करनाल। अधिकांश लोगों ने सोमवार रात्रि में ही होलिका दहन करना उचित समझा, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद मंगलवार रात्रि में होलिका दहन किया।
होलिका दहन से पूर्व लोगों ने अपने बच्चों के गले में फलों व ड्राई फ्रूट से बनी कंडी पहनाकर उन्हें होलिका माता की परिक्रमा करवाई। मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चों की नजर दोष और नकारात्मक प्रभावों से रक्षा होती है। परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होकर विधि-विधान से पूजा करते नजर आए। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए और सुख-समृद्धि की कामना की।
शहर के सदर बाजार, पुराने डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक, शिव कॉलोनी रजवाहा, जुंडला गेट सहित विभिन्न मोहल्लों में देर रात तक होलिका दहन का आयोजन किया गया। होलिका की अग्नि में लोगों ने गेहूं की बालियां, नारियल और अन्य सामग्री अर्पित कर परिवार की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की। संवाद