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Ambala News: साइंस और ग्लासवेयर उद्योग को मिलेगी नई ऊर्जा
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अनिल अग्रवाल
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- एमएसएमई को चैम्पियन्स के रूप में विकसित करने के फैसले का उद्यमियों ने किया स्वागत
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 ने अंबाला के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में उत्साह की लहर है। सरकार ने एमएसएमई को चैम्पियन्स के रूप में विकसित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की समर्पित एसएमई विकास निधि और आत्मनिर्भर भारत निधि में 2,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टॉप-अप की घोषणा की है। अंबाला के विज्ञान और ग्लासवेयर उद्योग के लिए सबसे बड़ी राहत 200 पुराने उद्योग समूहों को पुनर्जीवित करने की स्कीम से है। इससे दशकों पुराने अंबाला के औद्योगिक क्लस्टर्स को आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे से लैस होने का मौका मिलेगा।
वैश्विक बाजार में आसान होगी पहुंच
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की सीमा को समाप्त कर दिया गया है, जिससे अंबाला के छोटे निर्यातक सीधे वैश्विक बाजार तक अपनी पहुंच बना सकेंगे। उद्योग संचालकों का कहना है कि सरकार के बजट के अनुरूप धरातल पर यह योजनाएं उतरीं तभी इसका फायदा मिल सकेगा, क्योंकि कई बार योजनाएं तो अच्छी आ जाती हैं मगर उनका धरातल पर लाभ नहीं मिल पाता।
केंद्रीय बजट में 10,000 करोड़ के ग्रोथ फंड की घोषणा एमएसएमई को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानने की दिशा में एक सकारात्मक कदम तो है, लेकिन छोटे उद्योगों की असली लड़ाई पूंजी की उपलब्धता से ज्यादा भुगतान की अनिश्चितता और जटिल अनुपालन से है। औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार की योजनाएं तभी सार्थक होंगी जब उनका लाभ अंतिम कतार में खड़े उद्यमी तक पहुंचेगा। आज एमएसएमई को केवल सरकारी सहायता या संकेतों की नहीं, बल्कि समयबद्ध भुगतान की गारंटी, सस्ते ऋण और सम्मानजनक भागीदारी की दरकार है। आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न केवल बजटीय आवंटन से नहीं, बल्कि नीतिगत स्पष्टता और धरातल पर तेज क्रियान्वयन से ही साकार होगा। -उमाकांत, महासचिव, असीमा
पुराने उद्योग समूहों को पुनर्जीवित करने की योजना अंबाला के लिए गेम-चेंजर है। इससे हमें अपनी पुरानी विनिर्माण इकाइयों को अत्याधुनिक बनाने में सरकारी मदद मिलेगी। सरकार की बजट से मंशा अच्छी दिखाई देती है मगर इसे धरातल तक लागू कराने के लिए भी इतना ही जोर देने की जरूरत है। -गौरव सोनी, पूर्व महासचिव, अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन (असीमा)
कूरियर निर्यात पर सीमा हटने से अब हम छोटे ऑर्डर भी बिना किसी बाधा के विदेश भेज पाएंगे। यह हमारे जैसे छोटे उद्यमियों के लिए बड़ी राहत है। - अश्वनी नागपाल, प्रेसीडेंट, साइंटिफिक अपार्ट्स मैन्युफेक्चरर्स एंड एक्सपोटर्स
10,000 करोड़ रुपये का एसएमई विकास कोष पूंजी की समस्या को दूर करेगा। इसका लाभ किस प्रकार से उद्योग संचालक ले सकते हैं इसकी जानकारी उन्हें आसान भाषा में विभाग द्वारा दी जानी चाहिए। इसके साथ ही टियर-2 शहरों में कारपोरेट मित्र की सुविधा से अनुपालन संबंधी औपचारिकताएं भी आसान होंगी।
-सौरभ नागपाल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, असीमा
अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और एआई अनुप्रयोगों पर जोर देने से अंबाला के वैज्ञानिक उपकरणों की गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी। यह बजट उद्योग संचालकों खासकर एमएसएमई के लिए है। -अनिल अग्रवाल, उद्योग संचालक
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 ने अंबाला के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) में उत्साह की लहर है। सरकार ने एमएसएमई को चैम्पियन्स के रूप में विकसित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की समर्पित एसएमई विकास निधि और आत्मनिर्भर भारत निधि में 2,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टॉप-अप की घोषणा की है। अंबाला के विज्ञान और ग्लासवेयर उद्योग के लिए सबसे बड़ी राहत 200 पुराने उद्योग समूहों को पुनर्जीवित करने की स्कीम से है। इससे दशकों पुराने अंबाला के औद्योगिक क्लस्टर्स को आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे से लैस होने का मौका मिलेगा।
वैश्विक बाजार में आसान होगी पहुंच
निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की सीमा को समाप्त कर दिया गया है, जिससे अंबाला के छोटे निर्यातक सीधे वैश्विक बाजार तक अपनी पहुंच बना सकेंगे। उद्योग संचालकों का कहना है कि सरकार के बजट के अनुरूप धरातल पर यह योजनाएं उतरीं तभी इसका फायदा मिल सकेगा, क्योंकि कई बार योजनाएं तो अच्छी आ जाती हैं मगर उनका धरातल पर लाभ नहीं मिल पाता।
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केंद्रीय बजट में 10,000 करोड़ के ग्रोथ फंड की घोषणा एमएसएमई को अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानने की दिशा में एक सकारात्मक कदम तो है, लेकिन छोटे उद्योगों की असली लड़ाई पूंजी की उपलब्धता से ज्यादा भुगतान की अनिश्चितता और जटिल अनुपालन से है। औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार की योजनाएं तभी सार्थक होंगी जब उनका लाभ अंतिम कतार में खड़े उद्यमी तक पहुंचेगा। आज एमएसएमई को केवल सरकारी सहायता या संकेतों की नहीं, बल्कि समयबद्ध भुगतान की गारंटी, सस्ते ऋण और सम्मानजनक भागीदारी की दरकार है। आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न केवल बजटीय आवंटन से नहीं, बल्कि नीतिगत स्पष्टता और धरातल पर तेज क्रियान्वयन से ही साकार होगा। -उमाकांत, महासचिव, असीमा
पुराने उद्योग समूहों को पुनर्जीवित करने की योजना अंबाला के लिए गेम-चेंजर है। इससे हमें अपनी पुरानी विनिर्माण इकाइयों को अत्याधुनिक बनाने में सरकारी मदद मिलेगी। सरकार की बजट से मंशा अच्छी दिखाई देती है मगर इसे धरातल तक लागू कराने के लिए भी इतना ही जोर देने की जरूरत है। -गौरव सोनी, पूर्व महासचिव, अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन (असीमा)
कूरियर निर्यात पर सीमा हटने से अब हम छोटे ऑर्डर भी बिना किसी बाधा के विदेश भेज पाएंगे। यह हमारे जैसे छोटे उद्यमियों के लिए बड़ी राहत है। - अश्वनी नागपाल, प्रेसीडेंट, साइंटिफिक अपार्ट्स मैन्युफेक्चरर्स एंड एक्सपोटर्स
10,000 करोड़ रुपये का एसएमई विकास कोष पूंजी की समस्या को दूर करेगा। इसका लाभ किस प्रकार से उद्योग संचालक ले सकते हैं इसकी जानकारी उन्हें आसान भाषा में विभाग द्वारा दी जानी चाहिए। इसके साथ ही टियर-2 शहरों में कारपोरेट मित्र की सुविधा से अनुपालन संबंधी औपचारिकताएं भी आसान होंगी।
-सौरभ नागपाल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, असीमा
अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और एआई अनुप्रयोगों पर जोर देने से अंबाला के वैज्ञानिक उपकरणों की गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप होगी। यह बजट उद्योग संचालकों खासकर एमएसएमई के लिए है। -अनिल अग्रवाल, उद्योग संचालक

अनिल अग्रवाल

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