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Soulmaxxing: ओवरथिंकिंग और करियर स्ट्रेस के बीच अध्यात्म का सहारा, Gen Z क्यों कर रहे मेडिटेशन और प्रार्थना?

Tue, 28 Jul 2026 06:06 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 28 Jul 2026 06:06 PM IST
सार

ओवरथिंकिंग, करियर का दबाव और सोशल मीडिया की लगातार भागदौड़ के बीच Gen Z अब अध्यात्म को मानसिक शांति और आत्म-संतुलन के साधन के रूप में अपना रहे हैं। मेडिटेशन, योग और प्रार्थना उनके लिए तनाव कम करने, फोकस बढ़ाने और खुद से जुड़ने का एक व्यावहारिक तरीका बनते जा रहे हैं।

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Soulmaxxing: Why is Gen Z turning to meditation and prayer amid overthinking and career stress?
Soulmaxxing - फोटो : Ai

विस्तार

भारत में अध्यात्म हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। पूजा-पाठ, योग, ध्यान, मंत्र या प्रार्थना जैसी चीजें हमारे आसपास हमेशा से मौजूद रही हैं। लेकिन अब Gen Z इन्हें सिर्फ धर्म या परंपरा के नजरिए से नहीं देख रहे। उनके लिए अध्यात्म धीरे-धीरे मन को शांत रखने और जिंदगी में संतुलन बनाने का एक तरीका बन रहा है।

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दुनिया के कई हिस्सों में नई पीढ़ी संगठित धर्म से दूर हो रही है। Pew Research Center की एक स्टडी के मुताबिक, 2010 से 2020 के बीच धार्मिक पहचान रखने वाले लोगों की हिस्सेदारी में करीब 1% की कमी आई, जबकि किसी धर्म से खुद को न जोड़ने वाले लोगों की हिस्सेदारी 23% से बढ़कर 24.2% हो गई।

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अध्यात्म को लेकर भारत के जेन जी की सोच क्या?

अध्यात्म को लेकर भारत में तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। एमटीवी यूथ स्टडी के मुताबिक, भारत के 62% Gen Z युवाओं का मानना है कि अध्यात्म उन्हें चीजों को बेहतर तरीके से समझने और स्पष्टता हासिल करने में मदद करता है। वहीं करीब 70% युवाओं ने कहा कि प्रार्थना करने के बाद वे ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करते हैं। यानी नई पीढ़ी अध्यात्म से दूर नहीं जा रही, बल्कि उसे अपने हिसाब से अपना रही है।

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Soulmaxxing: Why is Gen Z turning to meditation and prayer amid overthinking and career stress?
GenZ - फोटो : Ai

मेडिटेशन के तरफ क्यों जा रहे हैं जेन जी?

Gen Z के लिए मेडिटेशन अब सिर्फ धार्मिक क्रिया नहीं है। यह तनाव कम करने और फोकस बढ़ाने का तरीका भी है। योग केवल शरीर को फिट रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि मन को संतुलित रखने का जरिया भी बन रहा है। इसी तरह प्रार्थना या मंत्र जप कई युवाओं के लिए कुछ देर शांत बैठने और खुद से जुड़ने का माध्यम है।

इसके पीछे उनकी जिंदगी का बदलता माहौल भी है। पढ़ाई का दबाव, नौकरी और करियर की चिंता, रिश्तों की उलझन और सोशल मीडिया पर लगातार दूसरों से अपनी तुलना Gen Z बहुत कम उम्र से इन सबका सामना कर रहे हैं। दिनभर फोन पर नोटिफिकेशन, रील्स और जानकारी की भीड़ के बीच दिमाग को शांत होने का मौका कम मिलता है। ऐसे में बहुत से युवा उन चीजों की तलाश कर रहे हैं, जो उन्हें कुछ देर के लिए इस शोर से बाहर निकाल सकें। यहीं अध्यात्म उनके काम आता है।

Soulmaxxing: Why is Gen Z turning to meditation and prayer amid overthinking and career stress?
GenZ - फोटो : Ai

पिछली पीढ़ियों से कैसे अलग है जेन जी?

इस पीढ़ी की एक खास बात यह भी है कि वह किसी बात को सिर्फ इसलिए मानने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि पिछली पीढ़ियां उसे मानती आई हैं। वह सवाल करती है और जानना चाहते हैं कि इससे मेरी जिंदगी में क्या बदलता है?

अगर मेडिटेशन से तनाव कम होता है, तो वह इसे अपनाते हैं। अगर किसी मुश्किल समय में प्रार्थना से हिम्मत मिलती है, तो वह प्रार्थना करते हैं। अगर योग से मन और शरीर बेहतर महसूस करते हैं, तो उसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेते हैं। यानी अध्यात्म अब केवल नियमों और परंपराओं तक सीमित नहीं है। यह ज्यादा पर्सनल और प्रैक्टिकल होता जा रहा है।

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GenZ - फोटो : Ai

पार्टी, सोशल मीडिया और लगातार मनोरंजन कुछ समय के लिए परेशानियों से ध्यान हटा सकते हैं, लेकिन हर समय का शोर आखिरकार थका भी सकता है। शायद यही वजह है कि कई युवाओं के लिए अब शांति भी एक नई जरूरत बन रही है। कभी सुबह के कुछ शांत मिनट, कभी मेडिटेशन, कभी योग और कभी सिर्फ आंखें बंद करके प्रार्थना करना ये छोटी-छोटी चीजें उन्हें भागती जिंदगी के बीच रुकने का मौका देती हैं।

खासकर करियर में असफलता, खुद पर शक, रिश्तों की परेशानी या जिंदगी के मुश्किल दौर में अध्यात्म समस्याओं को खत्म तो नहीं करता, लेकिन उनसे निपटने के लिए मन को संभालने का एक सहारा जरूर बन सकता है।

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