी सामान खरीदने तक सीमित नहीं है। अब कॉन्सर्ट, ट्रैवल और दूसरे एक्सपीरियंस के लिए भी युवा क्रेडिट कार्ड और लोन का सहारा ले रहे हैं।
- पिछले 24 महीनों में म्यूजिक कॉन्सर्ट से करीब 1,600-2,000 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है। इनमें बड़ी संख्या Gen Z की है और कुछ युवा एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
ट्रैवल में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। 62% Gen Z युवाओं ने 2026 में कॉन्सर्ट या म्यूजिक फेस्टिवल के आसपास ट्रैवल करने की योजना बनाई। वहीं, 76% युवा ऐसे इवेंट के लिए पहली बार किसी शहर गए। एक इवेंट के लिए उनका औसत खर्च करीब 51 हजार रुपये रहा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि 10 में से 6 युवा अपनी मासिक कमाई का 21-40% तक म्यूजिक और ट्रैवल जैसे एक्सपीरियंस पर खर्च करने को तैयार हैं। वहीं, करीब 10% युवा अपनी आधी कमाई तक खर्च करने के लिए तैयार हैं।