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Ambala News: पिता बोले- झगड़े में बड़ा बेटा कहता था गोलियाें से भून दूंगा पर छोटे ने कहीं का नहीं छोड़ा
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। शहजादपुर के बिचपड़ी गांव में स्वास्थ्य विभाग के डीजी कार्यालय में सहायक पद से सेवानिवृत्त सतबीर का परिवार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया है। उनके छोटे बेटे अभिषेक पर बड़े भाई संदीप, चाचा महेंद्र, दादी इसराे देवी की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है।
वहीं चाची अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। यह वारदात शनिवार की शाम को हुई थी। इस घटना ने सतबीर के परिवार को झकझोर दिया है। रविवार को गांव में परिजनों के शव पोस्टमार्टम के बाद आने का इंतजार कर रहे सतबीर अपने आप को टूटा हुआ महसूस करते दिखे। उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा अक्सर रुपयों आदि काे लेकर झगड़ता रहता था मगर छोटे ने कभी गुस्सा नहीं दिखाया। घटना से पांच दिन पहले भी बड़ा बेटा संदीप माता-पिता से काफी लड़ा और यहां तक कहने लगा कि गोलियों से भून दूंगा, तब हमने सोचा कि यह तो कहता रहता है छोड़ो।
हमें क्या पता था कि छोटा बेटा ऐसा काम कर देगा कि हम कहीं के नहीं रहंगे। जब उसने मेरे सामने मेरे छोटे भाई महेंद्र को गोली मारी तो मैंने कहा था- दो गोली मुझे भी मार दे, मैं ह भार अब कैसे उठाऊंगा।
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आरोपी के पिता सतबीर ने बताया कि एक साल पहले भी खेत से मिट्टी उठाने को लेकर कुछ रुपये आए थे। तब बड़े बेटे संदीप ने बहस की थी। यहां तक कि मिट्टी उठान का काम शुरू हुआ तो खेत में पानी छोड़ दिया। इसके बाद हमें ही फोन कर कहा कि खेत में आ जाओ गंडासी लेकर बैठा हूं एक-एक को काट दूंगा। इस बात से मेरे सीने में दर्द उठ गया था। तब छोटे बेटे अभिषेक ने कहा था, चलाे खेत में चलते हैं आज फैसला कर लेते हैं। मगर मैंने कहा कि मुझे अस्पताल ले जाओ बाद में देखेंगे। तब मुझे दिल का दौरा पड़ा था तो स्टंट डले थे। लगता था कि एक दिन बड़ा बेटा कोई ऐसी अप्रिय घटना करेगा। मगर छोटा ऐसा करेगा यह कल्पना भी नहीं की थी। सतबीर इस घटना को याद कर बार-बार रो रहे थे। उन्होंने बताया कि दोनों बेटे शराब या तंबाकू का बिल्कुल भी सेवन नहीं करते थे।
अंबाला। शहजादपुर के बिचपड़ी गांव में स्वास्थ्य विभाग के डीजी कार्यालय में सहायक पद से सेवानिवृत्त सतबीर का परिवार ताश के पत्तों की तरह बिखर गया है। उनके छोटे बेटे अभिषेक पर बड़े भाई संदीप, चाचा महेंद्र, दादी इसराे देवी की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है।
वहीं चाची अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। यह वारदात शनिवार की शाम को हुई थी। इस घटना ने सतबीर के परिवार को झकझोर दिया है। रविवार को गांव में परिजनों के शव पोस्टमार्टम के बाद आने का इंतजार कर रहे सतबीर अपने आप को टूटा हुआ महसूस करते दिखे। उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा अक्सर रुपयों आदि काे लेकर झगड़ता रहता था मगर छोटे ने कभी गुस्सा नहीं दिखाया। घटना से पांच दिन पहले भी बड़ा बेटा संदीप माता-पिता से काफी लड़ा और यहां तक कहने लगा कि गोलियों से भून दूंगा, तब हमने सोचा कि यह तो कहता रहता है छोड़ो।
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हमें क्या पता था कि छोटा बेटा ऐसा काम कर देगा कि हम कहीं के नहीं रहंगे। जब उसने मेरे सामने मेरे छोटे भाई महेंद्र को गोली मारी तो मैंने कहा था- दो गोली मुझे भी मार दे, मैं ह भार अब कैसे उठाऊंगा।
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