Travel Redefined: फैंसी रेस्त्रां में 3000 की प्लेट से बेहतर बैंकॉक में 300 की डिश, यही है ट्रेवल पगलू वाइब
पैसे कम हों या ज्यादा जेन-जी को फर्क नहीं पड़ता। इन्हें चाहिए बस एक बैग, फ्लाइट टिकट और नया एडवेंचर। बजट टाइट है तो क्या, ट्रिप कैंसिल नहीं होती प्लान बदल जाता है। यही है असली ‘ट्रैवल पगलू’ वाइब, जहां सपने बड़े और रोकने वाला कोई नहीं।
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सोचिए जरा...। बजट टाइट है। बैंक अकाउंट में भी ज्यादा कुछ नहीं है, फिर भी दिमाग में बाली का प्लान चल रहा है। ज्यादातर लोग बोलेंगे कि अगली बार देखते हैं। लेकिन कुछ जेन-जी ऐसे भी हैं, जो 30,000 रुपये की फ्लाइट बुक करके तीन घंटे लगाकर दो हजार वाला होटल ढूंढेंगे। यही है ट्रैवल पगलू वाइब। यानी कम बजट, बड़े सपने और एक ऐसा जुनून जो रुकने का नाम नहीं लेता।
जेब खाली, जोश फुल
युवाओं के लिए ट्रेवल अब लग्जरी नहीं है। यह जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। Agoda की 2026 की ट्रेवल आउटपुट रिपोर्ट कहती है कि ये लोग एक बड़ी सालाना छुट्टी की जगह साल में कई छोटे-छोटे ब्रेक चाहते हैं।
और पैसों का जुगाड़? वो भी है इनके पास —
- 56% जेन-जी रोज के खर्चे काटकर ट्रिप के लिए पैसे जोड़ते हैं।
- 48% शॉपिंग कम कर देते हैं। यानी बड़े ब्रांड छोड़ो, बाली जैसी जगह चलो।
- 31% ने तो कैब राइड्स ही बंद कर दीं।
- 59% जेन-जी विदेश में घूमने जाना पंसद करते हैं, लेकिन सिर्फ 44% ही रहने पर एक्स्ट्रा पैसा खर्च करना पसंद करते हैं।
साल में 3 ट्रिप? हां, कोई बात नहीं!
अब मामला थोड़ा दिलचस्प हो जाता है। इन लोगों के लिए घूमना एक इवेंट नहीं, रूटीन है। 52% जेन-जी साल में कम से कम तीन बार ट्रिप करते हैं। बीच हफ्ते का सडन ब्रेक हो, या एक छोटी इंटरनेशनल ट्रिप। और फैमिली ट्रिप वाला एंगल सुनिए। 48% जेन-जी परिवार के साथ इसलिए जाते हैं ताकि खर्चा बंट जाए।
प्लानिंग का दर्द असली है
ये लोग घूमना तो चाहते हैं, लेकिन प्लानिंग इनके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है।
- 87% जेन-जी को ट्रिप बुक करना बेहद मुश्किल लगता है। दुनियाभर में ये आंकड़ा सिर्फ 52% है।
- 64% इसी कन्फ्यूजन में ट्रिप बुक ही नहीं कर पाते।
- 49% के लिए सबसे बड़ी टेंशन है बजट की प्लानिंग।
AI है नया ट्रेवल एजेंट
गूगल मैप्स और ट्रेवल ब्लॉग्स का जमाना तो जैसे गया। जेन-जी ने AI को अपना पर्सनल ट्रेवल बना लिया है।
- 87% AI use करने में पूरी तरह कॉन्फिडेंट हैं।
- 51% नई डेस्टिनेशन ढूंढने के लिए AI से पूछते हैं।
- 47% उड़ानें और होटल को कम्पेयर करने में AI का इस्तेमाल करते हैं।
- 37% तो बुकिंग भी AI से करवाते हैं।
मतलब जेन-जी का ट्रिपल प्लान AI से शुरू होता है और इंस्टाग्राम से कन्फर्म होता है।
इंस्टाग्राम लायक नहीं तो जाना क्यों?
कोई जगह ट्रेंडिंग नहीं, एस्थेटिक नहीं तो क्या आप वहां जाएंगे? शायद नहीं।
- 70% घूमने की इंस्पिरेशन जेन-जी सोशल मीडिया से लेते हैं। प्लान भले ही AI की मदद से करें।
- 43% सिर्फ उन्हीं जगहों को तरजीह देते हैं जो इंस्टाग्राम लायक हों।
- 83% जेन-जी लड़कियां सोलो ट्रेवल चाहती हैं क्योंकि इससे कॉन्फिडेंस बढ़ता है।
घूमना मतलब मानसिक शांति
और ये सिर्फ फन के बारे में नहीं है। जेन-जी के लिए ट्रेवल एक मेंटल हेल्थ टूल भी है।
- 93% जेन-जी का मानना है कि यात्रा करने से मेंटल हेल्थ बेहतर होती है।
- 73% जेन-जी खास तौर पर रिलैक्स होने और हर दिन की टेंशन के लिए छुट्टियां का प्लान करते हैं।
- 56% जेन-जी ऐसे ट्रैवल ब्रांड्स को पसंद करते हैं, जो इको-फ्रेंडली और टिकाऊ हों।
- 23% जेन-जी कम प्रदूषण वाली जगहों के लिए अधिक पैसे देने को भी तैयार हैं।
और सबसे बड़ी बात?
बैंकॉक की सड़क पर 300 रुपये वैल्यू की डिश किसी फैंसी रेस्त्रां की 3,000 रुपये वाली प्लेट से ज्यादा यादगार होती है। जेन-जी को यही फिलॉसफी समझ आ गई है और वो गलत भी नहीं हैं।