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Ambala News: अंबाला रिंग रोड परियोजना में शिव मंदिर को मिलेगा अधिग्रहण का आधा मुआवजा
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अंबाला सिटी। अंबाला रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे को लेकर कोर्ट ने फैसला सुनाया। फैसले के अनुसार, अदालत ने आदेश दिया है कि गांव बलाना स्थित शिव मंदिर की जमीन के बदले मिलने वाली कुल 40,78,006 रुपये की मुआवजा राशि का आधा हिस्सा मंदिर को दिया जाए। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने सुनाया।
अदालत ने गवाहों के बयानों और राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) का अवलोकन करने के बाद पाया कि मंदिर का संबंधित भूमि पर लंबे समय से कब्जा है। फैसले में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता (मंदिर) का जमीन पर स्थापित कब्जा है और प्रतिवादी (ग्राम पंचायत) ने भी आधी राशि देने पर सहमति जताई है। अतः मंदिर मुआवजे के 1/2 हिस्से का हकदार है। अदालत ने निर्देश दिया कि मुआवजा राशि का बंटवारा समान रूप से किया जाए।
यह था मामला
यह मामला नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा रिंग रोड निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन से जुड़ा है। गांव बलाना में स्थित मंदिर शिव जी महाराज की ओर से वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान कुलवंत सिंह ने याचिका दायर की थी। याचिका में मुआवजे पर अपना हक जताया था। याचिका में कहा गया था कि मंदिर लंबे समय से इस भूमि पर खेती कर रहा है और नहरी पानी का लगान भी भर रहा है।
ग्राम पंचायत ने जताई सहमति
शुरुआत में जमीन के मालिकाना हक को लेकर पेंच फंसा था, क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत मालिक थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत ने उदारता दिखाते हुए अदालत में बयान दिया कि चूंकि यह एक धार्मिक स्थान है, इसलिए उन्हें मुआवजे की आधी राशि मंदिर को देने पर कोई आपत्ति नहीं है।
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अदालत ने गवाहों के बयानों और राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) का अवलोकन करने के बाद पाया कि मंदिर का संबंधित भूमि पर लंबे समय से कब्जा है। फैसले में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता (मंदिर) का जमीन पर स्थापित कब्जा है और प्रतिवादी (ग्राम पंचायत) ने भी आधी राशि देने पर सहमति जताई है। अतः मंदिर मुआवजे के 1/2 हिस्से का हकदार है। अदालत ने निर्देश दिया कि मुआवजा राशि का बंटवारा समान रूप से किया जाए।
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यह था मामला
यह मामला नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा रिंग रोड निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन से जुड़ा है। गांव बलाना में स्थित मंदिर शिव जी महाराज की ओर से वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान कुलवंत सिंह ने याचिका दायर की थी। याचिका में मुआवजे पर अपना हक जताया था। याचिका में कहा गया था कि मंदिर लंबे समय से इस भूमि पर खेती कर रहा है और नहरी पानी का लगान भी भर रहा है।
ग्राम पंचायत ने जताई सहमति
शुरुआत में जमीन के मालिकाना हक को लेकर पेंच फंसा था, क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड में ग्राम पंचायत मालिक थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत ने उदारता दिखाते हुए अदालत में बयान दिया कि चूंकि यह एक धार्मिक स्थान है, इसलिए उन्हें मुआवजे की आधी राशि मंदिर को देने पर कोई आपत्ति नहीं है।